फिर हुआ प्रशासनिक फ़ेरबदल: 6 CEO सहित इन राज्य प्रशासनिक अधिकारियों के हुए ट्रांसफर, देखे लिस्ट

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भोपाल। राज्य प्रशासनिक सेवा के अधिकारियों के सहित कई सीईओ के तबादले कर दिये गए है।img 20190624 wa00125820209129336276570

img 20190624 wa0014876060507867775263img 20190624 wa00216709470427674638318img 20190624 wa00205514448037512524652img 20190624 wa00197412822771807525761राimg 20190624 wa00175688423836057395699img 20190624 wa00184644596635291967748img 20190624 wa00166846110486351475759ज्य प्रशासनिक सेवा और राज्य पुलिस सेवा के साथ आईएफएस और निचले स्तर के ट्रांसफर को भी जोड़ा जाए तो यह आंकड़ा 15 हजार से अधिक हो गया है। इसे लेकर ब्यूरोक्रेसी में हड़कंप की स्थिति है। चौंकाने वाली बात यह है कि सरकार के प्रशासन का जिम्मा संभालने वाले आईएएस अधिकारियों का तो हर दूसरे दिन एक तबादला आदेश निकला। 17 दिसंबर को मुख्यमंत्री कमलनाथ के शपथ लेने के अगले ही दिन से तबादलों की शुरुआत हो गई।

18 दिसंबर को जारी पहले आदेश में ही रीवा कमिश्नर को हटा दिया गया और 19 दिसंबर के आदेश में मुख्यमंत्री के प्रमुख सचिव रहे विवेक अग्रवाल और हरिरंजन राव की सीएम सचिवालय से विदाई हो गई। इस दिन से लेकर 1 जून 2019 तक आईएएस अधिकारियों को 84 ट्रांसफर आदेश निकले हैं, जिनमें 230 आईएएस अधिकारी इधर से उधर कर दिए गए। इसमें से कई का तो तीन-तीन, चार-चार बार ट्रांसफर किया गया है। सभी दस संभाग के कमिश्नर व 52 जिलों के कलेक्टर बदले जा चुके हैं। साथ 48 एसपी भी तबादले के दायरे में आ गए हैं। सिर्फ रतलाम, ग्वालियर, भिंड, निवाड़ी, अलीराजपुर और उज्जैन एसपी ही यथावत हैं।

एक ही अफसर का कई बार तबादला

1 महेशचंद्र चौधरी : 18 दिसंबर को रीवा कमिश्नर पद से हटाकर मंत्रालय में ओएसडी बनाया गया। फिर उन्हें ग्वालियर कमिश्नर बनाया गया, लेकिन 27 मई को फिर हटा दिया गया। बीएम शर्मा को 23 मार्च को ग्वालियर कमिश्नर पद से हटाकर सदस्य राजस्व मंडल बनाया गया। 27 मई को फिर शर्मा ग्वालियर कमिश्नर बना दिए गए। चौधरी को सदस्य राजस्व मंडल भेज दिया गया।

2 जेके जैन : प्रदेश सरकार बनने के बाद जेके जैन शहडोल कमिश्नर रहे। उन्हें हटाकर 4 मार्च को शोभित जैन को कमिश्नर बनाया गया और 27 मई को उन्हें हटा दिया गया। अब आरबी प्रजापति शहडोल कमिश्नर हैं।

3 भरत यादव : मुरैना कलेक्टर से ट्रांसफर करके ग्वालियर कलेक्टर बनाया गया। फिर ग्वालियर से हटाकर एमडी ऊर्जा विकास निगम बनाया गया। 13 मई को फिर आदेश निकला और छिंदवाड़ा कलेक्टर पदस्थ किए गए और 27 मई के आदेश में जबलपुर कलेक्टर बना दिए गए।

4 अशोक कुमार वर्मा : ग्वालियर कलेक्टर पद से हटाकर मंत्रालय में अपर सचिव बनाया गया। फिर 11 जनवरी के आदेश में सीएम सचिवालय गए। फिर 23 मई के आदेश में वेयरहाउसिंग काॅर्पोरेशन के एमडी बना दिए गए।

