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राफेल : SC के फैसले के बाद संसद में सरकार हमलावर, गृहमंत्री बोले- माफी मांगे राहुल

नई दिल्ली। राफेल विमान सौदे को लेकर शुक्रवार को सुप्रीम कोर्ट का फैसला सरकार के पक्ष में आने से जहां कांग्रेस और अन्य विपक्षी दलों को बड़ा झटका लगा है वहीं सत्ता पक्ष मजबूत हुआ है।

संसद के शीतकालीन सत्र में राफेल मुद्दे पर सरकार को घेरने की कोशिश में लगा विपक्ष सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद खुद घिर गया है। शुक्रवार को संसद में इस फैसले की गूंज सुनाई दी और दोनों ही सदनों में जमकर हंगामा हुआ।

लोकसभा में केंद्रीय गृहमंत्री राजनाथ सिंह ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले की जानकारी देते हुए कहा कि विपक्ष के आरोपों से देश की छवि खराब हुई है। कांग्रेस अध्यक्ष ने राजनीतिक लाभ के लिए जनता को भ्रमित किया और दुनिया में देश की छवि खराब की। उन्हें सदन और देश से माफी मांगनी चाहिए। उन्हें लगा कि हम तो डूबे हैं सनम, तुम्हें भी ले डूबेंगे।

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वहीं राज्यसभा में भी अरुण जेटली ने इस मुद्दे पर बहस की मांग की है। सदन में हो रहे हंगामे के चलते लोकसभा स्पीकर ने सदन की कार्यवाही 17 दिसंबर के के लिए स्थगित कर दी है।

सरकार का पक्ष रखा और कहसे मिली बड़ी राहत के बाद भाजपा एक बार फिर कांग्रेस पर हमलावर है। कोर्ट के फैसले के बाद लगातार राफेल पर मोदी सरकार को घेरने वाली कांग्रेस बैकफुट पर नजर आ रही है। थोड़ी देर में भाजपा प्रेस कॉन्फ्रेंस करने वाली है। कहा जा रहा है कि भाजपा कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी का घेराव कर उनसे प्रधानमंत्री पर गंभीर आरोप लगाने के लिए माफी की मांग करेगी।

इससे पहले केंद्रीय कानून मंत्री रविशंकर प्रसाद ने भी कोर्ट के फैसले पर कहा है कि अब राफेल के मुद्दे को बंद हो जाना चाहिए। राफेल पर तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) सांसद सौगत रॉय बोले कि सुप्रीम कोर्ट ने वह कहा जो उसे लगता है, लेकिन राजनीतिक पार्टियां इसमें जीपीसी जांच की मांग करती हैं।

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राफेल पर कोर्ट का फैसला गलत : प्रशांत भूषण

उधर, राफेल पर जहां केंद्र व भाजपा सुप्रीम कोर्ट के फैसले पर खुश हैं, वहीं मुख्य याचिकाकर्ताओं में शामिल वरिष्ठ वकील प्रशांत भूषण ने कोर्ट के फैसले में नाखुशी जाहिर की हैं। प्रशांत भूषण ने राफेल पर सुप्रीम कोर्ट के फैसले को गलत बताया है। उन्होंने सवाल उठाया कि वायुसेना ने कभी ने कहा कि उसे 36 राफेल चाहिए। कोर्ट के फैसले के बावजूद प्रशांत भूषण अपने आरोपों पर अड़े रहे और कहा कि वायुसेना से बिना पूछे मोदी जी ने फ्रांस में जाकर समझौता कर लिया, इसके बाद तय कीमत से ज्यादा पैसा दे दिया। बाद में कोर्ट में कीमतों पर सीलबंद रिपोर्ट दे दी, जिसकी हमें जानकारी भी नहीं है। हालांकि, कोर्ट ने न तो ऑफसेट पार्टनर चुनने के मामले को भी गलत नहीं माना है।

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