Pitru Paksha 2026: पितृ पक्ष में भूलकर भी न खरीदें ये 7 चीजें, घर आ सकती है दरिद्रता; जानें कब है सर्वपितृ अमावस्या
धर्म एवं अध्यात्म डेस्क: 27 सितंबर 2026 से भाद्रपद/आश्विन मास के पितृ पक्ष (Pitru Paksha) का प्रारंभ हो चुका है। यह 16 दिनों की अवधि हमारे पूर्वजों और पितरों को समर्पित होती है। इस दौरान पितरों की आत्मा की शांति के लिए तर्पण, श्राद्ध कर्म और पिंडदान किया जाता है। माना जाता है कि पितरों के प्रसन्न होने से घर में सुख-समृद्धि आती है और व्यक्ति को ‘पितृ दोष’ से मुक्ति मिलती है।
शास्त्रों के अनुसार, पितृ पक्ष के दौरान सात्विक जीवन जीना चाहिए और किसी भी तरह के शुभ या मांगलिक कार्य करने तथा नई चीजों की खरीदारी करने से बचना चाहिए।
पितृ पक्ष में कौन सी 7 चीजें नहीं खरीदनी चाहिए?
पितृ पक्ष में नई चीजें घर लाना नकारात्मकता को बढ़ा सकता है। इसलिए निम्नलिखित चीजों को खरीदने की मनाही होती है:
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नए वस्त्र (कपड़े): इस अवधि में अपने लिए या परिवार के लिए नए कपड़े खरीदना अशुभ माना जाता है।
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सोना-चांदी व आभूषण: सोने, चांदी या अन्य गहनों की खरीदारी करने से घर की बरकत और सुख-समृद्धि प्रभावित होती है।
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नया झाड़ू: पितृ पक्ष में घर में नया झाड़ू लाना वर्जित है, मान्यता है कि इससे लक्ष्मी जी रुष्ट होती हैं और आर्थिक तंगी आ सकती है।
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नया वाहन, जमीन या मकान: नया प्लॉट, दुकान, मकान या नया वाहन (कार/बाइक) खरीदना पूरी तरह से वर्जित माना गया है।
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लोहा या लोहे के सामान: लोहे से बनी चीजें या बर्तन इस समय खरीदने से घर में कलह और मानसिक तनाव बढ़ने की संभावना रहती है।
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सरसों का तेल: श्राद्ध पक्ष में नया सरसों का तेल खरीदकर घर लाना शुभ नहीं माना जाता।
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सादा/नया नमक: पितृ पक्ष के दौरान नया नमक खरीदने से बचना चाहिए, ऐसा करने से घर की शांति भंग हो सकती है।
पितृ पक्ष 2026 कब समाप्त होगा? (सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या)
इस वर्ष पितृ पक्ष का समापन 10 अक्टूबर 2026 को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा।
अमावस्या तिथि की समय-सारणी (पंचांग अनुसार)
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अमावस्या तिथि प्रारंभ: 09 अक्टूबर 2026, रात 10:35 बजे से
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अमावस्या तिथि समाप्त: 10 अक्टूबर 2026, रात 09:19 बजे तक
सर्वपितृ अमावस्या का महत्व
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अज्ञात तिथियों का श्राद्ध: जिन परिजनों की मृत्यु (पुण्यतिथि) की सही तारीख ज्ञात न हो, उनका श्राद्ध सर्वपितृ अमावस्या के दिन किया जाता है।
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अमावस्या, पूर्णिमा व चतुर्दशी के लिए: जिनकी मृत्यु अमावस्या, पूर्णिमा या चतुर्दशी तिथि को हुई हो, उनका श्राद्ध भी इसी दिन करने का विधान है।
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समस्त पितरों की तृप्ति: यदि कोई व्यक्ति पूरे 16 दिनों तक प्रतिदिन श्राद्ध करने में असमर्थ हो, तो वह केवल सर्वपितृ मोक्ष अमावस्या के दिन पिंडदान और तर्पण करके सभी पूर्वजों को प्रसन्न कर सकता है।
