आम दिनों की तरह ही ऑफिस पहुंचे #MeToo आरोपों से घिरे अकबर, इस्तीफे पर विवाद जारी
#MeToo अभियान। #MeToo अभियान के तहत यौन शोषण के आरोप झेल रहे एमजे अकबर ने इस्तीफा देने से इनकार कर दिया है. इस्तीफा नहीं देने पर जारी विवाद के बीच वह सोमवार को सामान्य दिनों की तरह ही अपने ऑफिस पहुंचे. यहां वह कई अहम बैठकें लेने वाले हैं. ऑफिस के लिए रवाना होते वक्त अकबर अपने सरकारी आवास के बाहर जमे पत्रकारों के सवालों का जवाब देने से बचते नजर आए.
अकबर रविवार को ही नाइजीरिया से भारत लौटे हैं. भारत लौटने के बाद उन्होंने खुद पर लगे आरोपों को झूठा और मनगढ़ंत करार दिया है. उन्होंने कहा कि वह उन महिलाओं के खिलाफ कड़ी कानूनी कार्रवाई करने वाले हैं जिन्होंने उनके खिलाफ आरोप लगाए हैं.
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नाइजीरिया से उनके वापस लौटने के कुछ देर बाद खबर आई थी कि उन्होंने ईमेल के जरिए अपना इस्तीफा भेज दिया है. हालांकि बाद में उन्होंने आरोपों को झूठा बताते हुए इस्तीफा देने से इनकार कर दिया.
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एमजे अकबर पर करीब 15 महिला पत्रकारों ने यौन शोषण और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए हैं. इन आरोपों को राजनीतिक करार देते हुए अकबर ने कहा कि अगले साल होने वाले चुनावों की वजह से उन पर इस तरह के आरोप लगाया जा रहे हैं. इस तरह के आरोप सामने आते ही विपक्षी पार्टियां लगातार अकबर के इस्तीफे की मांग कर रही हैं.
अकबर ने रविवार को अपनी सफाई देते हुए कहा, ‘मुझपर लगे आरोप गलत, मनगढ़ंत और आधारहीन हैं. इससे मेरी इमेज को बहुत नुकसान पहुंचा है. आम चुनावों से कुछ महीने पहले ही ये तूफान क्यों उठा है? क्या यह कोई एजेंडा है?आप जज हैं. ये झूठे और बेबुनियाद आरोप लगाए जा रहे हैं, ताकि मेरी प्रतिष्ठा को नुकसान पहुंचाया जा सके.’ उन्होंने कहा, ‘झूठ के पांव नहीं होते, लेकिन इसमें जहर होता है. जिससे उन्माद फैलाया जा सकता है. ये आरोप परेशान करने वाले हैं.’
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कांग्रेस ने मांगा इस्तीफा
एमजे अकबर के बयान पर पलटवार करते हुए कांग्रेस ने सवाल किया, ‘अकबर कौन से जनाधार वाले नेता हैं और एक राजनेता के तौर पर उनकी छवि कुछ भी नहीं है.’ कांग्रेस प्रवक्ता टॉम वडक्कन ने कहा, ‘अकबर पर लगे आरोपों के पीछे कोई भी राजनीतिक साजिश नहीं है और अगर बीजेपी इन्हीं कैबिनेट से बाहर नहीं करती है तो उसे महंगा पड़ेगा.’