मोदी सरकार के दलित मंत्री ने कहा- सवर्णों को भी मिले आरक्षण

इंदौर। देश में दलित नेता के तौर पर पहचान रखने वाले मोदी सरकार के मंत्री ने सामान्य वर्ग के लिए भी आरक्षण लागू करने की सिफारिश की है। केंद्रीय सामाजिक न्याय एवं अधिकारिता मंत्री रामदास अठावले ने कहा कि ब्राह्मण-क्षत्रिय जैसे सामान्य वर्ग के लिए भी 25 प्रतिशत आरक्षण लागू होना चाहिए। उनके मुताबिक वे अपनी ओर से यह सुझाव प्रधानमंत्री तक पहुंचा भी चुके हैं।
अठावले ने सवर्ण आरक्षण का फॉर्मूला सुझाते हुए कहा कि इसके लिए अधिकतम आरक्षण की सीमा को बढ़ाकर 75 फीसदी तक ले जाना होगा। 25 प्रतिशत अतिरिक्त आरक्षण के दायरे में वे जातियां आएं जो अब तक एससी-एसटी और ओबीसी आरक्षण से अलग हैं। आखिरी में 25 फीसदी सीटें अनारक्षित और सबके लिए खुली होंगी। पत्रकार वार्ता में केंद्रीय मंत्री ने साफ कहा कि समाज में दलित बनाम गैरदलित विवाद की स्थिति आरक्षण के कारण उपजी है। दलितों पर अत्याचार के पीछे जो कारण हैं उनमें यह भी एक कारण है। जिन्हें आरक्षण नहीं मिल रहा ऐसी जातियों में भी कई वंचित लोग हैं। उनकी पीड़ा है कि उन्हें मौका नहीं मिल रहा।
केंद्रीय मंत्री ने सुझाव दिया कि मैंने इन वर्ग के लोगों से भी कहा कि वे दलित आरक्षण का विरोध न करें। उन्हें क्या चाहिए इस पर बात करें। यदि ऐसे वंचित सवर्णांे के लिए आरक्षण लागू होता है तो वर्ग संघर्ष और विवाद खत्म हो सकता है। अठावले ने आर्थिक आधार पर आरक्षण लागू होने की संभावना से स्पष्ट इनकार करते हुए कहा कि देश में दलितों के लिए जाति आधार पर आरक्षण खत्म नहीं हो सकता। न ही दलितों को आरक्षण में क्रीमिलेयर की सीमा में बांधा जा सकता है।
बाबा साहब का रंग नीला, मूल में भगवा
उत्तरप्रदेश में डॉ.आंबेडकर की प्रतिमा का रंग भगवा करने को अठावले ने गलत बताया। रिपब्लिक पार्टी ऑफ इंडिया के अध्यक्ष और मोदी सरकार में मंत्री अठावले ने कहा कि बाबा साहब का रंग नीला ही है। वो कभी भगवा नहीं हो सकता। यूपी में कुछ लोगों ने ज्यादा दिमाग चलाने की कोशिश की। नई प्रतिमा को भगवा रंगने की कोशिश की लेकिन उन्हें समझ में आ गया कि दलित लोग भगवा पसंद नहीं करते तो फिर नीला कर दिया। अठावले ने कहा कि असल में देखा जाए तो हम लोग भगवा वाले ही हैं। क्योंकि बौद्ध धर्म में भिक्षुओं के वस्त्रों का रंग भगवा ही होता है। लेकिन बाद में नीले रंग वाले बन गए। यह बात ठीक है लेकिन बाबा साहब का रंग कभी भगवा नहीं हो सकता।
विरोध की आग में कांग्रेस का तेल
बीते दिनों देश में हुए दलित विरोध और हिंसा पर अठावले ने कहा कि कांग्रेस ने विरोध की आग में तेल डाला। सुप्रीम कोर्ट में याचिका महाराष्ट्र के व्यक्ति के मामले में लगी थी। कोर्ट ने व्यक्ति के मामले की बजाय अनुसूचित जाति-जनजाति अधिनियम पर सरकार को डायरेक्शन दे दिए। उसी से विवाद पैदा हुआ।
उनके अनुसार सरकार दलितों पर अत्याचार रोकने के लिए किसी भी कीमत पर एक्ट की मूल भावना की रक्षा के लिए सक्षम है। जरूरी हुआ तो संसद के जरिए कार्रवाई होगी। कोर्ट का संसद द्वारा बनाए कानून पर न्याय देना है न की उसमें बदलाव की सिफारिश करना। भाजपा के दलित सांसदों की चिट्ठी पर उन्होंने कहा कि दलितों की भावना देखकर उन्होंने पत्र लिखा होगा। यह भाजपा को देखना चाहिए कि उसके सांसद अनुशासनहीनता न करें।







