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कैमोर के मुरलीधर मंदिर में जन्माष्टमी की धूम, मनोरम झांकियों सहित बाल गोपाल के दर्शन करने उमड़ी श्रद्धालुओं की भीड़

कैमोर। (राजा दुबे)। कैमोर स्थित प्राचीन मुरलीधर मंदिर में जन्माष्टमी का पर्व 7 सितम्बर गुरुवार को भक्ति भाव एवं उल्लास के साथ मनाया गया। इस अवसर पर जहां एक ओर मंदिर और पूरे परिसर को विद्युत की आकर्षक रंगीन रोशनियों से सजाया गया था वहीं एक से बढ़कर एक मनोरम झांकियां तैयार की गई थी। रात्रि 12 बजे भगवान श्रीकृष्ण के जन्म के शिशु स्वरूप का दर्शन करने मंदिर में श्रद्धालुओं की अपार भीड़ मौजूद रही। नंद के आनंद भयो,जय कन्हैया लाल की गूंज से पूरा मंदिर परिसर गुंजायमान होता रहा।

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कैमोर का मुरलीधर मंदिर लगभग आठ दशक पुराना है। लगभग डेढ़ दशक पहले मुरलीधर मंदिर की हीरक जयंती मनाई गई थी। मुरलीधर मंदिर का निर्माण यहां गुजरात के कच्छ प्रान्त से आये एसीसी के ठेकेदार नानजी भाई – हरि भाई के द्वारा कराया गया था। उनके ही द्वारा भगवान श्रीकृष्ण एवं राधा जी की मूर्तियां की प्राण प्रतिष्ठा की गई थी। बाद में यहां शिव जी,,,गणेश जी,हनुमान जी,,जगदम्बा जी आदि देवी – – देवताओं की प्रतिमाएं भी स्थापित की गई।

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विशाल परिसर में आकर्षक उद्यान और मंच भी तैयार किया गया है। हर साल जन्माष्टमी पर्व पर यहां भगवान के जन्म की लीला का आयोजन किया जाता है। इस बार मथुरा व्रन्दावन की तर्ज़ पर यहां भी जन्माष्टमी पर्व दूसरे दिन मनाया गया।

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उल्लेखनीय है कि कुछ मंदिरों में 6 सितम्बर बुधवार को ही जन्माष्टमी के कार्यक्रम आयोजित किये गए थे पर मुरलीधर मंदिर में यह आयोजन 7 सितम्बर को हुआ। मंदिर के प्रधान पुजारी जी के अनुसार कैमोर के मुरलीधर मंदिर का सम्बंध मथुरा व्रन्दावन से है इसलिए यहां धार्मिक कार्यक्रम उसी अनुसार किये जाते है। जन्माष्टमी पर यह मंदिर लोगों की आस्था का प्रमुख केंद्र होता है। इस बार भी जन्माष्टमी पर यहां भारी संख्या में श्रद्धालु एकत्र हुए।

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