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UP: नकल माफिया ने 600 अयोग्य छात्रों को बनवाया डॉक्टर, STF ने किया बेनकाब

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लखनऊ: उत्तर प्रदेश में स्पेशल टास्क फोर्स (एसटीएफ) की टीम ने विश्वविद्यालय, मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस परीक्षाओं तथा अन्य महाविद्यालयों की स्नातन, परास्नातक, एलएलबी सहित परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं को बदलवाने वाले गिरोह के चार सदस्यों को शनिवार को गिरफ्तार कर लिया।

वर्ष 2014, 2015, 2016 और 2017 में छह सौ से ज्यादा गैर मेधावी छात्र इस गोरखधंधे के जरिए पासआउट होकर डॉक्टर भी बन चुके हैं। पता लगाया जा रहा है कि किन कॉलेजों में किस-किस छात्र की कॉपियां बदली गईं। इसके बाद इन पासआउट छात्रों को भी साजिश का आरोपी बनाया जाएगा।

पुलिस प्रवक्ता के अनुसार एसटीएफ को चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय, मेरठ से सम्बद्ध मेडिकल कॉलेजों के एमबीबीएस परीक्षाओं तथा महाविद्यालयों की स्नातक, परास्नातक, एलएलबी सहित अन्य परीक्षाओं की उत्तर पुस्तिकाओं को बदलवाने वाले गिरोह के सक्रिय होने की सूचनाएं प्राप्त हो रही थीं। पुलिस उपाधीक्षक बृजेश कुमार सिंह के नेतृत्व में एसटीएफ फील्ड इकाई मेरठ में टीमें गठित कर अभिसूचना संकलन की कार्रवाई शुरु करने के साथ अभिसूचना तन्त्र को सक्रिय किया गया।

बिजनौर का रहने वाला है मुख्य आरोपी
मुखबिर की सूचना पर मेडिकल क्षेत्र में दुर्गापुरम, गढ़ हापुड़ रोड बन रहे मकान पर मेरठ पुलिस के साथ अपराह्न डेढ़ बजे छापा मारकर बिजनौर के मूल निवासी कविराज को गिरफ्तार कर लिया। मौके से चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यालय से सम्बद्ध मुजफ्फरनगर मेडिकल कॉलेज बेगराज मन्सूरपुर की एमबीबीएस की द्वितीय वर्ष की परीक्षा की लिखी हुई दो उत्तर पुस्तिका बरामद हुई।

गिरफ्तार आरोपी कविराज ने पूछताछ में बताया कि उत्तर पुस्तिकाओं को बदलवाने में चौधरी चरण सिंह विश्वविद्यलाय के उत्तर पुस्तिका अनुभाग एवं अन्य अनुभागों के कर्मचारी संदीप, पवन तथा कपिल उसके साथ संलिप्त हैं। ये लोग विश्वविद्यालय में बाहर से लिखी हुई उत्तर पुस्तिकाओं को बदल देते हैं।

उत्तर पुस्तिका बदलने के एवज में वसूलते थे लाखों रुपए
कविराज ने बताया कि एमबीबीएस के छात्रों से एक पेपर की उत्तर पुस्तिका बदलने के एवज में एक लाख बीस हजार से लेकर एक लाख पचास हजार रुपए तक वसूलते हैं। इसमें से दस हजार रुपए विश्वविद्यालय की खाली उत्तर पुस्तिका लाने के लिए संदीप को दिए जाते हैं। पैंतीस हजार रुपए से लेकर पैंसठ हजार रुपए तक लिखित उत्तर पुस्तिका बदलने के लिए पवन एवं कपिल को दिए जाते हैं।

उसने बताया कि संदीप विश्वविद्यालय से खाली उत्तर पुस्तिकाएं लाकर उसे देता है तथा इन उत्तर पुस्तिकाओं को छात्रों से लिखवाकर वह उन्हें पवन तथा कपिल को दे देता है। पवन एवं कपिल उन उत्तर पुस्तिकाओं के ऊपर के पेज को मूल उत्तर पुस्तिका के ऊपर के पेज को बदलकर पन्च करके उत्तर पुस्तिका अनुभाग में रख देते हैं।

पवन विश्वविद्यालय में वरिष्ठ लिपिक इन्चार्ज उत्तर पुस्तिका अनुभाग एवं कपिल तथा संदीप विश्वविद्यालय में संविदा कर्मचारी हैं। उसने यह भी बताया कि वह वर्ष 2014 से उत्तर पुस्तिकाओं को बदलवा रहा है और लगभग प्रत्येक वर्ष 100-150 छात्रों के विभिन्न पेपरों की उत्तर पुस्तिका बदलवा देता है तथा करोडों का अवैध करोबार कर चुका है।

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