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झारखंड में हार की जिम्मेदारी मेरी, लेकिन पश्चिम बंगाल में सरकार जरूर बनाएंगे: शाह

  • भाजपा अध्यक्ष का दावा पश्चिम बंगाल में दो तिहाई बहुमत से बनाएंगे सरकार
  • बिहार में नीतीश कुमार के नेतृत्व में ही लड़ेंगे विधानसभा चुनाव
  • नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन ज्यादातर राजनीतिक
  • एनपीआर और एनआरसी का कोई संबंध नहीं
नई दिल्ली । केंद्रीय गृहमंत्री अमित शाह ने झारखंड विधानसभा चुनाव में हार को पार्टी अध्यक्ष होने के नाते अपनी हार बताया। उन्होंने बृहस्पतिवार को कहा कि हम हारे जरूर हैं, लेकिन यह हमारे लिए आत्मचिंतन का विषय है। राज्य में पार्टी के बागी नेता सरयू राय पर उन्होंने कहा कि किसी एक फैसले से पार्टी की हार-जीत चिह्नित नहीं कर सकते।
एक हिंदी चैनल के कार्यक्रम में शाह ने कहा, दिल्ली विधानसभा चुनाव के लिए हमारी तैयारी बहुत अच्छी है। गत चुनाव के बाद तीनों एमसीडी और सातों लोकसभा सीट हम जीते हैं। भाजपा ने दिल्ली में बहुत अच्छा प्रदर्शन किया है और राज्य की जनता भाजपा के साथ रहेगी। केजरीवाल ने जो वादे किए थे, वह पूरे नहीं कर पाए।

दिल्ली में सीएम उम्मीदवार पर उन्होंने कहा कि इस पर पार्टी निर्णय करेगी और यह फैसला पार्टी का संसदीय बोर्ड करता है। वहीं, पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव के बारे में उन्होंने दावा किया कि पार्टी राज्य में दो तिहाई बहुमत से सरकार बनाएगी। राज्य की जनता तृणमूल कांग्रेस के शासन से परेशान हो चुकी है और भाजपा की सरकार वहां बनना निश्चित है।

नीतीश के नेतृत्व में लड़ेंगे बिहार चुनाव
इस साल के अंत में होने वाले बिहार विधानसभा चुनाव को लेकर उन्होंने कहा कि एनडीए विधानसभा चुनाव जदयू अध्यक्ष और मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के नेतृत्व में लड़ेगा। इसमें किसी भी तरह का असमंजस या भ्रम नहीं है।

नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शन ज्यादातर राजनीतिक

शाह ने नागरिकता कानून के खिलाफ प्रदर्शनों को ज्यादातर राजनीतिक करार दिया। उन्होंने कहा कि इस कानून से किसी भारतीय को नागरिकता नहीं गंवानी पड़ेगी। उन्होंने कांग्रेस नेता राहुल गांधी और प्रियंका गांधी को चुनौती दी कि वे कानून की एक भी धारा दिखाएं जिसमें किसी की नागरिकता छीनने की बात कही गई हो। उन्होंने कहा कि कुछ लोग इस कानून को लेकर गुमराह कर रहे हैं, लेकिन हम लोगों को मनाने और समझाने की कोशिश कर रहे हैं।

एनपीआर और एनआरसी का कोई संबंध नहीं
शाह ने साफ किया कि जनगणना 2011 और राष्ट्रीय जनसंख्या रजिस्टर (एनपीआर) का राष्ट्रीय नागरिक रजिस्टर (एनआरसी) से कोई लेनादेना है। उन्होंने कहा कि देश में हर 10 साल में जनगणना और एनपीआर होता है और इस बार भी 10 साल बाद ऐसा हो रहा है। कांग्रेस ने अपने शासनकाल में हर बार इसे किया लेकिन अब इसका विरोध कर रही है।

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