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इंदौर व भोपाल की सेंट्रल जेल में सबसे ज्‍यादा कैदी HIV संक्रमित, हाई रिस्‍क में किन्नर

भोपाल। ट्रांस जेंडर (किन्नर) और कैदी एचआईवी/एड्स के हाई रिस्क में हैं। मप्र समेत विभिन्न् राज्यों मेंं इनकी जांच के बाद पॉजीटिविटी ज्यादा मिली है। इनसे संक्रमण फैलने की आशंका के मद्देनजर इन्हें हाई रिस्क ग्रुप (एचआरजी) घोषित किया गया है।

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नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गनाइजेशन (नाको) की एक्शन प्लान की अप्रैल में हुई बैठक में यह निर्णय लिया गया है। एचआरजी घोषित होने के बाद अब इनकी नियमित जांच व काउंसलिंग की जाएगी। बीमारी से बचने के उपाय बताए जाएंगे। सेवाएं दी जाएंगी। यह सब करने से इनके बीच बीमारी फैलने से रोका जा सकेगा। नाको के निर्देश के बाद मप्र में इस पर अमल भी शुरू हो गया है।

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मप्र स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी के अफसरों ने बताया कि मध्यप्रदेश की जेलों में इस साल जनवरी से पहले तक 42 कैदी एचआईवी/एड्स से संक्रमित पाए गए थे। कैदियों के बीच पॉजिटिवटी की आशंका ज्यादा होने पर सोसायटी ने सभी जिलों में 30 हजार कैदियों की एचआईवी जांच कराई।

इनमें 131 नए रोगी मिले। 81 यौन संचारी रोगों से पीड़ित मिले। सबसे ज्यादा इंदौर व भोपाल की सेंट्रल जेल में कैदी एचआईवी संक्रमितत मिले थे। बता दें कि जेलों में करीब 33 हजार कैदी हैं। जांच अभियान के कुछ दिन पहले ही 3 हजार कैदियों की जांच की गई थी, इसलिए उनकी जांच नहीं की गई।

इसी तरह से किन्न्रों के संक्रमित होने की आशंका पर उनकी भी जांच की गई। मध्यप्रदेश्ा में 60 की जांच में चार संक्रमित मिले हैं। इनकी जांच के लिए इनके बीच के ही कुछ लोगों पियर ग्रुप बनाया गया है। इन्हीं की मदद से जांच की गई। अब सभी की एक बार टेस्टिंग करने की तैयारी है।

प्रदेश में मौजूदा एचआरजी के लोगों की संख्या (गैर सरकारी संगठनों द्वारा कराए गए सर्वे के अनुसार )

फीमेल सेक्स वर्कर- 28 हजार

एमएसमएम – 9 हजार

सिरिंज से नशीली दवाएं लेने वाले (आईडीयू)- 8 हजार

ट्रकर्स- 80 हजार

रोजगार के लिए एक-दूसरे जगह जाने वाले (माइग्रेंट)- आंकड़े नहीं बने

टीबी को एचआईवी/एड्स के साथ किया शामिल

एड्स कंट्रोल प्रोग्राम के साथ अब टीबी को भी जोड़ा जा रहा है। जल्द ही दोनों को एक प्रोग्राम के तहत लाया जाएगा। इसके साथ ही नेशनल एड्स कंट्रोल आर्गनाइजेशन (नाको) का नाम नेशनल एड्स एवं टीबी कंट्रोल आर्गनाईजेशन (नाटको) हो जाएगा। मप्र स्टेट एड्स कंट्रोल सोसायटी के अफसरों ने बताया कि एड्स रोगियों को टीबी होने का 6 गुना ज्यादा खतरा रहता है। एक प्रोग्राम में आने के बाद एचआईवी मरीजों की टीबी व टीबी मरीजों की एचआईवी जांच हो सकेगी। इसके अलावा उनके इलाज में भी आसानी होगी।

प्रदेश में अब तक पॉजीटिव-53 हजार

एआरटी सेंटर्स में दवा ले रहे मरीज- 24 हजार

अब तक मौत- 11 हजार

सात साल के लिए बनाया एक्शन प्लान

मप्र एड्स कंट्रोल सोसायटी के अफसरों ने बताया कि अभी तक हर साल के लिए एक्शन प्लान बनाया जा रहा था, पर अब 7 साल (2017-24) के लिए एक्शन प्लान तैयार किया जा रहा है। इसमें टेस्टिंग की सुविधा गांव स्तर तक पहुंचाने पर फोकस है।

इनका कहना है

ट्रांस जेंडर व कैदियों को उच्च जोखिम में मानते हुए उन्हें अलग अलग श्रेणी में रखा गया है। उनकी नियमित जांच व निगरानी की जाएगी।

उमेश कुमार प्रोजेक्ट डायरेक्टर, मप्र स्टेट एंड्स कंट्रोल सोसायटी

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