उसके बाद वह प्रत्याशी चुनाव नहीं लड़ पाएगा। यह बात जीएसआईटीएस कॉलेज में भारत निर्वाचन आयोग के उप आयुक्त चंद्रभूषण कुमार व डायरेक्टर विक्रम बत्रा ने कॉलेज के छात्रों से कही। वे बुधवार को इंदौर में कॉलेज के छात्रों को वीवी पेट मशीन की जानकारी देने के लिए आए थे। इस दौरान छात्रों ने प्रश्न भी पूछे। एक छात्र ने पूछा कि मैं पहली बार वोट डालूंगा, यह कैसे पता करूं कि कौन सी पार्टी अच्छी है और कौन सी बुरी। इस पर उपायुक्त ने स्वयं ही निर्णय लेने की बात कही। इसके बाद कुमार ने संभाग के सभी कलेक्टरों की बैठक ली और चुनाव की तैयारियों का जायजा लिया। शाम को चुनाव के मुद्दों पर मीडिया से भी चर्चा हुई।

1.16 करोड़ घरों का सर्वे

भारत निर्वाचन आयोग के उपायुक्त ने निर्वाचन आयोग की गतिविधि के बारे में जानकारी दी। उन्होंने बताया इस बार चुनाव आयोग बहुत सख्ती से चुनाव कराने जा रहा है। इसके साथ ही मतदान का प्रतिशत बढ़ाना भी मुख्य उद्देश्य है। पूरे प्रदेश में एक करोड़ 16 लाख घरों का सर्वे किया है। कमियां मिलने पर तुरंत दूर किया जा रहा है।

छात्रों ने पूछे सवाल

– मैं पहली बार वोट डाल रहा हूं, कैसे पता करूं कौन सी पार्टी अच्छी है?

– आयोग के उपायुक्त ने जवाब में कहा कि इसके लिए निर्वाचन आयोग सलाह नहीं दे सकता। वोटर इसके लिए स्वतंत्र है, उसे खुद अच्छे और बुरे नेता का चुनाव करना होगा।

– छह माह पहले आए थे बीएलओ, अब भी नहीं बनकर आया मतदान पहचान पत्र?

– 31 जुलाई की लिस्ट में नाम दर्ज किया होगा। 30 दिन में घर पर ही आ आ जाएगा। 31 अगस्त तक का समय निश्चित किया है। यदि न आए तो उसकी शिकायत करें।

– जिले सहित प्रदेश भर में कई फर्जी मतदाता सामने आए थे, इन्हें रोकने के लिए क्या किया?

– मतदाता फर्जी नहीं थे, या तो वे कहीं और चले गए, उनकी मौत हो गई या उनके नाम सही दर्ज नहीं थे। इस बार सर्वे में सभी को सही किया जा रहा है।

– तय सीमा से अधिक खर्च हर बार होता है, इस पर लगाम नहीं लगाई जाती क्यों?

– यदि कोई प्रत्याशी 28 लाख से अधिक खर्च करता है तो उसे आयोग के नियमानुसार चुनाव से बाहर कर दिया जाता है। इस बार आयोग ने एक ऐप लांच किया है, जिस पर जनता अधिक खर्च करने वाले उम्मीदवार के बैनर-पोस्टर की फोटो वीडियो भेज सकता है, उसके आधार पर तुरंत कार्रवाई होगी।

– जो देश के बाहर हैं उनके लिए वोट देने की क्या व्यवस्था है?

– देश के बाहर गए लोगों से चुनाव में वोट डलवाने पर निर्वाचन आयोग भी विचार कर रहा है। कोर्ट में भी इस पर विचार किया जा रहा है।