दो बच्चों की हार्ट सर्जरी का खर्चा उठाया

पेशे से गायनोकोलॉजिस्ट डॉक्टर उमेश सावरकर और उनकी पैथोलॉजिस्ट पत्नी की कहानी इतनी दर्दभरी है कि किसी के भी आंखों में आंसू आ जाए। पिछले साल दिसंबर में इस दंपत्ति की 4 महीने की बेटी मीरा कि एक सड़क दुर्घटना में मौत हो गई थी। मासूम बेटी की मौत के बाद भी डॉक्टर दंपत्ति ने बड़ा दिल दिखाते हुए अंगदान का फैसला किया, लेकिन तमाम कोशिशों के बावजूद वो अपने कलेजे के टुकड़े का अंगदान नहीं कर सके। 4 महीने की मासूम बेटी को खोने के दर्द से उबरने के लिए उन्होंने दो गरीब बच्चों की दिल की सर्जरी का खर्चा उठाने का फैसला किया।

इसके बाद जरूरतमंद बच्चों को ढूंढने की शुरुआत हुई। पिछले तीन महीने से ये दंपत्ति उन बच्चों को ढूंढ रही थी, जिनके दिल में छेद था। ये तलाश उन्हें अमरावती के श्री संत अच्युत महाराज हार्ट हॉस्पिटल लेकर आई। यहां उन्हें साढ़े चार साल की पायल और पांच साल का अश्वशील धवाले मिला। इन दोनों बच्चों के दिल में छेद था। पैदाइशी दिक्कत होने के बाद भी इन बच्चों की सर्जरी नहीं हो पा रही थी, क्योंकि इसके लिए जरूरी पैसे इनके परिवार के पास नहीं थे।

पायल के पिता मजदूरी करके परिवार का पेट पालते हैं। ऐसे में उनकी हैसियत इतनी नहीं थी कि वो बच्ची का ऑपरेशन करा पाते। इसलिए पिछले एक साल से उसकी सर्जरी नहीं हो पा रही थी। ठीक उसी तरह धवलशील की भी सेहत भी इस वजह से गिर रही थी। लगातार इंफेशन की वजह से वो थका-थका सा रहता था औऱ पढ़ाई में भी ध्यान नहीं लगा पा रहा था। ऐसे में उसे भी सर्जरी की जरूरत थी।

सर्जरी के बाद भी बच्चों का हाल-चाल लेती है दंपत्ति

ऐसे में डॉक्टर दंपत्ति इनके लिए फरिश्ता बनकर आई। पायल की सर्जरी के दिन डॉक्टर दंपत्ति ने उसे लाने का पूरा इंतजाम किया। सर्जरी के बाद पायल का परिवार काफी खुश है कि उनकी बेटी को वक्त रहते इलाज मिल गया और अब उसकी जान बच जाएगी। सर्जरी के बाद भी डॉक्टर दंपत्ति पायल का हाल-चाल जानते रहते हैं।

चार महीने की बेटी को खोने वाले डॉक्टर उमेश का कहना है कि, “ये काम करके उन्हें बहुत सुकून मिला। हम अपनी जिंदगी पटरी पर लाने की कोशिश कर रहे हैं। ये अलग बात है कि 4 महीने की मासूम बेटी मीरा को खोने के दर्द की भरपाई कोई चीज नहीं कर सकती है, लेकिन जब इन मासूम बच्चों के चेहरे पर मुस्कान देखते हैं तो अपना दर्द कुछ देर के लिए भूल जाते हैं।”

दो बच्चों की हार्ट सर्जरी कराने के अलावा डॉक्टर दंपत्ति उस सड़क दुर्घटना के मामले पर भी नजर बनाए रखते हैं। जिसमें उनकी बेटी की मौत हो गई थी। इस केस में उस ड्राइवर को 45 दिन पहले ही जमानत मिल गई है, जिससे इनकी कार की टक्कर हुई थी।