लाभार्थियों की कतार में सेवार्थी के देहदान पर श्रद्धांजलि के दो फूल भी नहीं प्रशासन के पास ?

कटनी। शहर के लोकप्रिय चिकित्सक एवं समाजसेवी तथा पर्यावरण प्रेमी डॉ संजय निगम के कल मंगलवार को असमय निधन की खबर ने शहर ही नहीं जिले को स्तब्ध कर दिया था। दरअसल डॉ संजय निगम की गिनती कटनी के उन चुनिंदा समाजसेवी लोगों में होती थी जो शहर के लोगों को जागरूक करने सदैव सक्रिय रहते थे। कल अचानक कार्डियक अटैक ने उन्हें ईश्वर ने हमसे छीन लिया। खास बात यह है कि डॉ संजय निगम ने न सिर्फ नेत्रदान किया था, वरन मृत्यु के पश्चात अपनी देह को भी मेडिकल कालेज को दान कर दिया था।
आज सुबह मेडिकल कालेज में दिवंगत डॉ निगम की देह सौंपने से पहले उनकी प्रिय जगह कटनी के जाग्रति पार्क में अंतिम दर्शन के लिए पार्थिव शरीर रखा गया था। शहर के विभिन्न क्षेत्रों से जागरूक लोगों ने अपने प्रिय समाजसेवी चिकित्सक को बिदाई दी, किंतु इस दौरान जिले के प्रशासन की ओर से किसी की भी उपस्थिति न होना न सिर्फ यहां चर्चा का विषय बनी रही, बल्कि कटनी के सरकारी तंत्र की संवेदनहीनता प्रदर्शित करती दिखी।
भले ही इस तरह का कोई प्रोटोकॉल न हो, लेकिन प्रोटोकॉल से बढ़कर मानवता भी होती है, यह शायद कटनी का प्रशासन भूल गया। जिले में यह पहला मामला था जब किसी की मृत्यु के पश्चात अंतिम संस्कार की जगह उंसके दिवंगत शरीर को मेडिकल कालेज को सौंपा गया, पर शायद यह बात कटनी के जिला स्तर के अधिकारियों के लिए कोई बड़ी बात नहीं। तभी तो जिला के प्रशासनिक मुखिया कलेक्टर या फिर पुलिस कप्तान की ओर से किसी मातहत को श्रद्धांजलि के दो फूल अर्पित करने की जहमत नहीं उठाई गई।
वैसे अक्सर देखा गया है कि राजनीति से जुड़े लोगों के घर अगर ऐसा कोई दुखद वाकया होता है तो कतारबद्ध अधिकारी सारे प्रोटोकॉल को दरकिनार करते अपना तथाकथित दुख व्यक्त करने के लिए व्याकुल रहते हैं। अफसोस डॉ संजय निगम किसी राजनीतिक दल के पदाधिकारी नहीं थे, न ही माननीयों की श्रेणी में। वो तो महज एक ऐसे जागरूक नागरिक थे जो जीवित रहते लोगों की सेवा और मरने के बाद भी अपनी देहदान का जज्बा लिए निस्वार्थ सेवार्थी थे।
निश्चित तौर पर सेवार्थी की जगह अगर वह भी लाभार्थी होते तो प्रशासन की ओर से उन्हें श्रद्धांजलि जरूर अर्पित की जाती। यही तो इस शहर या फिर इस समाज की बेशर्मी है कि अपनी देहदान का स्तुतय दान करने वाले के लिए लालफीताशाही के पास जरा सा भी वक्त नहीं था।
यहां यह भी उल्लेख करना आवश्यक है कि डॉ संजय निगम जिस जाग्रति पार्क के निर्माताओं में शामिल थे उंस पार्क की प्रबंधन समिति के अध्यक्ष जिले के कलेक्टर होते हैं। दिवंगत श्री निगम इस समिति के सचिव थे। यही नहीं सरकार आनंदम विभाग के लिए वह कई सक्रिय गतिविधियों के भी साक्षी रहे। रोटी कुटी के लिए भी डॉ निगम का योगदान भुलाया नहीं जा सकता । आज भी डॉ निगम निर्जीव शरीर के साथ मेडिकल कालेज में एक सेवार्थी के रूप में वैसे ही कर्तव्यरत रहेंगे जो शायद यहां लाखों पगार उठाने वाले कतिथ कर्तव्यशील जिम्मेदार भी नहीं हो पाएंगे।








