कुक्षी की पिच पर अब तक सिर्फ दो प्रत्याशी ने लगाई जीत की हैट्रिक
धार। कुक्षी विधानसभा सीट पर 1952 से लेकर अब तक हुए चुनाव में दो उम्मीदवार ही जीत की हैट्रिक लगा पाए हैं। पूर्व उपमुख्यमंत्री व नेता प्रतिपक्ष रहीं कांग्रेस नेता स्व. जमुना देवी लगातार पांच बार 1985, 1993, 1998, 2003 और 2008 में चुनाव जीतकर हैट्रिक लगा चुकी हैं। इस तरह इस सीट पर वे सर्वाधिक पांच बार विधायक रही थीं। पूर्व परिवहन मंत्री एवं पंचायत मंत्री रहे कांग्रेस के ही नेता स्व. प्रतापसिंह बघेल 1972, 1977 और 1980 में लगातार तीन बार चुनाव जीतकर कुक्षी सीट से जीत की हैट्रिक लगाने में कामयाब रहे थे।
महिला विधायक के नाते सबसे लंबा काल जमुना देवी का : खास बात यह है कि जमुना देवी इस क्षेत्र की न होकर झाबुआ से यहां आई थीं और उन्हें हर बार चुनाव में बाहरी उम्मीदवार का ठप्पा लगता था। इसके बावजूद उन्होंने सर्वाधिक 22 साल तक कुक्षी विधानसभा सीट का प्रतिनिधित्व कि या। प्रदेश में महिला विधायक के नाते जमुना देवी का कार्यकाल सबसे लंबा है। कुक्षी ब्लॉक के तलावड़ी गांव के रहने वाले प्रतापसिंह बघेल इस सीट पर 12 साल प्रतिनिधित्व कर चुके है।
वे वर्तमान विधायक सुरेंद्रसिंह हनी बघेल के पिता थे। डही निवासी रातुसिंह चौंगड़ ने कांग्रेस के टिकट पर दो चुनाव लड़े और विधायक चुने गए। चौंगड़ ही कुक्षी विधानसभा सीट के पहले विधायक के रूप में चुने गए थे। वे 1952 में चुनाव जीतकर पहली बार विधायक बने थे। 1957 में भी चौंगड़ फिर से निर्वाचित हुए।
एक-एक बार ही रह पाए विधायक : पड़ियाल (डही) निवासी बाबूसिंह अलावा 1962 में जनसंघ से, निसरपुर के रहने वाले छितू सिंह मुजाल्दा 1967 में कांग्रेस से, ढोल्या (कुक्षी) की रहने वाली रंजना बघेल 1990 में भाजपा के टिकट पर जीत दर्ज कर विधायक बनीं। वहीं जमुना देवी की मृत्यु के बाद हुए उपचुनाव में सोरवा (आलीराजपुर) के रहने वाले मुकामसिंह कि राड़े 2011 में भाजपा के टिकट पर कुक्षी विधायक चुने गए। वर्ष 2013 के चुनाव में फिर यहां कांग्रेस ने कब्जा जमाया और सुरेंद्रसिंह हनी बघेल विधायक निर्वाचित हुए।

