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सुप्रीम कोर्ट ने लगाई फटकार, पत्रकार प्रशांत को कैसे किया गिरफ़तार

नोएडा। सुप्रीम कोर्ट ने उत्तर प्रदेश के पत्रकार प्रशांत कनोजिया को तुरंत रिहा करने के आदेश जारी किया है। बुधवार को मामले में सुनवाई करते हुए सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि ‘किसी की राय अलग हो सकती है, उन्होंने (प्रशांत) संभवतः वो ट्वीट नही लिखा या किया हो, लेकिन यह गिरफ्तारी किस आधार पर हुई है?’

कोर्ट ने यह भी कहा कि किसी भी नागरिकों के अधिकारों का हनन नहीं किया जा सकता। उसे यह संविधान से मिले हैं जो अबाध्य हैं और उन्हें बचाए रखना जरूरी है। कोर्ट ने प्रशांत के खिलाफ दर्ज मामले को लेकर भी सवाल उठाए हैं।

दरअसल, प्रशांत को सोशल मीडिया में मुख्यमंत्री से जुड़ा एक अपत्तिजनक वीडियो शेयर करने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद पत्रकार की पत्नी ने इस गिरफ्तारी पर सवाल उठाए थे और कोर्ट का दरवाजा खटखटाया था।

बता दें कि आठ जून को उत्तर प्रदेश पुलिस ने मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के खिलाफ आपत्तिजनक और अपमानजनक पोस्ट करने के आरोप में दिल्ली से पत्रकार प्रशांत कनौजिया को गिरफ्तार कर लिया था। कनौजिया के खिलाफ लखनऊ के हजरतगंज थाने में सात जून को आइपीसी की धारा 500, 505 और आइटी एक्ट की धारा 67 के तहत मामला दर्ज किया गया था।

सोमवार को कनौजिया के वकील नित्या रामकृष्ण ने जस्टिस इंदिरा बनर्जी और जस्टिस अजय रस्तोगी की अवकाशकालीन पीठ के समक्ष बंदी प्रत्यक्षीकरण याचिका दाखिल की थी। इसमें कनौजिया की गिरफ्तारी को पूरी तरह गैरकानूनी बताया गया था। इसके अलावा यह भी दलील दी गई थी कि जिन धाराओं में कनौजिया को आरोपित किया गया है उसमें उसे जेल भेजने की जरूरत नहीं थी, उसे जमानत दे दी जानी चाहिए थी। याचिका में गिरफ्तारी के तौर तरीके पर भी सवाल उठाए गए था।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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