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बढ़ रहा यातायात का दबाव

बल की कमी झेल रहा यातायात विभाग
जबलपुर,यभाप्र। नगर में बढ़ रहे यातायात के दबाव में यातायात विभाग दबा जा रहा है। शहर के सभी तिराहों चौराहों ,बाजारों में व्यवस्थित यातायात के लिए जितने बल की आवश्यकता है। उसके हिसाब से अधिकारी कर्मचारी तक नहीं हैं यातायात के वरिष्ठ अफसरों ने शहर में बढ़ते यातायात के मद़दे नजर पर्याप्त बल की मांग की थी। लेकिन अभी तक इसकी कमी पूरी नहीं हो पाई है। उल्लेखनीय है कि शहर में तीन यातायात थाने हैं। इनमें 25 मुंशी हैं, जो लिखा-पढ़ी में व्यस्त रहते हैं। वहीं, 20 से 25 कर्मचारी अक्सर छुट्टी पर रहते हैं। 25 कर्मी हमेशा दूसरे जिलों में होने वाली वीआईपी ड्यूटी में रहते हैं। इसके बाद बचे 100 यातायात अधिकारी-कर्मचारी को 125 चौराहे-तिराहों में तैनात किया जाता है। इसमें नो-एंट्री, चालान, स्कूली बच्चों की बसों की व्यवस्था, ऑटो चालकों पर कार्रवाई, सिग्नल तोडऩे वाले, कंट्रोल रूम में बैठने के लिए चालान बनाना, शहर में जुलूस और अन्य कार्यक्रमों में व्यवस्था बनाने के लिए लगाया जाता है। ऐसे में नगर की यातायात व्यवस्था बेपटरी हो चुकी है। जिसे देख वही नियमों का उल्लंघन करने में जुटा है। पुलिस के मुताबिक 1 मिनट में 50 से अधिक वाहन चालक नियम तोड़ते हैं। चालकों ने रॉन्ग से राइट साइड पर पहुंचने का नया तरीका खोज निकाला है। सामने जाने वाले मार्ग में यदि रेड सिग्नल है, तो वह दूसरी ओर से लेफ्ट टर्न से होते हुए उस मार्ग से चले जाते हैं। ऐसे वह रॉन्ग साइड से राइट साइड में आ जाते हैं और यातायात पुलिस भी उनपर गलती करने की कोई कार्रवाई नहीं करती। पुलिस भीड ़के कारण उनका यह तरीका नहीं देख पाती।पुलिस अधिकारियों का कहना हे कि वाहन चालक को रेड और ग्रीन सिग्नल के बारे में पूरी जानकारी है। लेकिन वे खुद ही नियम का पालन नहीं करना चाहते। पुलिस जब चौराहे पर दिखती है, तो सभी पालन करते है और पुलिस के हटते ही फिर से नियम तोडऩा शुरू कर देते है ।
कैमरे ही एक सहारा
बल की कमी झेल रहे याताविभाग को कैमरों से ही सहारा है। शहरभर में लगभग 50 चौराहे, तिराहों में कैमरे लगे हैं। इन कैमरों से यातायात कंट्रोल रूम में वाहनों के नंबर ट्रेस होते हैं। कैमरों की मदद से लगभग 500 चालान हर माह किए जाते हैं। लेकिन इनमें से 150 का ही चालान जमा होता है।वाहन का नंबर ट्रेस होने के बाद उसके नंबर के आधार पर उसके घर का पता लिया जाता है। इसके बाद उसे नोटिस भेजने के लिए कर्मियों को ड्यूटी लगानी पड़ती है। एक बार में कोई चालान नहीं लेता। ऐसे एक प्रतिशत वाहन चालक ही होते हैं, जो अपनी गलती मानकर नोटिस ले लेते हैं। जो वाहन चालक नोटिस नहीं लेते उनके घर यातायात कर्मी दोबारा रिमांडर नोटिस लेकर जाते हैं। लेकिन फिर भी वह नोटिस का कोई जवाब नहीं देते।
वर्जन
बल की कमी भी एक कारण है, जिसमें यातायात व्यवस्था में सुधार नहीं हो पा रहा है। हमने ऊपर फिर प्रस्ताव भेजा ह। देखो कब तक अतिरिक्त बल मिलता है। यातायात व्यवस्था को सुधारने के लिए प्लान तैयार किया जा रहा है।
– अमृत मीणा, एएसपी यातायात

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