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कोरोना से कम घातक नहीं है यह बीमारी, लापरवाही पड़ेगी भारी; रखिए इन बातों का ध्‍यान

लखनऊ। अस्थमा (दमा) एक आनुवांशिक रोग है जिसमें रोगी की सांस की नलियां अतिसंवेदनशील हो जाती हैं एवं कुछ कारकों के प्रभाव से उनमें सूजन आ जाती है जिससे रोगी को सांस लेने में कठिनाई होती है। ऐसे कारकों में धूल (घर या बाहर की) या पेपर की डस्ट, रसोई का धुआं, नमी, सीलन, मौसम परिवर्तन, सर्दी-जुकाम, धूमपान, फास्टफूड, मानसिक चिंता, व्यायाम, पेड़ पौधों एवं फूलों के परागकण, वायरस एवं बैक्टीरिया आदि के संक्रमण प्रमुख होते हैं।

बचपन में ही हो जाता है हावी: ग्लोबल बर्डन ऑफ अस्थमा रिपोर्ट के अनुसार, विश्व में लगभग 30 करोड़ लोग अस्थमा से पीड़ित हैं। भारत में यह संख्या तीन करोड़ के लगभग है। दो तिहाई से अधिक लोगों में अस्थमा बचपन से ही प्रारंभ हो जाता है। इसमें बच्चों को खांसी होना, सांस फूलना, सीने में भारीपन, छींक आना व नाक बहना तथा बच्चे का सही शारीरिक विकास न हो पाना जैसे लक्षण होते हैं। शेष एक तिहाई लोगों में अस्थमा के लक्षण युवावस्था में प्रारंभ होते हैं। इस तरह अस्थमा बचपन या युवावस्था में प्रारंभ होने वाला रोग है।

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