ई-अटेंडेंस : शिक्षकों को नेट पैक के लिए हर माह मिलेंगे 100 रुपए
जबलपुर। शिक्षक, अध्यापक, कर्मचारियों को ई-अटेंडेंस हर हाल में लगानी ही होगी। नेट पैक, नेटवर्क, स्मार्ट फोन न होने का बहाना भी अब नहीं चलेगा।
स्कूल शिक्षा विभाग ने ई-अटेंडेंस लगवाने शिक्षक, कर्मचारियों को स्कूलों को मिलने वाले सालाना खर्च से ही शिक्षक, कर्मचारियों को नैट पैक डलवाने 100-100 रुपए देने की मंजूरी दे दी है। साथ ही ये सुविधा भी दी है कि जिनके पास स्मार्ट फोन नहीं हैं या खराब हो गए हैं, ऐसे शिक्षक, कर्मचारी अपने शिक्षक मित्र व संस्था प्रमुख के स्मार्ट फोन से ई-अटेंडेंस लगा सकेंगे।
बता दें कि अधिकांश शिक्षक, कर्मचारी नेट पैक न मिलने या स्मार्ट फोन न होने का हवाला देकर ई-अटेंडेंस लगाने से बच रहे थे। हालांकि, ई-अटेंडेंस की व्यवस्था 100 फीसदी कब तक लागू हो पाएगी, इसका जवाब अफसरों के पास भी नहीं है। क्योंकि अभी रजिस्टर में हस्ताक्षर करने का ऑप्शन भी शिक्षकों-कर्मचारियों के लिए खुला है इसलिए वे एम शिक्षा मित्र से अटेंडेंस नहीं लगा रहे हैं।
यही कारण है कि तीन महीने पहले 60 फीसदी शिक्षकों ने ई-अटेंडेंस लगाई थी जो इस महीने घटकर 45 फीसदी रह गई है। दूसरी तरफ कूल शिक्षा विभाग के सचिव शोभित जैन ने निर्देश दिया है कि डीईओ, डीपीसी संयुक्त रूप से जांच कर 16 जुलाई तक ये रिपोर्ट दें कि किन गांवों में स्कूल हैं लेकिन नेटवर्क नहीं जिससे वहां नेटवर्क की व्यवस्था की जा सके।
ये भी किया जरूरी
-शिक्षक से लेकर अधिकारी यहां तक की डाइट के सभी कर्मचारियों को लगानी ई-अटेंडेंस
-यदि कोई शिक्षक, कर्मचारी, जनशिक्षक फील्ड में है तो भी ऑन ड्यूटी के आप्शन में बताना होगा।
– छुट्टी का आवेदन संस्था प्रमुख को पहले देना होगा, फिर एम शिक्षा मित्र में भी अप्लाई करना होगा।
– स्कूल में बच्चों की उपस्थिति भी एम शिक्षा मित्र में होगी दर्ज।
60 प्रतिशत लगाते थे ई-अटेंडेंस, घटकर 45 प्रतिशत हो गई संख्या
– 6700 शिक्षक, कर्मचारी हैं रजिस्टर्ड
– 4020 यानी करीब 60 प्रतिशत शिक्षक, कर्मचारियों ने अपै्रल माह में ई-अटेंडेंस लगाई
– 3015 यानी करीब 45 प्रतिशत ही अब लगा रहे ई-अटेेंडेंस
ई-अटेंडेंस में ये आ रही समस्या
-जिले के कुंडम के तिलसानी, मोहनी,हरदुलीकला,बरगी के हाथीडोल सहित अन्य ग्रामीण क्षेत्रों में नेटवर्क नहीं मिलने की समस्या।
-कुछ गांव ऐसे हैं जहां एक कंपनी का नेटवर्क है लेकिन शिक्षकों ने दूसरी कंपनी की सिम ले रखी है।
-एम शिक्षा मित्र में तकनीकी गड़बड़ी के चलते स्कूल पहुंचकर अटेंडेंस लगाने वालों की दूरी स्कूल से 4 से 40 किमी दूर प्रदर्शित होती है।
-कुछ ब्लॉकों में सुबह 10:30 बजे अटेंडेंस लगाकर चेक इन करने वाले शिक्षकों की अटेंडेंस 11 बजे लगती है। जबकि शाम 4:30 बजे चेक आउट करने पर 1 बजे ही चेक आउट होना प्रदर्शित होता है।
ऐसे सुधारेंगे व्यवस्था
-पहली बार एम शिक्षा मित्र में जब लॉगिन करेंगे तभी इंटरनेट की जरूरत पड़ेगी। इसके बाद नेटवर्क न होने पर ऑफलाइन मोड में भी अटेंडेस लगा सकेंगे। जब नेटवर्क मिलेगा, अटेंडेंस रिपोर्ट सर्वर में फीड हो जाएगी।
-जहां नेटवर्क कनेक्टिविटी नहीं, वहां की जानकारी बुलवाकर करेंगे वेरीफिकेशन। नेटवर्क की व्यवस्था कराएंगे।
-9 से 16 जुलाई तक जिले से लेकर ब्लॉक स्तर पर प्राचार्य,बीईओ,बीआरसी,जनशिक्षक सहित शिक्षकों को प्रशिक्षण दिया जाएगा।
-इसी दौरान ही सभी के स्मार्ट फोन में एम शिक्षा मित्र एप डाउनलोड करवाए जाएंगे।
नेट पैक में 6 लाख हर माह होंगे खर्च
जिले में करीब 6700 शिक्षक, अध्यापक, कर्मचारी पदस्थ हैं। नेट पैक डलवाने में शिक्षा विभाग के करीब 6 लाख रुपए खर्च होंगे।
इनका कहना है
ई-अटेंडेंस को शत प्रतिशत प्रभावी बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं। नेट पैक के लिए स्कूल ग्रांट से 100-100 रुपए व्यय करने की मंजूरी भी दे दी है। अधिकारी से लेकर शिक्षकों का ई-अटेंडेंस के संबंध में प्रशिक्षण देने कहा गया है। जहां जो समस्या रही है उसे भोपाल स्तर से दूर किया जाएगा।
-हेमंत खुहटानिया, जिला प्रभारी, एम शिक्षा मित्र

