मेडीकल में लावारिस लाशेंं…! दफनाने को नहीं मिल रही दो गज जमीन
जबलपुर। शहर के मुक्तिधामों में लावारिस लाशों को दफनाने के लिए दो गज जमीन नहीं मिल पा रही है। है न चौंकाने वाली खबर। पर ये हकीकत है।
कम से कम तिलवाराघाट मुक्तिधाम तो हाउसफुल हो चुका है। खबर यह है कि नेताजी सुभाषचंद बोस मेडीकल कॉलेज चिकित्सालय की मर्चुरी में चार लावारिस लाशेंं अंतिम संस्कार की राह तक रही है। पुलिस परेशान है। सेवाभावी संस्थाएं हैरान। किया तो क्या किया जाए। इस बारे में प्रशासन की हीलाहवाली भी समझ से परे है।
गरीब अहसाय लोगों की मददगार लावारिस लाखों को विधिविधान से अंत्येष्टी करने वाली सेवाभावीसंस्था गरीब नवाज कमेटी के अध्यक्ष सैय्यद इनायल अली ने बताया कि मेडिकल में कई दिनों से चार लावारिस लाशें पड़ीं हैं पुलिस लगातार उनसे इन्हें दफनाने का आग्रह कर रही है। परंतु तिलवाराघाट स्थित मुक्तिधाम में शवों को दफनाने के लिए जगह ही नहीं बची। हम लोगों ने प्रयास भी किया पर कब्र खोदो तो अंदर से कंकाल निकल रहे हैुं। यानी दो गज जमीन नहीं मिल पा रही है। इस बारे में हम अपनी कमेटी के अन्य साथियों और मोक्ष संस्था के प्रमुख आशीष ठाकुर कलेक्टर श्रीमती छवि भारद्वाज के पास भी जाकर उनको सारी बातें बता चुके हैं। उन्होंने संबंधित क्षेत्र के एसडीएम श्री अरजरिया को निर्देशित किया उन्होंने आश्वश्त किया कि एक सप्ताह में कोई समाधान निकाल लिया जाएगा पर कुछ हुआ नहीं । हमारा प्रशासन से यही कहना कि आप हमें शवों को दफनाने के लिए जगह का इंतजाम कर दें। रही बात अंतिम संस्कार के लिए लगने वाली सामग्री की हम लोग इसका इंतजाम कर लेंगे। हम लोगों ने अभी तक सैकड़ों लावारिस लाशों को दफनाया है। पर ऐसी किल्लत कभी नहीं आयी।
जबरन एक ही गड्ढे में दफना दिए शव कुत्तों ने नौंच डाला
मोक्ष संस्था के आशीष ठाकुर ने बताया कि कोतवाली, बल्देबबाग और दो अन्य जगह से कल चार लावारिस लाशें मेडिकल पहुंची अब इन्हें कहां दफनाना है इस बारे में पुलिस परेशान है। इसके पहले तीन शवों को तिलवाराघाट में जबरन गड्डा कर एक साथ दफना दिया था। जबकि यहां कब्र खोदने पर ऐसे शव निकल रहे हैं जो डीकंपोज नहीं हो पाये थे इसी कारण हम लोगों ने हाथ खड़े कर दिए थे। पुलिस ने दबाव बनाकर जबरन तीन , शवों को दफना दिया । हाल ही में जब कुत्तों ने इन शवों को खोदकर निकाला और नोच खाया तब इन्हें कहीं अन्य जगह दफनाया गया। जबकि प्रशासन ने कहा था कि एक दो हफ्ते में कोई न कोई हल निकाल लिया जाएगा इसके बाद भी अब तक कोई बात नहीं बनीं न स्थान मिला। ऐसे में हम लोग क्या कर सकते हैं इसीलिए शवों के दाहसंस्कार को लेकर आगे नहीं आ रहे हैं।

