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पं दीनदयाल उपाध्याय की हत्या के 50 साल पुराने मामले की खुलेगी फाइल! हो सकती है CBI जांच

इलाहाबाद। भारतीय जनसंघ के सहसंस्थापक पंडित दीनदयाल उपाध्याय की हत्या के 50 साल पुराने मामले की सीबीआई जांच हो सकती है. इस सम्बंध में अम्बेडकर नगर के एक बीजेपी कार्यकर्ता के पत्र पर गृह मंत्रालय ने राज्य सरकार से रिपोर्ट मांगी है. इसी पत्र के आधार पर इलाहाबाद के एसपी रेलवे ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट आईजी रेलवे को सौंप दी है. यह रिपोर्ट अगले एक से दो दिन में यूपी शासन को भेज दी जाएगी.

रिपोर्ट में कहा गया है कि हत्या से जुड़े दस्तावेज, एफआईआर और केस डायरी लापता हैं. थाने में मिले एक रजिस्टर के आधार पर यह भी पता चला है कि इस मामले में तीन आरोपी गिरफ्तार किए गए थे, जिनमें एक को चार साल की सजा हुई थी. अब अधिकारी इस पांच दशक पुराने मामले में किसी ऐसे पुलिसकर्मी की तलाश कर रहे हैं, जो घटना के समय वहां पर तैनात था.

सूत्रों के मुताबिक, गृह मंत्रालय ने जिस तरह से रिपोर्ट मांगी है, यह किसी मामले की सीबीआई जांच के लिए अपनायी जाने वाली प्रक्रिया हो सकती है.

बता दें, अम्बेडकर नगर के बीजेपी कार्यकर्ता राकेश गुप्ता ने साल 2017 में केन्द्र सरकार को एक पत्र लिखा था. जिसमें गुप्ता ने पंडित दीन दयाल उपाध्याय की हत्या को साजिश बताते हुए सीबीआई जांच कराने की मांग की थी. पत्र में कहा गया था कि, 11 फरवरी 1968 को मुगलसराय स्टेशन पर पंडितजी की हत्या हुई थी. उनकी हत्या के पीछे विरोधी दलों की साजिश थी. साथ ही साजिश के तार पश्चिम बंगाल, नई दिल्ली और बिहार से जुड़े हुए थे. कहा जा रहा है कि इसी पत्र के आधार पर नवंबर 2017 में गृह मंत्रालय ने यूपी सरकार से रिपोर्ट मांगी है. इसी साल 6 अगस्त 2018 को डीजीपी ने इस मामले की रिपोर्ट आईजी रेलवे बीआर मीणा से मांगी थी. अब आईजी ने इसी पत्र के आधार पर एसपी रेलवे को रिपोर्ट देने को कहा है.

वहीं, एसपी रेलवे हिमांशु कुमार ने बुधवार को अपनी रिपोर्ट आईजी को सौंप दी है. रिपोर्ट में कहा गया है कि, 11 फरवरी 1968 को हुई इस घटना की रिपोर्ट अपराध संख्या 67/1968 पर आईपीसी 302 के तहत अज्ञात पर मुगलसराय थाने में दर्ज है. थाने के रजिस्टर संख्या 4 से जानकारी मिली है कि इस मामले में पुलिस ने तीन आरोपियों वाराणसी निवासी रामअवध, लालता और भरतराम को गिरफ्तार किया था.

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