अरे कितने लोगों को देंगे वोट
रोज आ रहे नये चेहरों से मतदाता हैरान
जबलपुर,यभाप्र। चुनाव की तारीख नजदीक आ रही है। यूं तो 14 नवंबर को नाम वापसी के बाद तस्वीर पूरी तरह से छंटेगी कि कितने उम्मीदवार मैदान में हैं। सभी आठ सीटों पर मुकाबला रोचक है। कहीं त्रिकोणीय तो कहीं चतुष्कोणीय संघर्ष की स्थिति बन रही है। पर प्रचार अभियान चरम पर पहुंचने लगा है। क्योंकि समय बचा नहीं है । ऐसे में फिलहाल जिस भी सीट पर जितने प्रत्याशी मैदान में है उनका प्रयास है कि वे हर मतदाता के घर तक पहं़ुचे। ऐसे में सुबह से देर रात तक मतदाताओं के सामने जिस तरह से प्रत्याशी आ रहे हैं। हर घंटे एक नया चेहरा हाथ जोड़े खड़ा दिखने से वे हैरान परेशान हैं। उनके जेहन में सिर्फ एक ही सवाल तैर रहा है कि ऐसे कितने प्रत्याशी आंएगे। कितनों को वोट देंगे। प्रत्याशियों को इस बार चुनाव प्रचार के लिए कम समय मिल रहा है।
प्रचार के लिए सिर्फ 13 दिन
उन्हें 13 दिन के भीतर पहुंचना किसी चुनौती से कम नहीं। नामांकन पत्रों की जांच के बाद आज नाम वापसी होते ही चुनाव चिन्हों का आवंटन कर दिया जाएगा। इसके साथ ही प्रत्याशी चुनाव प्रचार की रफ्तार बढ़ा देंगे। प्रमुख राजनैतिक दल भाजपा और कांग्रेस के प्रत्याशियों के अलावा निर्दलीय मैदान में किस्मत आजमा रहे प्रत्याशियों को एक पखवाड़े से ही कम समय मिल रहा है। 28 नवम्बर को वोटिंग होना है लिहाजा 26 नवम्बर की शाम से ही शोर शराबे वाला प्रचार बंद हो जाएगा। ऐसी परिस्थति में कुल 13 दिन के भीतर प्रत्याशियों को मतदाताओं तक अपनी बात पहुंचाना है। आचार संहिता के चलते सीमित प्रचार सामग्री के उपयोग के बीच प्रत्याशी मतदाता तक अपनी बात कैसे पहुंचा पाएंगे।
15 से प्रचार की रफ्तार तेज होगी
उल्लेखनीय है कि अब तक कांग्रेस और भाजपा के बैनर, पोस्टर आदि भी नजर नहीं आए हैं अभी पूरा प्रचार सोशल मीडिया पर केन्द्रित है। नाम वापसी के बाद 15 नवम्बर से प्रचार की रफ्तार तेज होगी।
खर्च की सीमा 28 लाख
इस बार विधानसभा चुनाव में प्रत्याशियों को खर्च की सीमा 28 लाख की गई है। इतनी राशि में पोलिंग बूथों के मैनेजमेंट से लेकर कार्यकर्ताओं का खर्च और प्रचार सामग्री का समूचा व्यय भी शामिल है। जाहिर है इतने बड़े क्षेत्र में यह राशि ऊंट के मुंह में जीरा जैसी है। चुनाव दिनों दिन खर्चीला होता जा रहा है। कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने के लिए वाहनों का इंतजाम भी प्रमुख खर्चों में शामिल है, लेकिन कुल मिलाकर बड़े क्षेत्र के मतदाताओं तक प्रत्याशी की सीधी पहुंच आसान नहीं। चुनाव में मतदाताओं की भी अपेक्षा यह होती है कि प्रत्याशी कम से कम एक बार उनके पास आए और अपनी बात रखे। इन अपेक्षाओं के बीच प्रमुख दलों के सामने तो और भी चुनौती है।
‘पोटली खोली तो आयकर करेगा हिसाब-किताब
चुनाव में पैंतरेबाजी कर उपहार, शराब, साड़ी, वाहन के नाम पर वोट मांगा, तो इनकम टैक्स की टीम उपहार का बिल लेकर घर की कुंडी बजाएगी। न केवल रकम का हिसाब-किताब पूछा जाएगा, बल्कि ब्लैक मनी होने पर कार्रवाई भी की जाएगा। दबंग प्रत्याशियों पर निगरानी के लिए आयकर की टुकडिय़ां काम कर रही हैं। विधानसभा चुनाव में धन-बल का उपयोग होने की इत्तला के बाद इनकम टैक्स की टीमें डाटा जुटा रही हैं। चुनाव में दबंग प्रत्याशियों के इलाकों में उपहार के नाम पर शराब, साड़ी, वाहन, इलेक्ट्रॉनिक्स के महंगे उपकरण दिए गए, तो फाइनेंसर का नाम खोज इनकम टैक्स प्रत्याशी के दरवाजे तक पहुंचेगी। खर्च हुई रकम का हिसाब-किताब तो देना ही होगा, धन-बल से मतदान को प्रभावित करने का मुकदमा अलग से झेलना होगा।

