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जबलपुर में कलयुगी पुत्र ने कैंची से हमला कर पिता को उतारा मौत के घाट

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जबलपुर। जबलपुर में एक कलयुगी पुत्र ने कैंची मारकर अपने पिता को मौत के घाट उतार दिया।

थाना प्रभारी गोहलपुर आर.के. गौतम ने बताया कि आज दिनाॅक 16-11-2020 को दोपहर लगभग 2 बजे बधैया मोहल्ला मे सूजीपुरा के पास झगडा होने की सूचना पर पहुंची पुलिस को बधैया मोहल्ला सूजीपुरा निवासी अठई कोष्टा उम्र 67 वर्ष एवं श्रीमति शिखा कोष्टा को उपचार हेतु मन्नू लाल अस्पताल ले जाये जाने एवं मन्नू लाल अस्पताल  से मेडिकल कालेज के लिये रिफर किये जाने की सूचना पर मेडिकल कालेज पहुंची पुलिस को ज्ञात हुआ कि परिक्षण उपरांत डाक्टर द्वारा अठई कोष्टा को मृत घोषित कर दिया गया है तथा घायल शिखा कोष्टा को उपचारार्थ भर्ती कर लिया गया है।

शिखा कोष्टा ने बताया कि आज सुबह उसके पति दिनेश कोष्टा अपनी माॅ को लेकर मामा के घर गये हुये थे वह घर पर ससुर अठई कोष्टा एवं बच्चों के साथ थी, दोपहर लगभग डेढ बजे देवर मनीष कोष्टा जो अपनी पत्नि के साथ शांति नगर मे रहते है सिलाई का काम करते हैं, घर आये और हिस्सा बांट को लेकर पूर्व की तरह  उससे गालीगलौज वाद विवाद करने लगे, मना किया तो कैंची निकालकर उस पर हमला कर दिये, जिससे उसके पेट मे चोट आ गयी, ससुर अठई कोष्टा ने बीच बचाव किया तो ससुर पर भी कैंची से हमला कर पेट एवं सीने मे चोट पहुंचा दिये, और भाग गये।

घटित हुई घटना से वरिष्ठ अधिकरियों को अवगत कराते हुये सूचना पर पहुंचे वरिष्ठ अधिकारियों एवं एफएसएल टीम की उपस्थिति में घटना स्थल का बारीकी से निरीक्षण करते हुये धारा 307 , 302 भादवि का अपराध पंजीबद्ध कर प्रकरण विवेचना में लिया गया।
पुलिस अधीक्षक जबलपुर  सिद्धार्थ बहुगुणा (भा.पु.से.) के द्वारा आरोपी पुत्र की शीघ्र पतासाजी कर गिरफ्तारी हेतु आदेशित किये जाने पर अति. पुलिस अधीक्षक शहर अमित कुमार (भा.पु.से.) एवं नगर पुलिस अधीक्षक गोहलपुर श्री अखिलेश गौर के मार्ग निर्देशन मे टीम गठित की गयी। टीम के द्वारा तलाश करते हुये  मनीष कोष्टा उम्र 28 वर्ष को अभिरक्षा मे लेते हुये घटना में प्रयुक्त कैंची की बरामदगी के प्रयास जारी है।

प्रारम्भिक पूछताछ पर ज्ञात हुआ कि मनीष कोष्टा की वर्ष 2013 मे शादी हुई थी, शादी के 3-4 माह बाद से ही फैक्ट्री से रिटायर्ड पिता अठई लाल से मकान मे हिस्सा को लेकर वाद विवाद करता था, तथा पत्नि के साथ अलग शांति नगर मे रहने लगा था। लाॅक डाउन के समय पिता ने कोई काम धाम न होने के कारण मनीष की खाना खर्चे के लिये काफी मदद भी की थी।

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