नई कस्टम मिलिंग में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने राइस मिल एसोसिएशन ने कलेक्टर को सौंपा पत्र

कटनी। राइस मिल एसोसिएशन ने कलेक्टर को एक पत्र सौंप कर धान की कस्टम मिलिंग में व्याप्त विसंगतियों को दूर करने की मांग की है। कलेक्टर अवि प्रसाद को सौंपे गए पत्र की प्रति यशभारत डाट काम को उपलब्ध कराते हुए एसोसिएशन के पदाधिकारियों ने बताया कि कटनी के मिलर्स शासन की खरीफ 2023-24 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान की कस्टम मिलिंग करना चाहते हैं।
लेकिन शासन द्वारा खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में समर्थन मूल्य पर उपार्जित धान की कस्टम मिलिंग के लिए जो नीति जारी की गई है। उसमें कई तरह की विसंगतियां हैं। जिनका निराकरण किया जाना अति आवश्यक है।
इन विसंगतियों को दूर करने से प्रदेश में अच्छी गुणवत्ता का चावल सा.वि.प्र.एवं कल्याणकारी योजनाओं के माध्यम से वितरित हो। इसके लिए मप्र शासन ने गत वर्ष ही सोरटैक्स मशीन को लगाना अनिवार्य किया। जिसमें कस्टम चावल को क्लीन करने में निर्धारित मापदंड के अतिरिक्त डैमेज, डिसकलर व चाकी दानों को अलग करना पड़ता है एवं मिलिंग करने में टूटन अधिक होने से टूटन प्रतिशत को भी अलग करना पड़ता है।
जिसकी प्रतिपूर्ति मिलर्स द्वारा बाजार से क्रय कर की जाती है। ऐसे में नीति के बिंदु क्रमांक 13-13 अनुसार प्रतिमाह मिलों का भौतिक सत्यापन करवाए जाने पर धान चावल के स्टाक का मिलान संभव ही नहीं है। इसके लिए पूर्व में भी तत्कालीन प्रमुख सचिव मप्र शासन से जारी डीओ लेटर में भारत सरकार को टेस्ट मिलिंग कराने के संबंध में पत्र लिखा था।
जिसमें चावल एवं टूटन चावल की प्रतिशत का पता लगाया जा सके किंतु टेस्ट मिलिंग नहीं होने से चावल, टूटन की सही मात्रा ज्ञात नहीं हो पाती। ऐसे में भौतिक सत्यापन पर मिल में स्टाक कम मिलने पर पांच गुना पैनालटी (लगभग 60 लॉख प्रति लॉट) वसूल किये जाने निर्देश के साथ अपराधिक प्रकरण भी दर्ज करने के निर्देश हैं।
भौतिक सत्यापन चावल/धान के स्टाक के लिये टेस्ट मिलिंग बहुत ही आवश्यक है। जिससे वास्तविक स्थिति टूटन, डैमेज, डिसकलर व चाकी की मात्रा का भी सही आंकलन हो सकेगा एवं नीति में जोड़ी गई पैनाल्टी राशि एवं अपराधिक प्रकरण दर्ज करने की कंडिका 13.3 को समाप्त किया जाए।
इसी तरह जारी की गई नीति के बिंदु 3.1 में नवीनी करण शुल्क 5000 रूपए एवं 3.2 में नवीन मिलर्स को सीएसएमएस पोर्टल पर पंजीयन शुल्क 10000 रूपए निर्धारित किया है शुल्क को पूर्व वर्ष की भांति ही रखा जावें। इसी प्रकार नीति की कंडिका 14.2 में सीएमआर चावल बी.आर.एल होने पर राज्य की मिलिंग राशि एवं अपग्रेडेशन राशि की 04 गुना पैनाल्टी मिलर से वसूलने का प्रावधान रखा है को विलोपित किया जाए एवं पूर्व वर्ष की नीति अनुसार ही रखा जाए जिसमें बी.आर.एल लाट मिलर्स को अपने खर्चे पर बदलकर निर्धारित गुणवत्ता का चावल गोदाम में जमा कराना होता है। एसोसिएशन का यह भी कहना है कि खरीफ विपणन वर्ष 2023-24 में प्रारंभ से ही मिलिंग की विकल्पवार दरें जारी की जावें। विकल्पवार दरे शुरू से ही लागू होने से मिलर्स रूचि लेकर जल्द से जल्द नागरिक आपूर्ति निगम तथा भा.खा.नि में मिलिंग कर चावल जमा करेंगे।
कस्टम मिलिंग को गति देने के लिए धान डिलीवरी आर्डर एवं चावल जमा करने का स्वीकृति पत्रक राईस मिलरों के लागिन से भी प्राप्त हो ऐसी व्यवस्था की जावे। इस अवसर पर राइस मिल एसोसिएशन के अध्यक्ष दीपक असरानी, कार्यवाहक अध्यक्ष राजेश जानवानी, संरक्षक मनीष गेइ, महासचिव लक्ष्मीचंद डोडानी, उपाध्यक्ष दीपक नानकानी, सचिव लल्लन गुप्ता, सुरेश पंजवानी एवं विकी बुलानी की उपस्थिति रही।








