पीपुल्स अस्पताल में रात तीन बजे से ऑक्सीजन का दबाव हुआ कम, पांच मरीजों की मौत, बाकी पर संशय
भोपाल। एक तरफ जिला प्रशासन दावा कर रहा है कि भोपाल में ऑक्सीजन की किसी तरह की कोई कमी नहीं है दूसरी तरफ शहर में ऑक्सीजन कम पडने के कारण मौत हो रही है।
शहडोल और जबलपुर के बाद राजधानी के पीपुल्स मेडिकल कॉलेज में पांच लोगों की मौत ऑक्सीजन की कमी के कारण होने का मामला सामने आया है। शेष एक दर्जन मौत पर संशय बना हुआ है। यहां कोविड केयर सेंटर बनाए जाने के बाद से ही लापरवाही का आलम बना हुआ है।
यहां 60 अति गंभीर मरीज भर्ती है। इन मरीजों को सप्लाई होने वाली ऑक्सीजन का दबाव रात तीन बजे एक दम से कम हो गया। सुबह होते- होते लोग तडपने लगे और तत्काल अपने परिजनों को फोन कर सूचना दी कि ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है, सांस लेने में तकलीफ हो रही है।
गुस्साएं परिजनों ने सुबह सात बजे से अस्पताल में हंगामा शुरू कर दिया। इस दौरान अस्पताल में तोडफोड भी हुई।
पीपुल्स प्रबंधन ने इसकी सूचना प्रशासन को दी कि ऑक्सीजन खत्म होने वाली है। इस पर आनन-फानन में संयुक्त कलेक्टर राजेश गुप्ता स्वयं ऑक्सीजन के सिलिंडर लेकर अस्पताल पहुंचे। जब सिलिंडर से बात नहीं बन पाई तो फिर लिक्विड ऑक्सीजन का टैंकर मंगवाया गया जो कि 11 बजे तक पीपुल्स अस्पताल पहुंचा तब जाकर व्यवस्थाएं बहाल हो पाई, लेकिन इस दौरान पांच मरीजों की मौत ऑक्सीजन लेवल कम ज्यादा होने के कारण हो चुकी थी।
पीपुल्स मेडिकल कॉलेज के डीन अनिल दीक्षित ने माना है कि अस्पताल में मौत हुई है और ऑक्सीजन का लेवल कम हुआ था, लेकिन उन्होंने तर्क यह दिया है कि ऑक्सीजन की कमी के कारण मौत हुई है या नहीं यह वे नहीं बता सकते है। बता दें कि पीपुल्स अस्पताल से 11 संक्रमित मरीजों के शव सुभाष नगर विश्राम घाट में अंतिम संस्कार के लिए पहुंचे है।
हुई तोड़फोड़, जमकर हंगामा
अपने लोगों की मौत होने की खबर सुनकर मृतकों के परिजनों ने अस्पताल में जमकर हंगामा किया। इस दौरान अस्पताल के डी ब्लॉक में तोडफोड भी की गई। इंटरनेट मीडिया में एक पोस्ट वायरल हुआ कि राजधानी के पीपुल्स मेडिकल कॉलेज में ऑक्सीजन की कमी के कारण 10 लोगों की मौत हो गई। इसके बाद तो पूरे कैंपस में हंगामा होना शुरू हो गया।
इधर, मामला गर्माने के बाद दोपहर को सभी मरीजों के परिजन अस्पताल पहुंच गए। परिजनों ने आरोप लगाया है कि अस्पताल प्रबंधन जब जिम्मेदारी नहीं संभाल पाता है तो मरीजों को भर्ती क्यो कर रहा है। वहीं कुछ परिजनों ने अस्पताल प्रबंधन पर जान लेने का आरोप लगाया है।
इसे देखते हुए पुलिस फोर्स बुलानी पडी तब जाकर कहीं भीड कंट्रोल हो पाई। बगतरा से आए है हाकम सिंह चौहान के परिजनों ने बताया कि 30 से 32 लोगों की मौत हो चुकी है लेकिन प्रबंधन शव देने से इंकार कर रहा है। दोपहर बाद जब जमावडा कम हुआ तब जाकर शव अंतिम संस्कार के लिए दिए गए।
ऑक्सीजन सिलिंडर लेकर दौड़े परिजन
ऑक्सीजन खत्म होने की बात सुनकर परिजन अस्पताल में ऑक्सीजन के सिलिंडर लेकर खुद ही इसे भराने के लिए यहां से वहां दौडते रहे। नजारा ऐसा लग रहा था कि मानों अपनों की जान बचाने के लिए हर व्यक्ति हर संभव कोशिश कर रहा था। पूरे अस्पताल में अफरा-तफरी मची हुई थी। प्रशासन सिलिंडर लेकर पहुंचा तो परिजनों ने स्वयं ही फटाफट सिलिंडर उठाकर रखवा दिए ताकि उनके अपनों की जान बचाई जा सके। इसके बावजूद यहां मरीजों की मौत हो गई।
आंखो देखी-
पिता जी तो बच गए लेकिन देखते ही देखते पांच मरीजों ने तोड़ दिया दम
ओल्ड सुभाष नगर निवासी कुणाल गौतम ने बताया कि सुबह 7 बजे उनके पिता जो कि 51 साल के है। उनका फोन आया कि उन्हें ऑक्सीजन नहीं मिल पा रही है। सांस लेने में तकलीफ हो रही है। मै तत्काल अस्पताल पहुंचा तो देखा यहां ऑक्सीजन थी ही नहीं। मै जैसे तैसे लडते-झगडते आईसीयू में पहुंचा तो पता चला कि सभी मरीजों को सांस लेने में दिक्कत हो रही थी। मेरे पिता की हालत ठीक थी उन्हें कम ही परेशानी थी वे बच गए लेकिन देखते ही देखते पिता के वार्ड के पांच लोगों ने दम तोड दिया। यह देखकर मेरी रूह कांप गई। ऑक्सीजन प्लांट का पानी भी हर दिन नहीं बदला जाता है। इसके कारण यहां हमेशा ऑक्सीजन लेवल कम ज्यादा होते रहता है।

