मध्यप्रदेश

समितियां दबाकर बैठीं किसानों के 361 करोड़, सीएस ने लगाई फटकार

भोपाल। प्रदेश में चना, मसूर और सरसों की बंपर खरीदी ने सरकार को चिंता में डाल दिया है। कहीं व्यापारियों द्वारा किसानों के नाम पर उपज ठिकाने लगाने की सूचनाएं मिल रही हैं तो आधा दर्जन जिलों में सहकारी समितियां किसानों के 361 करोड़ रुपए दबाकर बैठीं हैं।

इसको लेकर मुख्य सचिव बसंत प्रताप सिंह ने गुरुवार को वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में नाराजगी जताई और भुगतान जल्द करने के निर्देश कलेक्टर को दिए। साथ ही कहा कि अगले तीन दिन में होने वाली खरीदी और उस मंडी के लाइसेंसधारी व्यापारी के स्टॉक की गोदामों में जांच की जाए।

सूत्रों के मुताबिक मुख्य सचिव ने सागर, विदिशा, रायसेन, देवास, दमोह, राजगढ़, उज्जैन, हरदा, सीहोर, अशोकनगर, शाजापुर सहित अन्य जिलों के कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों से बात की। इस दौरान बताया गया कि दमोह में 53 करोड़, रायसेन में 145 करोड़, सीहोर में 88 करोड़ और हरदा में 75 करोड़ रुपए सहकारी समितियों के पास उपलब्ध हैें पर किसानों को लाभ का भुगतान नहीं किया गया।basant pratap 31 05 2018

खातेगांव में 48 घंटे, सोनकच्छ, कन्नौद और बागली में 12-12 घंटे किसानों की लाइनें तुलाई के लिए लगी हुई हैं। मुख्य सचिव ने कहा कि कलेक्टर और पुलिस अधीक्षक मंडी में आने वाले किसान और तुलाई में लगने वाले समय की निगरानी करें। अधिकारियों ने बताया कि हरदा में कुल रकबे के 88 फीसदी हिस्से के अनाज की खरीदी हुई है।

इसकी निगरानी करने की जरूरत है। इसी तरह होशगांबाद में चना के लिए पंजीकृत 84 प्रतिशत किसान अपनी उपज बेच चुके हैंे। सभी 15 जिलों में खरीदी समितियों के रिकार्ड सत्यापन कराएं, जिनमें से 95 प्रतिशत किसानों ने उपज बेच दी है। प्रति किसान से खरीदी का औसत भी अधिक आ रहा है।

मजिस्ट्रेट और पुलिस बल तैनात रखें

अधिकारियों ने बताया कि बैठक में कलेक्टर और पुलिस अधीक्षकों को निर्देश दिए गए कि जिन मंडियों में अनाज की आवक ज्यादा है, वहां मजिस्ट्रेट और पुलिस बल की व्यवस्था रखें। एक दिन में अत्याधिक खरीदी वाली मंडियों की सूची बनाकर भेजी जाए। अधिक आवक वाले जिलों में व्यापारियों द्वारा किसानों के नाम पर फसल बेचने की शिकायत आ रही हैं।

जिलों में ऐसे व्यापारियों के खिलाफ छापामार कार्रवाई की जाए, जिनको लेकर खुफिया रिपोर्ट है। दाल मिल के स्टॉक भी जांचे जाएं। सहकारिता विभाग अपना अमला भेजकर अधिक आवक वाली समितियों के स्टॉक, बोरे और रिकार्ड की जांच कराए और गड़बड़ी मिले तो समिति के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराई जाए।

सात लाख टन फसल का परिवहन बाकी

बैठक में बताया कि चार लाख टन गेहूं और तीन लाख टन चना, मसूर और सरसों का परिवहन नहीं हुआ है। 6 से 8 जून के बीच प्री-मानसून बारिश होने की संभावना है। बारिश में अनाज न भीगे, इसके लिए युद्ध स्तर पर परिवहन कराया जाए।

दमोह, सागर, रायसेन, गुना, अशोकनगर, शाजापुर, शिवपुरी और सीहोर में भंडारण की समस्या है। इसके लिए कलेक्टर खाली गोदामों को अधिग्रहीत करें। यदि भंडारण के लिए गोदाम न मिलें तो अनाज दूसरे जिलों में भेजा जाए। चना, मसूर और सरसों को प्राथमिकता के आधार पर बंद गोदामों में रखा जाए। समय पर परिवहन नहीं करने वाले परिवहनकर्ता के खिलाफ जुर्माना लगाने के साथ ब्लेक लिस्ट करने की कार्यवाही की जाए।

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