प्राइवेट स्कूलों की मनमानी पर लगाम कैसे लगाएगी सरकार
जबलपुर यभाप्र। मध्यप्रदेश में कांग्रेस सरकार के आते ही माननीय मुख्यमंत्री श्री कमलनाथ जी ने कहा था की सबसे बड़ी चुनौती उनके सामने किसानों का कर्जा माफ और दूसरी बेरोजगारी है। शपथ लेते ही मुख्यमंत्री जी ने किसानो का कर्जा माफ तो कर दिया परंतु बेरोजगारों के लिए अभी तक किसी भी प्रकार की कोई प्रक्रिया नहीं हुई।
यश भारत की टीम ने महाकौशल के कुछ प्राइवेट स्कूलों में गुप्त रूप से सर्वेक्षण किया तो यह पता चला कि यहां पर काम कर रहे शिक्षक क्वालिफाइड तो है परंतु इनके साथ उनकी तंनख्वाह को लेकर उनका शोषण हो रहा है।
ज्यादा तन्ख्वाह एकाउंट में डालकर लेते वापस
पड़ताल से यह पता चला है की हमारे संस्कारधानी जबलपुर में अधिकतर प्राइवेट स्कूल ऐसे हैं जहां पर शिक्षकों को नौकरी देने से पहले 24000 रुपए से जॉइनिंग दी जाई जाती है और हर महीने उनके खाते में 24000 भी डाले जाते हैं परंतु जिस तारीख को यह सैलरी शिक्षकों के अकाउंट में जाती है उसके अगले ही दिन स्कूल प्रशासन शिक्षकों पर दबाव डालकर किसी से 10 किसी से 12 किसी से 8 हजार रुपए नगद वापस ले लेते हैं ऐसे में कागजी कार्यवाही में तो स्कूल ने शिक्षकों को सरकार द्वारा निश्चित की गई सैलेरी खाते में डालते हुए अंकित कर देते हैं और नगद लेनदेन का कोई हिसाब-किताब ही नहीं रहता। शिक्षक भी नौकरी के छूट जाने के डर से कहीं कंप्लेंट नहीं कर पाते।
इस अत्याचार में जबलपुर के कई प्रसिद्ध स्कूल शामिल है जिनमें प्रमुख हैं स्मॉल वंडर्स, ज्ञानगंगा स्कूल, लिटिल वर्ल्ड, लिटिल किंग्डम, नालंदा पब्लिक स्कूल, बिल्ला बोंग स्कूल, देहली पब्लिक स्कूल, विस्डम वैली स्कूल इत्यादि।
विस्डम वैली स्कूल का खेल
विस्डम वैली स्कूल ने तो आंखों में धूल झोंकने का एक नया तरीका निकाल लिया है इस स्कूल में एडमिशन के समय बच्चों के माता-पिता से यह कहा जाता है कि हमारे स्कूल में शिक्षकों की कमी नहीं है परंतु इस स्कूल की शहर में तीन ब्रांच हैं इसकी सबसे बड़ी ब्रांच शास्त्री नगर जबलपुर में खुली है। जहां पर शिक्षकों की सबसे ज्यादा कमी दिखाई देती है। इस स्कूल में हर महीने एक नया टीचर दिखाई देता है दरअसल यहां पर टीचरों की भर्ती हमेशा खुली रहती है और जो भी शिक्षक अपना बायोडाटा लेकर स्कूल पहुंचता है, उसको डेमो क्लास लेकर अगले ही दिन रख लिया जाता है और कहा जाता है कि आपको 1 महीने इस स्कूल में पढ़ाना पड़ेगा और हम लोग आपका टीचिंग लेवल देखेंगे और 1 महीने के बाद आपको नौकरी पर रख लेंगे और इस 1 महीने की सैलरी भी आपको दी जाएगी। परंतु कोई शिक्षक कितना भी क्वालिफाइड हो कितना भी अनुभव वाला हो इस स्कूल में टिक नहीं पाता क्योंकि यह 1 महीने के बाद उन टीचर्स को निकाल देते हैं और उनको उसे 1 महीने की 8000 सैलरी के रूप में दे देते हैं ऐसे करके यह पूरा साल निकाल देते हैं और ऐसे में यहां के बच्चों का क्या भविष्य होगा इस पर सरकार को गौर करना चाहिए।
किराए के शिक्षक
पड़ताल से यह भी पता चला है कि हमारे महाकौशल जबलपुर में कई प्राइवेट स्कूल ऐसे भी हैं जिनमें कॉम्पिटेटिव परीक्षाओं का सेंटर होता है, ऐसे स्कूलों में जिस दिन परीक्षा होती है उस समय बाहर से किराए के शिक्षक बुलवाकर उनसे परीक्षा में ड्यूटी करवाई जाती है और परीक्षा संस्था जितना पैसा शिक्षकों को ड्यूटी के लिए सैंक्शन करती है उसका आधा पैसा स्कूल प्रशासन खुद रख लेता है और आधा पैसा ही ड्यूटी करने वाले शिक्षकों को देता है। इस घोटाले में भी वही प्रक्रिया अपनाई जाती है जैसी सैलेरी के लिए यह प्राइवेट स्कूल वाले अपनाते हैं यानी परीक्षा ड्यूटी का पैसा शिक्षकों के खाते में आता है परंतु 50-60त्न पैसा स्कूल प्रशासन नगद वापस ले लेते हैं।
यश भारत की इस पड़ताल के जरिए यश भारत इन प्राइवेट स्कूलों में काम कर रहे शिक्षकों के ऊपर हो रहे अत्याचार को सरकार के पास पहुंचाने की कोशिश कर रहा है इस बेरोजगारी के माहौल में यदि कोई रोजगार है और उसका पैसा इस तरीके से छीना जा रहा हो यह किसी शोषण से कम नहीं अथवा मध्य प्रदेश सरकार को इस प्रकार के हो रहे भ्रष्टाचार अत्याचार और शोषण के रोकथाम के लिए उचित कदम उठाने चाहिए।

