उपचुनाव नतीजों के बाद अब बदलेगी यूपी की सियासी तस्वीर

लखनऊ। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने विधानसभा में छह मार्च को कहा था “त्रिपुरा में हमने लाल झंडे को डुबो दिया और अब उप्र में लाल टोपी डुबो देंगे।” लेकिन, बुधवार को गोरखपुर और फूलपुर संसदीय क्षेत्र के उपचुनाव के नतीजों ने लाल टोपी को आसमान पर लहरा दिया। ऐसा सपा-बसपा समझौते की वजह से हो सका। निसंदेह इन नतीजों से उप्र की सियासी तस्वीर बदलेगी।

मोदी लहर में जीती 73 सीटें

भाजपा 2019 में उप्र की 80 सीटों पर केसरिया फहराने का सपना देख रही है, लेकिन इस परिणाम ने उसकी हवा निकाल दी है। 2014 में मोदी लहर में सहयोगी अपना दल समेत प्रदेश की 73 सीटें जीतने वाली भाजपा की राह रोकने के लिए सपा-बसपा समेत कुछ छोटे दल मजबूती से एक साथ गठबंधन कर सकते हैं। कांग्रेस ने भी इस जीत पर जो उत्साह दिखाया है वह उसके नए इरादे का संकेत है। उपचुनाव में कई दल एकजुट हुएउपचुनाव में राष्ट्रीय लोकदल, पीस पार्टी, निषाद और प्रगतिशील मानव समाज पार्टी जैसे कई दल एक साथ आ जुटे, जबकि भाजपा ने 2014 में केवल अपना दल से समझौता किया था पर, 2017 में वह सुहेलदेव भारतीय समाज पार्टी को भी साथ लाई।

नहीं चलेगा हिंदुत्व कार्ड

गोरखपुर और फूलपुर के चुनाव नतीजों ने यह साबित कर दिया कि भाजपा हिंदुत्व कार्ड खेलने में सफल नहीं हुई है। फूलपुर में मुसलमानों के बड़े नेता माने जाने वाले निर्दलीय बाहुबली अतीक अहमद हों या गोरखपुर में कांग्रेस की डॉ. सुरहीता करीम, दोनों के मत सिमट गए। पिछड़ों-अति पिछड़ों, दलितों, मुसलमानों और सरकार विरोधी सवर्णों ने सपा उम्मीदवार के साथ गोलबंदी दिखाई। यह समीकरण भविष्य में भी बन सकते हैं।

आजमगढ़ की ताजा हुई याद

गोरखपुर की हार ने 1978 में आजमगढ़ संसदीय क्षेत्र के उपचुनाव की याद ताजा कर दी है। उस समय मुख्यमंत्री रामनरेश यादव के इस्तीफे से वहां चुनाव हुआ था। विपक्ष में बैठी कांग्रेस ने मोहसिना किदवई को उम्मीदवार बनाया जबकि प्रचंड बहुमत से विधानसभा चुनाव जीतने वाली जनता पार्टी ने रामबचन यादव को मौका दिया। राम बचन यादव चुनाव हार गए। तब मतदाताओं का रुख ऐसा था कि दिग्गज चंद्रजीत यादव जैसे नेता वहां 20 हजार मत भी नहीं पा सके। तब इस चुनाव परिणाम ने उत्तर प्रदेश की सियासी तस्वीर बदल दी थी और महज डेढ़ साल बाद ही कांग्रेस की वापसी हो गई थी।

2014 के बाद हुए उप-चुनाव, विजेता

वर्ष क्षेत्र विजेता दल

2014 मेडक टीआरएस

2014 वडोदरा भाजपा

2014 मैनपुरी सपा

2014 बीड भाजपा

2014 कंधमाल बीजद

2015 बनगाव टीएमसी

2015 वारंगल टीआरएस

2015 रतलाम कांग्रेस

2016 शहडोल भाजपा

2016 तमलुक टीएमसी

2016 कूचबिहार टीएमसी

2017 मलप्पुरम आईयूएमएल

2017 गुरदासपुर कांग्रेस

2017 श्रीनगर जेकेएनसी

2018 अलवर कांग्रेस

2018 अजमेर कांग्रेस

2018 उलबेरिया टीएमसी

2018 गोरखपुर सपा

2018 फूलपुर सपा

2018 अररिया राजद

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