Friday, May 8, 2026
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अजब गजब

सांप के जहर से भी ज्यादा खतरनाक है ये नदी, पानी पिया तो 6 सेकंड में मौत

लखनऊ। कहा जाता है कि सांप का काटा भी जिंदा रह सकता है, जहर पीने वाले व्यक्ति की भी जान बच सकती है लेकिन अगर आपने इस नदी का पानी पी लिया तो जिंदा नहीं बचेंगे। इस नदी के पास रहने वाले लोगों का मानना है कि जब भी इस नदी में बाढ़ आती है, यह बिना लोगों की जान लिए नहीं जाती। इस जगह आने वाले लोग केवल ड्राय फ्रूट्स खाकर जिंदा रहते हैं।

यह खतरनाक नदी है कर्मनाशा। कर्मनाशा नदी उत्तरप्रदेश के सोनभद्र, चंदौली, वाराणसी और गाजीपुर से होकर बिहार में बक्‍सर के पास गंगा नदी में मिल जाती है। इस नदी के बारे में कई पौराणिक किताबों से पता चलता है जिसके मुताबिक राजा हरिश्चंद्र के पिता और सूर्यवंशी राजा त्रिवंधन के बेटे सत्यव्रत, जो त्रिशंकु के नाम से लोकप्रिय हुए। उन्हीं के लार से यह नदी बनी। एक बार वे अपने कुल गुरु वशिष्ठ के यहां गए और उनसे शरीर के साथ स्वर्ग लोक में जाने की इच्‍छा बताई।

वशिष्ठ ने यह कहते हुए उनकी इच्छा पूरी करने से मना कर दिया कि स्वर्गलोक में शरीर के साथ जाना सनातनी नियमों के खिलाफ है। फिर वे वशिष्ठ पुत्रों के यहां पहुंचे और उनसे भी अपनी यही इच्छा जताई। उन्‍होंने गुरु वचन को ना मानने की बात कहकर उन्हें चंडाल होने का श्राप दे दिया।

इसके बाद वह महर्षि विश्वामित्र के यहां चले गए और वशिष्‍ठ द्वारा खुद को अपमानित करने की बात कही। उन्‍होंने अपने तपोबल से त्रिशंकु को शरीर के साथ स्वर्ग भेज दिया। देवता त्रिशंकु को स्वर्ग से धरती पर भेजने लगे। फिर त्रिशंकु धरती पर गिरने लगे। इसकी जानकारी होते ही विश्वामित्र ने दोबारा उन्हें स्‍वर्ग भेजने की कोशिश की। देवताओं और विश्वामित्र के युद्ध में सिर नीचे किए त्रिशंकु आसमान में ही लटके रह गए और मुंह से लार टपकने लगी। लार से नदी बनीं जो कि कर्मनाशा के नाम से पहचानी गई।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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