5 अक्षय सिंह : निवाड़ी कलेक्टर पद से 11 अप्रैल को हटाए गए। सीईओ इंटर स्टेट ट्रांसपोर्ट अथॉरिटी बने। अब फिर निवाड़ी कलेक्टर बना दिए गए। बताते हैं कि वे निवाड़ी कलेक्टर नहीं बनना चाहते। शेष | पेज 12 पर

6. शशि भूषण सिंह : खरगौन कलेक्टर से हटाकर उन्हें मंत्रालय में उपसचिव पदस्थ किया गया। फिर जनवरी में उन्हें एनवीडीए इंदौर में संचालक बनाया गया। फिर दुग्ध संघ के सीईओ बने और अब 1 जून के आदेश में फिर कलेक्टर कटनी बना दिए गए।

7. गणेश शंकर मिश्रा : अलीराजपुर कलेक्टर पद से सीहोर भेजे गए। अब उन्हें फिर हटाकर मंत्रालय में उपसचिव बनाया गया।

8. नीरज कुमार सिंह : अपर आयुक्त भू-अभिलेख रहे, फिर दमोह कलेक्टर बना गए। अब फिर दमोह से हटाकर उन्हें मंत्रालय में उपसचिव बनाया गया है।
9. शेखर वर्मा : कांग्रेस सरकार ने उन्हें गृह विभाग के उप सचिव पद से हटाकर संचालक गैस राहत बनाया। फिर शहडोल कलेक्टर बने और तीन बाद ही उन्हें हटाकर वापस संचालक गैस राहत पदस्थ कर दिया गया। इससे पहले कांग्रेस सरकार ने अनुभा श्रीवास्तव शहडोल कलेक्टर पद से हटाया था। फिर ललित दाहिमा कलेक्टर बने। फिर शेखर वर्मा और अब ताजा आदेश में फिर दाहिमा को जिम्मा मिला है।
10. अभय कुमार वर्मा : 20 दिसंबर के आदेश में नरसिंहपुर कलेक्टर पद से हटाए गए। मंत्रालय में उप सचिव बने। फिर महिला बाल विकास विभाग में उप सचिव बनाए गए। अब नए आदेश में आगर-मालवा के कलेक्टर बने हैं।
11. सुरभि गुप्ता : प्रदेश सरकार आते ही उन्हें कौशल विकास के अपर संचालक पद से हटाकर डिंडोरी कलेक्टर बनाया गया। ताजा आदेश में डिंडौरी से हटाकर अलीराजपुर कर दिया गया।
12. शमीमुद्दीन : संचालक पंचायती राज से कलेक्टर अलीराजपुर बनाए गए। अब हटा दिए गए। उन्हें मंत्रालय में उपसचिव बनाया गया है।
13. सत्येंद्र सिंह : बुरहानपुर कलेक्टर पद से सतना कलेक्टर बनाए गए। ताजा आदेश में सतना से हटा दिया गया। अब वे उप सचिव शासन हैं।
14. पंकज जैन : दो मार्च को जारी आदेश में विदिशा जिला पंचायत के सीईओ से उन्हें कटनी का कलेक्टर बनाया गया। तीन माह में ही हटाकर उन्हें ताजा आदेश में लूप लाइन में डाल दिया गया।

पूर्व सीएस बोले- नाम का रह गया तबादला बोर्ड :पूर्व मुख्य सचिव केएस शर्मा ने कहा कि तबादला बोर्ड तो रबर स्टैंप की तरह नाम का रह गया है। जिम्मेदार अपनी ड्यूटी पूरी नहीं कर रहे, गुण-दोषों के आधार पर कोई अनुशंसा नहीं होती। जिस तरह से बिना किसी विशेष कारण के तबादले हो रहे हैं, उससे प्रशासकीय व्यवस्था पर सवाल खड़े हो रहे हैं। एक नियत समय तक तो अधिकारी को पदस्थ रखा जाता है। एेसे तबादलों से कोई प्रशासनिक सुधार नहीं होता, बल्कि धन का अपव्यय होता है। ऐसे तबादले दिशाहीन और उद्देश्यहीन कहे जाएं तो ठीक रहेगा

  • एसएएस, एसपीएस समेत निचले स्तर के तबादले भी उठा लिए जाएं तो ट्रांसफर का आंकड़ा 15 हजार से भी अधिक
  • छह एसपी छोड़कर 48 को हटा चुकी है सरकार
  • आईएएस अफसरों के ही 84 तबादला आदेश निकल चुके हैं