मुड़वारा विधानसभाः राजनीतिक पंडितों के पंचांग में विविध योग!

कटनी। प्रदेश में भले ही चुनाव अगले साल हों किन्तु इसकी सुगबुगाहट शहर ही क्या जिले की फिजा में घुली घुली सी नज़र आने लगी है। दीपावली के बाद से ही चौक-चौराहों पर कहीं टिकट को लेकर चर्चा है तो कहीं हार-जीत के समीकरणों की कयास। राजनीतक दलों के नुमाइंदे भी खासे सक्रिय नजर आने लगे हैं। इन सब के बीच जिले की सबसे अहम कटनी-मुड़वारा सीट को लेकर भाजपा-कांग्रेस में टिकट का गुणा भाग गलियारों में जबरदस्त है। कटनी शहर में समीकरण क्या होने वाले हैं इसे लेकर राजनीतिक पंडितों के पंचांग में विविध योग बनते बिगड़ते नजर आ रहे हैं वेसे तो कटनी मुड़वारा सीट पर हमेशा से ही मुख्य मुकाबला भाजपा कांग्रेस के बीच ही होता नजर आया है, लेकिन अगले साल होने वाले चुनावों में किसी तीसरे विकल्प की चर्चा इन दिनों खूब प्रचलित हो रही।
क्या बदलेंगे प्रत्याशी या फिर दल
चर्चा यूं तो सुनने में थोड़ा अजीब लगती है, लेकिन इन दिनों शहर में जहां देखो वहीं इस बात की कयास लगाई जा रही हैं कि कटनी मुड़वारा विधानसभा सीट पर भारतीय जनता पार्टी की ओर से काफी चौंकाने वाला फैसला हो जाए तो आश्चर्य नहीं । भाजपा में वर्ष 1998 के बाद से टिकट रिपीट नहीं हुई है और इसके बाद से ही उसे जीत मिलती आ रही है ऐसे में भाजपाई नजरिये से यह सोचा जाना लाजिमी है कि क्या पार्टी इस बार भी ऐसा कोई अप्रत्याशित फैसला ले सकती है। यह तो भविष्य के गर्भ में छिपा है, किन्तु प्रत्याशी कौन होगा इसे लेकर चर्चाओं में अभी से कई नाम सुने जाने लगे हैं। चर्चा सिर्फ इतनी ही नहीं कि प्रत्याशी बदले जाएंगे या नहीं बल्कि यह भी खूब प्रचलित हो रही है कि किसी नेता के ऐन चुनाव के वक्त दल भी बदल जाएं तो आश्वर्य नहीं। हालांकि भाजपा के नेता इस बारे में कुछ भी कहने से बचते हैं, वह सीधे तौर पर ऐसी किसी संभावना से इंकार भी करते हैं। पर दबी जुबां उनके चेहरे के भाव बहुत कुछ बयां कर जाते हैं।
टटोली जा रही नब्ज, कार्यकर्ता अलर्ट पर
जी हां, भाजपा और कांग्रेस दोनों के लिए यह सीट काफी प्रतिष्ठापूर्ण हैं लिहाजा पार्टी के वरिष्ठ जन और जनप्रतिनिधि काफी सक्रिय हो गये हैं। जहां-तहां दौरों का प्रोग्राम बन रहा है तो गोपनीय पार्टियां भी दी जाने लगी हैं। संपर्क का दौर और चेहरे पर मुस्कान के साथ पार्टी के वरिष्ठ और कनिष्ठों को तवज्जो भी दी जाने लगीं हैं। जनता को भले ही इसका अहसास अभी न हो पर कार्यकर्ताओं को तो अहसास होने लगा है। पार्टी के भावी प्रत्याशी अपनी अपनी संभावना तलाशने में जुट गये हैं। इसी तरह कार्यकर्ता भी अलर्टनेस पर हैं।
कांग्रेसः इन्हें खोने के लिए कुछ नहीं
पार्टी सत्तासीन हो तो स्वाभाविक तौर पर दावेदारों की लम्बी कतार लग जाती है। लेकिन कटनी मुड़वारा में वर्ष 1992 के पहले के इतिहास पर गौर फरमाया जाए तो यहां सत्तासीन भाजपा से कहीं ज्यादा कांग्रेस का बोलबाला रहा है ऐसे में यह सीट कांग्रेस के लिए फिर से प्रतिष्ठा का प्रश्र बन गई है। दरअसल तीन बार से सत्ता भाजपा के खाते में जाने के बाद अब कांगेस को एन्टीइंकंबेंसी की उम्मीद है ऐसे में यहां से भी प्रत्याशी की फौज अपनी अपनी संभावना तलाशने में जुट गई है। वैसे कांग्रेस के लिहाज से फिलहाल तो सकरात्मक संभावना बन रही हैं। एक और बात भी गौर करने लायक है कि जहां भाजपा के लिए यह सीटी प्रतिष्ठाा का प्रश्र है तो वहीं कांग्रेस के लिए खोने को कुछ भी नहीं हैं। अब देखने वाला होगा कि जिसके पास खोने के लिए कुछ न हो उसकी तरफ से ऐने वक्त क्या धमाका किया जा सकता है। इन सब के बीच कांग्रेस के ही गलियारों में चर्चा यह भी काफी तेज है कि यहां से ऐन वक्त कुछ ऐसा होगा जिसकी कल्पना शायद भाजपा को भी नहीं होगी। अब यह क्या होगा आने वाला समय ही बताएगा।








