
नई दिल्ली। संसद के मॉनसून सत्र में अविस्वास प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान राहुल गांधी ने अचानक पीएम मोदी के पास जाकर उन्हें कमगर, अब कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी खुद इस पोस्टर को लेकर परेशान हो गए हैं और उन्होंने साथी कां जबरन गले गला लिया था।सोशल मीडिया में भी इन विषयों पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। वहीं, दिल्ली भाजपा विधायक और डीएसजीएमसी महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने इसके जवाब में दिल्ली में जगह-जगह पोस्टर लगवाए हैं, मुंबई कांग्रेस ने राहुल गांधी का पीएम मोदी से गले लगने की तस्वीर का एग्रेसी नेताओं को कुछ नसीहत दी है। दरअसल, मुंबई कांग्रेस ने राहुल गांधी का पीएम मोदी से गले मिलने वाला पोस्टर दीवार पर लगाया है।
पोस्टर का जवाब पोस्टर से
सोशल मीडिया में भी इन विषयों पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। वहीं, दिल्ली भाजपा विधायक और डीएसजीएमसी महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने इसके जवाब में दिल्ली में जगह-जगह पोस्टर लगवाए हैं। पोस्टरों पर राहुल गांधी और उनके परिवार से 1984 के वक्त में फैलाई गई नफरत को मिटाने की बातें लिखी गई है।
अलग तरह से इस्तेमाल करते हुए पोस्टर पर राहुल को बयान को लिखा था- ”नफरत से नहीं, प्यार से जीतेंगे।”
इस पोस्टर में बड़े-बड़े शब्दों में लिखा है- ”नफरत से नहीं, प्यार से जीतेंगे।” मगर, इसमें नफरत को केसरिया रंग से और प्यार को हरे रंग से लिखा गया है। यह विवाद का विषय बन गया है। पोस्टर अब सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है। कुछ लोगों का कहना है कि कांग्रेस रंगों के जरिये सांप्रदायिकता को बढ़ा रही है। इस बात से राहुल गांधी भी परेशान हो गए हैं।
लिहाजा, राहुल गांधी को अपने पार्टी के सहयोगियों को कुछ सुझाव देने के लिए एक बैठक बुलाई। सूत्रों ने बताया कि इसका मुख्य उद्देश्य धर्म पर विवाद और ध्रुवीकरण पर किसी भी तरह की विवादास्पद स्थिति से बचना है।
कांग्रेस अध्यक्ष की ओर से बुलाई गई बैठक में पार्टी की रणनीति तैयार करने की योजना बनाई गई। बैठक में रणजीप सुरजेवाला, पी चिदंबरम, शशि थरूर, मनीष तिवारी और कुछ अन्य नेता मौजूद थे।
सूत्रों ने कहा कि उन्हें सभी को कहा गया है कि भाजपा द्वारा माहौल के धुव्रीकरण की कोशिश से प्रभावित नहीं होने के लिए कहा गया था। उन्होंने कहा कि राहुल को मुंबई में पोस्टर से अस्वीकार कर दिया गया था और नेताओं से कहा कि वे ऐसे कार्यों से बचें क्योंकि इससे बीजेपी मजबूत होती है और कांग्रेस को नुकसान पहुंचाया जा सकता है।
उलटा पड़ रहा है कांग्रेस का हर दांव
कुल मिलाकर कांग्रेस जो भी दांव चलती है, वह उसके ही गले की फांस बन जाती है। जैसा कि अब पोस्टर वाले मामले में हो रहा है। इससे पहले मानसूत्र सत्र के दौरान राहुल गांधी ने धमाकेदार भाषण देते हुए अपना अलग अंदाज पेश किया था।
मगर, भाषण खत्म होते ही, जिस जल्दबाजी में वह पीएम मोदी तक पहुंचे और फिर उन्हें गले लगाने के लिए उठने का इशारा किया। और पीएम के नहीं उठने पर खुद ही झुक कर जबरन मोदी के गले लगे, उसकी तीखी आलोचना हुई। यहां तक कि स्पीकर सुमित्रा महाजन ने भी राहुल को नसीहत देते हुए कह दिया था कि संसद की अपनी मर्यादा होती है।
इतना ही नहीं, पीएम मोदी ने जब अपने भाषण की शुरुआत की तो राहुल गांधी की हरकत पर तीखा तंज कसा था कि उन्हें पीएम की कुर्सी पर बैठने की इतनी जल्दी है कि मुझे अभी से कह रहे हैं खड़े हो। इस कुर्सी से न कोई उठा सकता है और न कोई बैठा सकता है। मतदाता ही इस कुर्सी पर बैठाते हैं।
सोशल मीडिया में भी राहुल की इस हरकत को बचकाना कहा गया। इसके बाद उन्होंने अपने साथी सांसद को आंख मारकर कुछ बात इशारे में कही। मगर, यह बात भी राहुल गांधी के खिलाफ ही गई। राहुल के भाषण से ज्यादा उस दिन ये दोनों मुद्दे ही संसद के अंदर और बाहर चर्चा में बने रहे।
पोस्टर का जवाब पोस्टर से
सोशल मीडिया में भी इन विषयों पर जबरदस्त प्रतिक्रिया मिल रही है। वहीं, दिल्ली भाजपा विधायक और डीएसजीएमसी महासचिव मनजिंदर सिंह सिरसा ने इसके जवाब में दिल्ली में जगह-जगह पोस्टर लगवाए हैं। पोस्टरों पर राहुल गांधी और उनके परिवार से 1984 के वक्त में फैलाई गई नफरत को मिटाने की बातें लिखी गई है।
इसमें लिखा गया है कि पब्लिसिटी के लिए गले मत मिलो राहुल गांधी। कांग्रेस के दिए जख्मों को मिटाने के लिए गले मिलो। जगदीश कौर से… जिसके पूरे परिवार को 1984 के जनसंहार में जला दिया गया था। है दम अपने परिवार की फैलाई नफरत को मिटाने का? इस पोस्टर के नीचे मनजिंदर सिंह सिरसा का नाम भी लिखा है।








