
भोपाल। मप्र-छग के ऐसे हजारों करदाता आयकर विभाग के राडार पर आ गए हैं, जिन्होंने दो साल पहले नोटबंदी के दौरान अनुपातहीन नकदी बैंकों में जमा कराई थी। साथ ही कारोबार में लाखों-करोड़ों रुपए का हिसाब एडजस्ट किया था।
नोटबंदी के दौरान जमा राशि का हिसाब नहीं दे पाए तो बेनामी हो जाएगी नकदी
विभाग ने 30 सितंबर तक करदाताओं से जवाब मांगा था। अब संदिग्ध लेनदेन के मामलों में छानबीन शुरू कर दी है। दोनों राज्यों में ‘ऑपरेशन क्लीन मनी’ के तहत करीब 20 हजार लोग चिन्हित किए गए थे। नोटबंदी के दो साल बाद आयकर विभाग अपना चाबुक चलाएगा। 30 सितंबर तक जो लोग रिटर्न दाखिल कर चुके हैं, उनके जवाब से विभाग संतुष्ट नहीं हुआ, तो जुर्माने और अभियोजन की कार्रवाई तय है।
इसके अलावा अनुपातहीन नकदी को बेनामी संपत्ति के दायरे में मान लिया जाएगा। आयकर विभाग वित्त वर्ष 2017-18 में असेसमेंट करने के बाद उनके जवाबी दस्तावेजों की स्क्रूटनी भी कर चुका है।
आयकर ने जुटाए आंकड़े
केंद्र सरकार ने 8 नवंबर 2016 की रात नोटबंदी की घोषणा कर 1000 और 500 रुपए के नोटों को चलन से बाहर कर दिया था। इसके बाद 50 दिन तक जिन लोगों ने बैंकों में पुराने नोटों के रूप में लाखों करोड़ों रुपए की राशि जमा हुई, उसका ब्योरा विभाग ने जुटा लिया है। जिन लोगों ने अचानक बड़े लेन-देन किए उन्हें टारगेट पर रखा है। उनके पिछले रिटर्न और बैलेंसशीट से नोटबंदी के दौरान लेनदेन की तुलना के बाद अनुपातहीन नकदी तय की गई है।
ये भी जांच के दायरे में:
नोटबंदी में सबसे ज्यादा और बड़ी राशि कार्पोरेट पेन नंबर वालों ने जमा कराई। बैंकों में ऐसे लोगों ने कई किस्तों में बड़ी रकम जमा करने भेजी। बाजार में ज्वैलरी, लग्जरी गाड़ियां खरीदने वाले भी सवालों के दायरे में हैं।
बाद में भी खुल सकता है केस:
सूत्रों का कहना है कि विभाग चाहे तो बाद में भी धारा 148 का नोटिस देकर छह साल का लेखा-जोखा जांच में ले सकेगा। सितंबर 2019 तक विभागीय छानबीन चलेगी। जनधन के खाते में भी अचानक हजारों रुपए नकद जमा हुए तो भी पूछताछ हो रही है।
जवाब का होगा परीक्षण
30 सितंबर तक विभाग ने नोटिस के जवाब मांगे थे। अब इन सभी का परीक्षण कर नियमानुसार कार्रवाई होगी। सांच को आंच नहीं, हिसाब में सबकुछ स्पष्ट हो जाता है।
- पतंजलि झा, प्रधान निदेशक, आयकर इन्वेस्टीगेशन विंग मप्र








