मध्यप्रदेश

चालान कॉपी हिंदी में उपलब्ध कराने तक पीएमटी कांड केस की ट्रायल रोकी

ग्वालियर। गुरुवार को विशेष सत्र न्यायालय ने सीबीआई को आदेश दिया कि वह अभियुक्तों को चालान की कॉपी हिन्दी में उपलब्ध कराए, लेकिन सीबीआई ने तर्क दिया कि हाईकोर्ट के आदेश के खिलाफ सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर कर दी है। जब तक सुप्रीम कोर्ट से निर्णय नहीं हो जाता है, तब तक हिंदी में चालान की कॉपी के लिए इंतजार करना होगा और फैसला आने तक समय दिया जाए।

पीएमटी कांड के आरोपित गौरव गुप्ता व राहुल यादव ने फर्जी तरीके से पीएमटी पास कर जीआरएमसी से एमबीबीएस की थी। एसआईटी ने इनके खिलाफ केस दर्ज किया था। उसके बाद सीबीआई ने अतिरिक्त जांच कर चालान पेश किया। दोनों के खिलाफ विशेष सत्र न्यायालय में ट्रायल चल रही है।

इस केस में दो गवाह शेष रह गए हैं, लेकिन नरोत्तम धाकड़ के केस का हवाला देते हुए राहुल व गौरव ने चालान की कॉपी हिंदी में लेने के लिए न्यायालय में आवेदन पेश किया था। कोर्ट ने 17 अप्रैल 2018 को सीबीआई को आदेश दिया था कि अगली सुनवाई पर अभियुक्तों को हिंदी में चालान की कॉपी उपलब्ध कराई जाए, लेकिन सीबीआई ने दस्तावेजों का ट्रांसलेशन नहीं कराया।

कोर्ट ने सुनवाई के दौरान हिंदी में चालान की कॉपी उपलब्ध कराने को कहा, जिसको लेकर विशेष लोक अभियोजक सौरव वर्मा ने एक आवेदन पेश कर दिया और सुप्रीम कोर्ट में एसएलपी दायर करने की जानकारी दी। साथ ही कहा कि सुप्रीम कोर्ट का फैसला आने तक हिंदी में चालान की कॉपी उपलब्ध कराने का समय दिया जाए। कोर्ट ने केस की तारीख बढ़ा दी।

क्या है नरोत्तम धाकड़ का केस

सीबीआई ने आरक्षक भर्ती घोटाले में नरोत्तम धाकड़ के खिलाफ केस दर्ज किया है और कोर्ट में चालान की कॉपी अंग्रेजी में दी है, जिसको लेकर धाकड़ ने हाईकोर्ट में याचिका दायर की। तर्क दिया कि उसे अंग्रेजी नहीं आती है, जिससे चालान समझ में नहीं आ रहा है। हाईकोर्ट ने नरोत्तम धाकड़ को हिंदी में चालान की कॉपी देने का आदेश दिया था।

इसी आदेश को आधार बनाकर एमबीबीएस की अंग्रेजी में पढ़ाई करने वाले डाक्टर हिंदी में चालान की कॉपी मांग रहे हैं। जबकि सीबीआई विरोध कर रही है कि ये पढ़े लिखे हैं और ये अंग्रेजी पढ़ सकते हैं और समझ सकते हैं, लेकिन कोर्ट ने सीबीआई की आपत्तियों को खारिज करते हुए हिंदी में चालान की कॉपी देने का आदेश दिया है।

सीबीआई के सामने यह परेशानी

  • सीबीआई ने जितने भी दस्तावेजों की लैब से जांच कराई है, उसकी रिपोर्ट अंग्रेजी में है। जांच अधिकारी देश के अलग-अलग राज्यों के रहने वाले हैं, जिन्हें हिंदी नहीं आती है। एक चालान में काफी पेज हैं, जिन्हें ट्रांसलेट करना आसान नहीं होगा। क्योंकि उसके एक-एक शब्द का मिलान भी करना पड़ेगा।

-अगर सीबीआई दस्तावेजों का ट्रांसलेशन करती है तो उसे हिंदी में बदलने में काफी समय लग जाएगा। जबकि उतने दिन में गवाही हो सकती है।

  • सुप्रीम कोर्ट की एसएलपी में इन परेशानियों से अवगत कराया गया है।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम

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