बच्ची की नाभी में कॉड क्लिप,उधार के दूध पर मौत से संघर्ष कर रही मासूम


प्लेटलेट्स कम होने पर शुक्रवार को एसएनसीयू का एक कर्मचारी ब्लड हासिल करने के लिए करीब 6 घंटे तक जेएएच में बैठा रहा। बच्ची को ब्लड तो चढ़ा दिया गया, लेकिन कीडनी डेमेज होने से खतरा बढ़ गया है। उधर केआरएच के पीडियाट्रिक विभाग ने भी बच्ची को लेने से इंकार कर दिया है।
चार शहर का नाका इलाके में झलकारी बाई कॉलेज के पास झाड़ियों में रविवार को लावारिस बच्ची मिली थी। बच्ची की सांस चल रही थी, उसे गंभीर हालत में जिला अस्पताल के एसएनसीयू में भर्ती कराया गया था। डॉक्टरों के सामने बड़ी समस्या बच्ची के लिए दूध का इंतजाम करना थी। कुछ दिन तो डिब्बे का दूध बच्ची को दिया गया लेकिन मासूम के लिए मां का दूध बहुत जरूरी था। ऐसे में एसएनसीयू में भर्ती बच्चों की मां अपना दूध कटोरी में निकालकर दे जाती हैं, जिसे डॉक्टर मिलाकर बच्चों को पिलाते हैं।
बच्चों को पिलाने के बाद जो दूध बचता है वह लावारिस बच्ची के हिस्से में आ जाता है। इसी उधार के दूध के सहारे बच्ची जिंदगी और मौत से जूझ रही है। शुक्रवार को बच्ची के प्लेटलेट्स कम हुए तो डॉक्टरों की चिंता बढ़ गई। आनन-फानन में एक कर्मचारी को ब्लड बैंक में ब्लड के लिए भेजा गया, 6 घंटे जेएएच में इंतजार के बाद जब ब्लड लेकर कर्मचारी वापस आया तो डॉक्टरों को उम्मीद की किरण दिखाई दी।
किडनी में दिक्कत
बच्ची की बिगड़ती हालत को देखते हुए कुछ रक्त की जांचें निजी लैब में कराई गई हैं। जिसमें पता चला कि किडनी क्रिएटिनिन लेवल 4 तक पहुंच गया है, इसके अलावा प्लेटलेट्स भी कम हो रहे हैं। जांच रिपोर्ट में कुछ अन्य इंफेक्शन की भी जानकारी मिली है। डॉक्टर बच्ची को बचाने का हर संभव प्रयास करने में जुटे हैं।
केआरएच का इंकार
जिला अस्पताल के एसएनसीयू के डॉक्टरों ने बच्ची को केआरएच के पीडियाट्रिक विभाग में रैफर करने का मन बना लिया था। इस संबंध में जब पीडियाट्रिक विभाग के डॉक्टरों से चर्चा हुई तो उनका कहना था कि जब बच्ची को वेंटिलेटर की जरूरत नहीं है तो रैफर करने का कोई मतलब नहीं है। क्योंकि जो ट्रिटमेंट वहां होगा वही यहां भी दिया जाएगा। एसएनसीयूू प्रभारी डॉ. रविशंकर के मुताबिक केआरएच के पीडियाट्रिक विभाग के इंकार करने के बाद बच्ची का एसएनसीयू में ही उपचार किया जा रहा है। हालांकि स्थिति काफी गंभीर है।
कॉड क्लिप के सहारे अस्पताल की तलाश
बच्ची की नाभी में कॉड क्लिप लगी हुई है, इसका मतलब साफ है कि बच्ची का जन्म किसी अस्पताल में ही हुआ है। पुलिस अब इसी क्लिप के सहारे अस्पताल का पता लगाने का प्रयास कर रही है। दो निजी अस्पतालों में बच्चियों के जन्म की जानकारी मिली थी, जब पता किया तो बच्चियां घर पर मिलीं। ऐसे में अब आसपास के अन्य अस्पतालों को टटोला जा रहा है।








