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आटो के पहिए थमेः लोग परेशान

कटनी। यातायात व परिवहन विभाग की बेतहाशा चालानी कार्रवाई के कारण आटो चालकों के अंदर पनप रहा आक्रोश का ज्वालामुखी आज हड़ताल के रूप में बाहर आ गया। कार्रवाई से परेशान होकर आटो चालकों ने आज सुबह से अनिश्चित कालीन हड़ताल शुरू कर दी। आटो चालको की हड़ताल के कारण आज सुबह से ही शहर में लोग परिवहन सेवा को तरस गए और परेशानियों भरा सफर करने को मजबूर हुए। उधर आटो चालकों की हड़ताल की जानकारी लगते ही पुलिस अधीक्षक अतुल सिंह से निर्देश लेकर नगर पुलिस अधीक्षक शशिकांत शुक्ला, कोतवाली प्रभारी शैलेष मिश्रा व यातायात प्रभारी लवली सोनी हड़ताल में शामिल आटो चालकों को समझा बुझाकर हड़ताल समाप्त करवाने स्टेशन पहुंच गए। जहां काफी समझाइश के बाद भी आटो चालक नहीं माने और अपनी मांगों को लेकर अड़े रहे।

गौरतलब है कि बीते दिनों पुलिस अधीक्षक अतुल सिंह के निर्देश पर यातायात पुलिस व परिवहन विभाग ने मिलकर आटो चालकों के विरूद्ध जमकर कार्रवाई की थी और रूट सिस्टम प्रणाली का पालन न करने वाले आटो सहित बिना परमिट शहर की सड़कों पर दौड़ रहे आटो चालकों के विरूद्ध बेतहाशा चालानी कार्रवाई की थी। आटो चालकों पर 3 हजार, 5 हजार व उससे भी अधिक जुर्माना लगाया गया था। बताया जाता है कि यातायात पुलिस व परिवहन विभाग की इसी कार्रवाई को लेकर आटो चालकों के बीच आक्रोश का ज्वालामुखी बनना शुरू हो गया था, जो आज अनिश्चितकालीन हड़ताल के रूप में सामने आ गया। हड़ताल में शामिल आटो चालकों ने यातायात पुलिस व परिवहन विभाग पर नियम विरूद्ध चालानी कार्रवाई करने का आरोप लगाया। आटो चालकों का कहना था कि वो शहर को बेहतर परिवहन सेवा उपलब्ध कराते हुए मंहगाई के इस दौर में आटो चलाकर अपना व अपने परिवार का भरण पोषण कर रहे हैं लेकिन बेतहाशा चालानी कार्रवाई से उनकी कमर टूट रही है और जुर्माना अदा करने उन्हे कर्जा तक लेना पड़ रहा है। आटो चालकों का कहना है कि उनकी मांगें जब तक नहीं मानी जाएंगी तब तक हड़ताल जारी रहेगी। बहरहाल आटो चालकों की हड़ताल का असर आज शहर की परिवहन सेवा में देखने को मिला। जिसमें लोग परिवहन सेवा को तरसते देखे गए।
बस स्टेण्ड व साउथ स्टेशन में दिखा सबसे ज्यादा असर
आटो चालकों की हड़ताल का सबसे ज्यादा असर साउथ स्टेशन व बस स्टेण्ड में देखने को मिला। बस स्टेण्ड व साउथ स्टेशन आने व जाने वालों को आज आटो न मिलने के कारण भारी परेशान होना पड़ा। लोग लिफ्ट लेकर या फिर दूसरे साधनों से बस स्टेण्ड व साउथ स्टेशन आना-जाना किया। वहीं बाहर से यात्री पैदल ही साउथ स्टेशन व बस स्टेण्ड आते-जाते देखे गए।
साइकल रिक्शों का रहा सहारा
उधर आटो चालकों की हड़ताल के चलते लोगों को आज साइकल रिक्शों का ही सहारा रहा। रिक्शे वाले सवारियों से मनमाना किराया लेकर उन्हे एक स्थान से दूसरे स्थान छोड़ते देखे गए। बताया जाता है कि आज रिक्शा चालकों ने बस स्टेण्ड व साउथ स्टेशन के 100 रूपए से लेकर 150 रूपए तक वसूले। कुल मिलाकर रिक्शा चालकों ने आज जमकर चांदी काटी।
परिवहन विभाग पर मनमाना टैक्स लेने का आरोप
हड़ताल में शामिल आटो चालकों ने यातायात पुलिस सहित परिवहन विभाग पर मनमाना टैक्स लेने का भी आरोप लगाया। आटो चालकों का आरोप था कि पूरे प्रदेश में आटो चालकों को दिए जाने वाले परमिट का टैक्स निर्धारित होने के बावजूद स्थानीय परिवहन विभाग में पदस्थ एक बाबू मनमाना टैक्स लेता है। जिसके कारण ही आटो चालक परमिट नहीं ले पाते। आटो चालकों ने बताया कि पहले चार महीने का परमिट लगभग साढ़े 6 सौ में बनता था परंतु अब परिवहन विभाग द्धारा चार की बजाय तीन महीने का परमिट दिया जाता है और टैक्स के रूप में 12 सौ से लेकर 15 सौ रूपये वसूल किए जाते हैं। हालांकि यह पहला मौका नहीं है जब परिवहन विभाग पर अनाप-शनाप टैक्स वसूलने के आरोप लगे हो इसके पूर्व स्कूल वाहनों के पंजीयन करने में भी ऐसे आरोप स्कूल संचालक लगा चुके हैं।
कल स्कूली वाहनों की हड़ताल
आज आटो चालकों की अनिश्चित कालीन हड़ताल के बाद कल भी लोगों को परेशान होना पड़ेगा क्योंकि कल 23 जनवरी को कार्रवाई के विरोध में स्कूल वाहनों की हड़ताल रहेगी। डीपीएस बस हादसे के बाद प्रशासन की सख्ती के परिणामस्वरूप जगह-जगह स्कूल बसों की चेकिंग और बसों के फिटनेस रद्द करने से स्कूलों की व्यवस्थाएं बिगड़ गई हैं। इसी के विरोध में एमपी बोर्ड और सीबीएसई स्कूलों ने लामबंद होकर प्रदेशभर में कल 23 जनवरी को स्कूल बंद का एलान किया है। इस निर्णय में कटनी के भी स्कूल शामिल हैं। इसलिए कटनी में भी इस बंद का असर दिखाई देगा। प्रशासन की सख्ती से घबराए एसोसिएशन ऑफ यूनाइडेड सीबीएसई स्कूल्स से संबद्ध स्कूलों के प्राचार्य व प्रबंधन ने पिछले सप्ताह अपनी पीड़ा जाहिर की थी। जिसमें वे सरकार के सभी नियम पालन करना चाहते हैं लेकिन उन्हें पर्याप्त वक्त चाहिए। नए-नए आदेश-निर्देशों का पालन कौन सी एजेंसी करवाएगी यह भी स्कूलों को बताना होगा। प्रशासन के सामने स्कूलों की सुनवाई नहीं हो रही है। स्कूल की ओर से कोई प्रतिनिधि प्रशासन के पास जाता है तो उसे दोषी मानकर टरका दिया जाता है।

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