भाजपा सांसद सुब्रमण्यम स्वामी ने 1999 के बहुचर्चित कंधार विमान अपहरण कांड की यादें ताजा कराई हैं। उन्होंने कहा कि इंडियन एयरलाइंस के यात्रियों के बदले में तीन खूंखार आतंकवादियों की रिहाई भारत के आधुनिक इतिहास में आतंकवादियों के सामने ‘सबसे खराब समर्पण’ था। 
स्वामी ने ‘ह्यूमन राइट्स एंड टेरेरिज्म इन इंडिया’ शीर्षक से अपनी एक नई पुस्तक प्रकाशित कराई है। इसमें कहा गया है कि कैसे आतंकवाद का मुकाबला करने के लिए उचित प्रतिबंधों के साथ नागरिकों के मौलिक अधिकारों के साथ सामंजस्य स्थापित किया जा सकता है। जिन्हें संविधान द्वारा अनुमति दी गई है और सुप्रीम कोर्ट द्वारा बरकरार रखा गया है। उनका कहना है कि इस अध्ययन का निचोड़ है कि आतंकवाद को रोकने के लिए भारत को एक राष्ट्र के रूप में पहचान को बढ़ावा देना चाहिए।
भारत आतंकियों से घिरा, सरकार उनकी मांग कभी न मानें
स्वामी के अनुसार भारत आज ‘पाकिस्तान, तालिबान-नियंत्रित अफगानिस्तान, आईएसआईएस और अन्य इस्लाम धर्म-आधारित आतंकवादियों, और चीन समर्थित पूर्वोत्तर विद्रोहियों की आतंकवादी घेराबंदी का सामना कर रहा है। अब हमें इसका प्रभावी व पूर्ण समाधान निकालने की जरूरत है। इससे पहले कभी भी गुप्त या प्रत्यक्ष तोड़फोड़ के जरिए भारत की भौगोलिक अखंडता को खतरे में नहीं डाला गया। हिंसा के माध्यम से भारत की शांतिप्रिय आबादी को आतंकित नहीं किया।
हिंदुओं का मनोबल गिराना आतंकियों का लक्ष्य
भाजपा के राज्यसभा सदस्य स्वामी का दावा है कि आतंकवादियों का राजनीतिक लक्ष्य हिंदुओं का मनोबल गिराना और हिंदू सभ्यता को नष्ट करने के लिए भारत की हिंदू नींव को कमजोर करना है। सरकार को आतंकियों की किसी भी मांग को कभी स्वीकार नहीं करना चाहिए।
स्वामी ने किताब में लिखा कि तीन खूंखार आतंकवादियों की दिसंबर 1999 में जेल से रिहाई और कंधार ले जाकर उन्हें छोड़ना तथा इंडियन एयरलाइंस के अपहृत विमान यात्रियों की रिहाई कराने का फैसला बेहद त्रासदीपूर्ण निर्णय का एक उदाहरण है। जिन आतंकियों को छोड़ा गया था उनमें जैशे मोहम्मद का सरगना मोहम्मद अजहर भी शामिल था।
बता दें, 24 दिसंबर 1999 को पांच आतंकियों ने काठमांडू से दिल्ली जा रही फ्लाइट आईसी 814 का अपहरण कर लिया था। इसमें 154 यात्री व चालक दल के लोग सवार थे। उन्हें आठ दिन तक कंधार में बंधक बनाकर रखा गया था। इसके बाद तत्कालीन विदेश मंत्री जसवंत सिंह भारत की जेलों में बंद तीन खूंखार आतंकियों मसूद अजहर, उमर शेख व मुश्ताक अहमद को विमान से कंधार लेकर गए थे। इसके बाद विमान यात्रियों को रिहा किया गया था।
इसके बाद सालों से विपक्षी दल आरोप लगाते आ रहे हैं कि एनडीए सरकार ने 1999 में आतंकियों के सामने सरेंडर किया था, लेकिन भगवा दल का कहना है कि यह उस वक्त की मांग थी, क्योंकि तत्कालीन वाजपेयी सरकार को इतने यात्रियों की जान बचाना थी।








