IAS जामोद मामला: निर्वाचन आयोग में शिकायत कर न्यायालय में चुनोती देंगे कांग्रेस नेता

भोपाल। मप्र सरकार ने बी एस जामोद अशोकनगर कलेक्टर को चुनाव आयोग के आदेश पर हटाया था क्योकि उन्हें व अन्य को जांच उपरांत मतदाता सूची में गड़बड़ियों का जिम्मेदार पाया था। यह आरोप लगाते कांग्रेस नेता एवं आरटीआई एक्टविस्ट अजय दुबे ने कहा कि गंभीर दागी को वापस कलेक्टर बनाना सुप्रीम कोर्ट और चुनाव आयोग के आदेशों की अवमानना है।
गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश 30 अक्टूबर 2013 पर भारत सरकार के केंद्रीय कार्मिक मंत्रालय ने 28 जनवरी 2014 को आईएएस के लिए न्यूनतम कार्यकाल 2 वर्ष निर्धारित किया है।
अटेर उपचुनाव अप्रैल 2017 में भी टी इलैया राजा भिंड कलेक्टर के विरुद्ध चुनाव आयोग ने सख्त कदम उठाते हुए उसे हटाया था और जांच की अनुशंसा की थी ।
श्री दुबे ने कहा कि भ्रस्ट शिवराज सरकार न केवल चुनाव उपरांत उसे वापस कलेक्टर बनाया बल्कि आजतक जांच भी नही करी।
संवैधानिक संस्था चुनाव आयोग की अवमानना कर निजी स्वार्थों के लिए शिवराज सरकार लोकतांत्रिक व्यवस्था में निष्पक्षता और आदर्शों की बलि चढ़ा रही है।
उन्होंने कहा कि मप्र में मतदाता सूची के संवेदनशील कार्य में भी भारी गड़बड़ी के तार मुख्यमंत्री सचिवालय से जुड़े है क्योंकि मुख्यमंत्री के सचिव चंद्रशेखर बोरकर ही मप्र स्टेट इलेक्ट्रॉनिक डेवलोपमेन्ट कॉर्पोरेशन के एमडी है और यही कारपोरेशन ही मप्र मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी कार्यालय का वेंडर है जो पोटेंशियल कनफ्लिक्ट ऑफ इंटरेस्ट है ।
श्री दुबे ने कहा कि हम आज ही भारत निर्वाचन आयोग को शिकायत कर अशोकनगर कलेक्टर श्री जामोद , भिंड कलेक्टर इलैयाराजा और मुख्यमंत्री सचिव बोरकर सहित मुख्य निर्वाचन पदाधिकारी सेलिना सिंह और मप्र सरकार के खिलाफ कार्यवाही की मांग करेंगे।कार्यवाही न होने की दशा में न्यायालय की शरण मे जाएंगे। मप्र में 2018 के विधानसभा चुनाव को स्वच्छता और शिवराज सरकार के षड्यंत्र से बचाने के लिए हरसंभव कोशिश करेंगे।








