Latestमध्यप्रदेश

शिवराज कैबिनेट के तीसरे विस्तार में संतुलन साधने की चुनौती

भोपाल । प्रदेश की सत्ता संभालने के नौ महीने बाद मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान तीसरी बार तीन जनवरी (रविवार) को मंत्रिमंडल का विस्तार करेंगे। 28 विधानसभा क्षेत्रों में हुए उपचुनाव में राज्यसभा सदस्य ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थक तीन मंत्रियों के हार जाने के बाद अब कैबिनेट में छह मंत्रियों के लिए जगह बन सकती है।

हालांकि संभावना यही है कि सिर्फ सिंधिया समर्थक उन दो पूर्व मंत्रियों (गोविंद सिंह राजपूत और तुलसीराम सिलावट) को ही शपथ दिलाई जाएगी जिन्होंने बिना विधानसभा सदस्य बने मंत्री बनकर छह माह का कार्यकाल पूरा होने पर उपचुनाव से पहले अक्टूबर में इस्तीफा दिया था।

उधर, विधानसभा उपचुनाव हारने वाले ऐदल सिंह कंषाना पहले ही मंत्री पद छोड़ चुके हैं, वहीं इमरती देवी और गिर्राज डंडौतिया भी विधायक नहीं बन पाए हैं। उन्होंने भी अपना इस्तीफा मुख्यमंत्री को दे दिया था। उनके मंत्री बने छह महीने का समय दो जनवरी को खत्म हो जाएगा। इससे मंत्रियों की संख्या 28 ही रह जाएगी, जबकि विधानसभा में कुल सदस्य संख्या 230 के हिसाब से 15 फीसद यानी मुख्यमंत्री के अतिरिक्त 34 मंत्री हो सकते हैं।

राजभवन सूत्रों के मुताबिक, तीन जनवरी को दोपहर साढ़े 12 बजे शपथ ग्रहण आयोजित किया गया है। फिलहाल राज्यपाल आनंदीबेन पटेल राज्य से बाहर हैं, लेकिन वे शनिवार तक भोपाल पहुंच सकती हैं। अभी मंत्रिमंडल में ग्वालियर-चंबल संभाग का दबदबा मध्य प्रदेश में उपचुनाव में जीत से सत्ता सुरक्षित करने के बाद शिवराज मंत्रिमंडल में जातीय और भौगोलिक संतुलन बनाने की चुनौती है।

सिंधिया के कारण भाजपा के सत्ता में आने और फिर इसे बरकरार रखने के कारण अभी मंत्रिमंडल में ग्वालियर-चंबल संभाग का दबदबा है। पद कम,दावेदार ज्यादा महज छह पद रिक्त होने और दावेदारों की संख्या अधिक होने से भाजपा में एक अनार सौ बीमार वाली स्थिति है। मालूम हो, सिंधिया के महत्व के कारण पहले उनके 14 समर्थकों को मंत्रिमंडल में स्थान दिया गया था। इनमें से तुलसीराम सिलावट और गोविंद राजपूत संवैधानिक बाध्यताओं के कारण इस्तीफा दे चुके हैं। इसके अलावा ऐदलसिंह कंषाना, इमरती देवी और गिर्राज डंडौतिया चुनाव हार चुके हैं।

शिवराज के सामने दो विकल्प

एक : सिलावट और राजपूत को फिर से मंत्रिमंडल में शामिल किया जाए। ऐसे में रिक्त पद चार बचेंगे।

दो : तीन जनवरी को ही मंत्रिमंडल का नए सिरे से गठन किया जाए और प्रदेशभर से प्रतिनिधित्व देते हुए संतुलन बनाया जाए। इससे पार्टी संगठनात्मक और जनाधार विस्तार के दृष्टिकोण से संतुलन स्थापित कर सकती है।

विंध्य-महाकोशल को आस

ग्वालियर-चंबल के अतिरिक्त मालवा-निमाड़ अंचल का प्रतिनिधित्व भी मंत्रिमंडल में संतोषजनक है। विंध्य से रामखिलावन पटेल, मीना सिंह और बिसाहूलाल सिंह तो महाकोशल से रामकिशोर कांवरे ही हैं। इन दोनों क्षेत्रों को मंत्रिमंडल में प्रतिनिधित्व देने की मांग उठती रही है। यह संभावना भी है कि विंध्य-महाकोशल से राजेंद्र शुक्ल और अजय विश्नोई व मालवा से रमेश मेंदोला और चैतन्य काश्यप के नाम पर भी विचार किया जाए।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम