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चंदिया नगर पंचायत अध्यक्ष का निर्वाचन शून्य घोषित, जानिये पूरा मामला

चंदिया। उमरिया जिले में पहली बार किसी का निर्वाचन शून्य घोषित हुआ है। चंदिया नगर पंचायत की अध्यक्ष का निर्वाचन द्वितीय जिला एवं सत्र न्यायाधीश के अदालत से हुये फैसला में निर्वाचन को शून्य घोषित किया गया है। इस फैसले में करीब 3 साल लगे। याचिकाकर्ता भाजपा की हारी हुई प्रत्याशी थीं

उमरिया जिले की चंदिया नगर पंचायत का चुनाव नवम्बर 2014 में हुआ था जिसमें नगर पंचायत अध्यक्ष पद के लिए भाजपा से मंजू कोल और भाजपा से बगावत कर सरस्वती मांझी चुनाव लडी थी और जीत सरस्वती मांझी को हासिल हुई थी।

गौरतलब है कि चंदिया नगर पंचायत की सीट अनुसूचित जन जाति महिला के लिए आरक्षित थी | हालांकि मांझी जाति अनुसूचित जन जाति में आती है, लेकिन सरस्वती मांझी के खिलाफ भाजपा की हारी प्रत्याशी मंजू कोल ने अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश के यहाँ याचिका 1 जनवरी 2015 में दाखिल कर सरस्वती मांझी की जाति को चैलेन्ज की, उनका कहना था कि सरस्वती मांझी नहीं सरस्वती बर्मन है जो कि पिछड़ी जाति में आती है और विवाह के बाद मांझी हुई है इसलिए ये उस आरक्षित पद के योग्य नहीं है |

इस बारे में याचिकाकर्ता के वकील सूर्य प्रकाश गुप्ता ने  बताया कि अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश राजेश तिवारी की अदालत ने याचिका स्वीकार कर उस पर सुनवाई करते हुए पाए कि सरस्वती मांझी की कक्षा 8 की अंक सूची में बर्मन लिखा है और बर्मन जाति पिछड़े वर्ग में आती है जिस कारण उनका निर्वाचन शून्य घोषित किया जाता है। इस पर अब जिले के कलेक्टर को चाहिए कि चंदिया का प्रभार अपने हाथ में लें और आगे की कार्यवाही सुनिश्चित करें।

हलाँकि इस मामले में सरस्वती मांझी ने फोन पर बताईं कि निर्णय गलत हुआ है हम अभी इसकी अपील माननीय उच्च न्यायालय में करेंगे। अब आगे देखना होगा कि उच्च न्यायालय से किसके पक्ष में फैसला आता है।

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