धर्म

भीम ने की थी इस मंदिर में पिंडी स्थापना, खून की धारा निकलने से बढ़ गई मान्यता

गोरखपुर से 51 कि.मी. दूर पवह नदी के तट पर शक्तिपीठ माता आद्रवासिनी लेहड़ा देवी का मंदिर स्थित है। मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना और महत्व पौराणिक कथाओं से जुड़ा हुआ है। ये मंदिर उत्तर हिमालय की तराई में महाराजगंज के फरेंदा तहसील से नौ कि.मी की दूरी पर है। ऐसी मान्यता है कि इस मंदिर की स्थापना महाभारत के काल में की गई थी। पांडवों के अज्ञातवास के दौरान उन्होनें अपना अधिक समय इसी स्थान पर व्यतीत किया था। इस मंदिर में मौजूद पिंडी की स्थापना भीम ने की थी और पांडव यहीं पर मां जगदम्बा की अराधना किया करते थे। मंदिर का मुख्य प्रसाद नारियल और चुनरी है। माना जाता है कि यहां सच्चे मन से मन्नत मांगने से अवश्य पूर्ण होती है। भक्त मन्नत पूर्ण होने पर मां जगदम्बा को नारियल और चुनरी चढ़ाते हैं।ऐसी पौराणिक मान्यता है कि किसी समय इस जगह पर पवह नदी बहा करती थी और आज भी वो नाले के रुप में मंदिर के पीछे मौजूद है। इस मंदिर के लिए मान्यता है कि देवी जगदम्बा सुंदर कन्या के रुप में नाव से नदी पार कर रही थीं। कन्या के सुंदर रुप को देख नाविक ने गलत भावना से कन्या को स्पर्श करने का प्रयास किया। उसी समय माता जगदम्बा क्रोध में आ गई और उन्होनें क्रूर रुप धारण कर लिया, जिसे देख नाविक डर गया और उसे अपनी गलती का अहसास हुआ और उसने माता के चरणों में गिकरक माफी मांगने लगा। माता को नाविक पर दया आ गई और उन्होनें उसे माफ करते हुए एक वरदान दिया कि आद्रवन शक्तिपीठ पर दर्शन करने वाले श्रद्धालु तुम्हारे दर्शन करने भी अवश्य आएंगे।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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