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बस ऑपरेटर हड़ताल पर, 2500 बसों के पहिए थमे, भीषण गर्मी में यात्रियों की फजीहत

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जबलपुर,यभाप्र। यदि आज आप बस से शहर के बाहर कहीं जाने वाले हैं तो इसे टाल दीजिए क्योंकि किराये में 40 फीसदी बढ़ोतरी की मांग को लेकर बस ऑपरेटर हड़ताल पर चले गए हैं हड़ताल का ऐलान मध्यप्रदेश बस ऑनर एसोसिएशन ने किया है। जिसे आईएसबीटी बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन ने समर्थन देते हुए बसों का परिचालन रोक दिया।

जबलपुर समेत कटनी, मंडला, डिंडौरी, सिवनी, नरसिंहपुर जिले की करीब 2500 बसों के पहिए थम गए हैं। जिससे यात्रियों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई तो इस आस में बैठे हैं कि शायद कोई वाहन मिल जाए पर ऐसा हो नहीं रहा है। विकल्प के तौर पर प्राइवेट टैक्सी या निजी वाहन ही सहारा है पर हर कोई उसका किराया वहन नहीं कर सकता। दीनदयाल चौक पर बस न मिलने से लोग परेशान हैं। बस ऑपरेटर्स की अनिश्चितकालीन हड़ताल रविवार की रात 12 बजे के बाद शुरू हो गई। जिस कारण बसों के पहिए थम गए। यात्री रात में बस स्टैंड पहुंचे, तो उन्हें बसों का संचालन बंद होने की जानकारी हुई।

एसोसिएशन सचिव वीरेन्द्र साहू ने डीजल, ऑइल, टायर, मोटर पार्ट्स के दाम व टैक्स बढ़ गया है। कई महीनों से सरकार से किराये में बढ़ोतरी की मांग कर रहे हैं। सरकार ने दस फीसदी किराया बढाया है जो नाकाफी है। इसे लेकर हड़ताल करने का निर्णय लिया।

10 प्रतिशत का ऑफर, नामंजूर
आईएसबीटी बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के कोषाध्यक्ष नसीम बेग परिवहन विभाग ने बस का किराया 10 फीसदी बढ़ाने का प्रस्ताव दिया है। जिसे एसोसिएशन ने नामंजूर कर दिया।बस ऑपरेटर्स ने हड़ताल की घोषणा तकरीबन 15 दिन पहले ही कर दी थी। प्रशासन को भी इसकी जानकारी दी जा चुकी थी। हैरानी की बात यह है कि परिवहन विभाग के अफसरों को 12 घंटे पहले ही हड़ताल की जानकारी हुई। जिसके बाद वे हड़ताल की वजह और तरीका पूछने ऑपरेटर्स के पास पहुंचे, वो भी तब जब भोपाल से फोन आया। बस ऑपरेटर्स ने अफसरों से बातचीत के बाद साफ कर दिया कि हड़ताल जारी रहेगी।

वह भी बेमियादी। आईएसबीटी बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के अध्यक्ष कमलकिशोर तिवारी ,सचिव वीरेन्द्र साहू ने कहा कि हड़ताल प्रदेशव्यापी है। बस ऑपरेटर्स एसोसिएशन के उपाध्यक्ष शंकरदयाल शर्मा, बच्चू रोहाणी, अजय पाठक, प्रमोद चौधरी, मुकेश जैन, रवि उपाध्याय, राबिन तिवारी, आशीष जैन, दीपेन्द्र डोंगरे, शाहिद खान, राजू जायसवाल, देवेन्द्रपुरी गोस्वामी, कृष्ण कुमार खम्परिया, नरेश रजक, दिलीप मंगलानी, अमित रजक, देवेन्द्र खम्परिया, संतू पटेल, विनीत गौतम, बलवंत सिंह दीपक सिंह, सोमिल तिवारी, दीपक पांडे, सुभाष चौरसिया, पप्पू जैन, ओमप्रकाश जायसवाल सहित वरिष्ठ बस ऑपरेटर जे पी जायसवाल, महेन्द्र चौधरी, प्रकाश पांडे ने भी सहयोग की अपील करते हुए जनता को होने वाली परेशानी के लिए क्षमा मांगी है।

बस ऑपरेटर्स की ये हैं प्रमुख मांगें

न बसें मिल रहीं न पीने को पानी
बस स्टैंड समेत रूट के सभी स्टाप पर यात्री बसों का इंतजार करते रहे। आईएसबीटी पर बस ऑपरेटर्स ने यात्रियों के लिए सूचना का बैनर लगा रखा है। लेकिन स्टैंड के अंदर नहीं आने वाले यात्री जानकारी के अभाव में बसों का इंतजार करते नजर आए। कुछ तो लौट गए पर कुछ इस उम्मीद पर बैठे हैं कि शायद कुछ मिल जाए। अधिकांश मजदूर हैं। किसी के घर में किसी का स्वास्थ्य खराब है तो कोई इलाज कराने आया था और अब आने घर लौट रहा था पर बस नहीं मिलने से सब परेशान हैं। पीने का पानी न मिलने के कारण भी उन्हें मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है।
पर करें तो करें क्या -दीनदयाल चौक पर इसे के इंजतार में काफी संख्या में यात्री बसों के इंतजार में बैठे हैं इनमें से अधिकांश मजदूर पेशा वर्ग के हैं जिन्हें यह मालूम नहीं था कि बसों की हड़ताल है। अब वे दुविधा में हैं। करें तो करें क्या। इन में से किसी को कुण्डम जाना है तो किसी को मंडला, सागर,रीवा ,सिवनी या शहपुरा। इन्ही में से एक महिला ललिता बाई यहां दिहाड़ी मजूदर है और वह शहपुरा कर रहने वाली है उसके घर में किसी आने का स्वास्थ्य खराब है पर वे वेबस है क्योंकि बसें चल नहीं रहीं और टैक्सी का किराया चुकाने कर उसकी हैसियत नहीं है। इस मालिकों से मिन्नत भी कर के देख ली पर कोई नहीं सुन रहा। उसका कहना है कि घर जाना जरूरी है पर कैसे जाएं। कड़ी धूप मैं पैदल जा नहीं सकते। अब सब कुछ भगवान भरोसे है।

मालूम होता तो वे कल ही लौट जातीं

डिंडौरी से अपनी बेटी का इलाज कराने जबलपुर आई सुनीता बाईव गीता बाई भी परेशान हैं। वह इलाज कराकर डिंडौरी लौटना चाहती हैं पर बस नहीं चलने से परेशान हैं और चिंतित भी क्योंकि उनके पास इतना पैसा नहीं है कि वे दो तीन दिन शहर में खर्च चला सकें। खाने के लिए कुछ भी नहीं है। कुछ पैसे हैं पर वे टिकट के लिए बचाकर रखे हैं। उनका कहना है कि मालूम होता तो वे कल ही लौट जातीं। उसे कई और यात्री हैं जिनके गांव सड़क मार्ग पर पड़ते हैं। वे भी अब परेशान हैं। उन्हीं उम्मीद है बसें शाम तक चलने लगेंगी।

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