
कटनी। जन्माष्टमी पर शहर कृष्ण की भक्ति में तल्लीन दिख रहा हे। कटनी शहर के अधिकांश कृष्ण मंदिरों की खासियत यह है कि यह अतिप्राचीन या यूं कहा जाए कि देश की आजादी के पहले के हैं। साफ है कटनी शहर अनेकानेक वर्षों से भगवान कृष्ण की भक्ति में तल्लीन रही है।

शहर में भगवान कृष्ण के भक्तों की कई कहानियां हैं। शहर ही नहीं जिले में भी गई ऐसे मंदिर हैं जो अपनी प्राचाीन ऐतिहासिकता को सजाये संवारे हैं।कटनी में सत्यनारायण मंदिर अपना सौंवा जन्माष्टमी महोत्सव मना रहा है। यह कटनी में जन्माष्टमी महोत्वस की ऐतिहासिकता उजागर करता है।

इसी तरह गोविन्द देव जी मंदिर भी शहर के उन प्राचीन मंदिरों में से एक है जो कृष्ण भक्ति के लिए शहर ही नहीं पूरे संभाग में जाने पहचाने जाते हैं। गोविन्द देव जी मंदिर शहर के सबसे प्राचीन मंदिरों में एक है। इस मंदिर को स्थापना को 154 वर्ष हो चुके हैं। अनुमान लगाया जा सकता है डेढ़ सौ साल पहले शहर कैसा रहा होगा और आज जिस जगह घना मार्केट है वहां क्या रहा होगा। बहुत कुछ बदला पर नहीं बदली तो शहर में कृष्ण भक्ति और कृष्ण मंदिर।

शहर में एक और प्राचीन कृष्ण मंदिर लक्ष्मीनारायण मंदिर रोड स्थित श्री लक्ष्मीनारायण मंदिर है। इस मंदिर की स्थापना को भी 104 वर्ष हो गये जो निरंतर भक्तों के लिए कृष्ण की भक्ति में तल्लीन होने का एक सुंदर मंदिर है। इसी तरह महालक्ष्मी मंदिर भी 125 वर्षों से अधिक समय से शहर की पहचान बना है।
आज जन्माष्टमी का मौका है, शरद पूर्णिमा या राधा अष्टमी इस मंदिरों में भक्ति की धारा निरंतर प्रभाहित होती रहती है। आज भगवान कृष्ण का जन्म दिन मनाने शहर के इन प्राचीन मंदिरों में श्रद्धालु उमड़ेंगे। कहीं लाख की झांकी तो कहीं रांगोली और कृष्ण के मोहक स्वरूप के दर्शन होंगे।
कैमोर का मुरलीधर मंदिर 80 साल पुराना

जिले में कैमोर भी अतिप्राचीन मुरलीधर मंदिर के रूप में जाना जाता है मुरलीधर मंदिर करीब 80 वर्ष पुराना है। बताया जाता है कि इस मंदिर की स्थापना उस ठेकेदार परिवार ने की थी जिसे स्वतंत्रता के पहले झुकेही से कैमारे रेल लाइन बिछाने का ठेका मिला था। आज मंदिर को निरंतर भव्य स्वरूप इसे कृष्ण के भक्तों के लिए कैमोर वासियों के लिए गौरव के समान है।
जब बांधा के मंदिर में बजी थी कृष्ण की मुरलिया

सुनने में जल्द विश्वास नहीं होता लेकिन बुजुर्गों की मानें तो करीब दो दशक पहले कटनी के बिलहरी के समीप ग्राम बांधा में रात भर भगवान कृष्ण की बांसुरी की आवाज आती रही लोगों का यकीन नहीं हुआ लेकिन जिसने यह आवाज सुनी आज भी वह दावे के साथ कहता है कि इस मंदिर में चमत्कार होते लोगों ने देखा है। बांधा का कृष्ण मंदिर जिले के प्राचीन कृष्ण मंदिरों में से एक है।
बरही का रामलला दरबाद
बरही में भगवान श्रीकृष्ण जन्माष्टमी के पावन पर्व के अवसर पर बरही नगर के श्रीरामलला दरबार मे श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की धूम रहेगी। यह मंदिर भी काफी पुराना है। श्रद्धालु इस मंदिर में आकर अपनी मनोकाना पूर्ण करते हैं। मंदिर में हर वर्ष भव्यता से सिर्फ जन्माष्टमी ही नहीं सभी त्योहार हर्षोल्लास के साथ मनाए जाते हैं।








