Monday, May 11, 2026
Latest:
धर्म

यहां राजकुमारी के जौहर की याद में जलती है होलिका

जगदलपुर। देशभर में पौराणिक कथा के अनुसार हिरण्यकश्यप की बहन होलिका के दहन व विष्णु भक्त प्रहलाद की याद में होलिकोत्सव मनाया जाता है। लेकिन आदिवासी बहुल बस्तर संभाग के दंतेवाड़ा में ऐसी राजकुमारी की याद में होलिका जलती है, जिसने अपनी अस्मिता बचाने के लिए आग की लपटों में कूदकर जौहर कर लिया था।

यह होलिका बस्तर में जलने वाली पहली होलिका मानी जाती है। यहां लोग रंग-गुलाल से नहीं बल्कि मिट्टी से होली खेलते हैं। दंतेश्वरी मंदिर के पुजारी हरिहर नाथ बताते हैं कि राजकुमारी का नाम तो किसी को पता नहीं लेकिन दक्षिण बस्तर में लोककथा प्रचलित है कि सैकड़ों साल पहले बस्तर की एक राजकुमारी के अपहरण की कोशिश किसी आक्रमणकारी ने की थी।

खुद को बचाने राजकुमारी मंदिर के सामने आग प्रज्ज्वलित कर उसमें समा गई थी। इस घटना की याद में तत्कालीन राजाओं ने राजकुमारी की एक प्रतिमा स्थापित कराई, जिसे लोग सती शिला कहते हैं। पुरातत्व विभाग के अनुसार दंतेवाड़ा के होलीभाठा में स्थापित यह प्रतिमा 12वीं शताब्दी की है। इस प्रतिमा के साथ एक पुरुष की भी प्रतिमा है। लोक मान्यता है कि यह उस राजकुमार की प्रतिमा है, जिसके साथ राजकुमारी का विवाह होने वाला था।

आक्रमणकारी को देते हैं गाली दंतेवाड़ा क्षेत्र के ग्रामीण राजकुमारी की याद में जलाई गई होलिका की राख और दंतेश्वरी मंदिर की मिट्टी से रंगोत्सव मनाते हैं। वहीं एक व्यक्ति को पुूलों से सजा होलीभांठा पहुंचाया जाता है। इसे लाला कहते हैं। दूसरी तरफ राजकुमारी के अपहरण की योजना बनाने वाले आक्रमणकारी को याद कर परंपरानुसार गाली दी जाती है।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

Leave a Reply