भाजपा जवान तो कांग्रेस की लगातार उम्रदराज कमान
मध्य प्रदेश कांग्रेस कमेटी और जिला कांग्रेस कमेटियों में संगठन की कमान बुजुर्गों के हाथों में है जबकि भाजपा ने प्रदेश के बाद अब जिलों में युवा नेतृत्व दिया है। कांग्रेस में प्रदेश अध्यक्ष से लेकर कई जिलों के अध्यक्ष 60 से लेकर 70 साल तक की आयु वर्ग के हैं। उम्रदराज नेतृत्व के साथ ही कांग्रेस में किसी एक व्यक्ति को एकबार जिला संगठन की कमान सौंपने के बाद उसे बदलकर दूसरे क्रम के नेताओं को मौका देने की तरफ ध्यान नहीं दिया जाता।
माना जाता है कि कांग्रेस में गुटीय संतुलन के कारण दूसरे क्रम के नेताओं को आगे लाने की दिशा में संगठन के प्रयास कामयाब नहीं हो पाते हैं। जबकि भाजपा में प्रदेश से लेकर जिलों के संगठन में युवा नेतृत्व दिया गया है। छात्र राजनीति से सक्रिय विष्णुदत्त शर्मा को भाजपा ने मौका दिया और उनकी टीम में जिलों में नौजवानों को जिम्मेदारी दी गई है।
प्रदेश अध्यक्ष 70 पार प्रदेश कांगे्रस अध्यक्ष कमल नाथ 74 साल के होने वाले हैं और उन्हें कांग्रेस ने सरकार बनने के बाद भी मुख्यमंत्री के साथ प्रदेश अध्यक्ष की जिम्मेदारी दी। उनके मुख्यमंत्री रहते संगठन का काम देखने वाले वरिष्ठ उपाध्यक्ष चंद्रप्रभाष शेखर और प्रकाश जैन भी करीब 70 साल के हैं। वे कमल नाथ जैसे बड़े कद के नेता की वजह से उनसे पूछे बिना फैसले लेने से बचते थे।
नतीजा यह हुआ कि सरकार चलाने में व्यस्त कमल नाथ को संगठन के लिए ज्यादा समय नहीं मिला और संगठन उपेक्षित रहा। जिलों में भी बुजुर्गों को कमान कांग्रेस में केवल प्रदेश ही नहीं, जिलों में भी बुजुर्गों के हाथों में कमान है जबकि अभी भाजपा ने सुमित पचौरी, गौरव रणदिवे जैसे युवाओं को जिले सौंपे हैं।
वहीं, कांग्रेस में छिंदवाड़ा के गंगाप्रसाद तिवारी करीब 20 साल से जिला अध्यक्ष हैं जबकि वे बुजुर्ग हो चुके हैं। इसी तरह भोपाल के कैलाश मिश्रा, जबलपुर के दिनेश यादव व राधेश्याम चौबे, छतरपुर के सरमनलाल मिश्रा, सतना के मकसूद अहमद व दिलीप मिश्रा, आलीराजपुर के महेश पटेल, झाबुआ के अभय मेहता, रतलाम के विनोद मामा, मंदसौर के प्रकाश रातड़िया, रायसेन के मुमताज खान, कटनी के मिथलेस जैन व गुमान सिंह की उम्र लगभग 60 या इसके पार हो गई है। दिलीप मिश्रा को तो एक बार हटाकर कुछ दिन बाद फिर जिम्मेदारी दे दी गई। मुमताज खान काफी समय से अध्यक्ष हैं।

