jabalpur

डकैतियों के मामले में पुलिस साबित हो रही फिसड्डी

आधा दर्जन मामलों में अब तक कोई सुराग नहीं
जबलपुर, मुनप्र। हाल ही में बीते सप्ताह गोसलपुर में मंडला में पदस्थ एएसआई के यहां पड़ी डकैती के आरोपियों का अब तक सुराग नहीं लग सका है। जिले में डकैती की यह कोई पहली वारदात नहीं है। इसके पूर्व भी आधा दर्जन डकैतियों के मामले में पुलिस के हाथ खाली ही रहे हैं। यदि गोसलपुर में हुई डकैती के पूर्व की वारदातों पर नजर डाली जाए तो लगभग आधा दर्जन वारदातों में डकैत लाखों के माल पर हाथ साफ कर चुके हैं पर पुलिस के हाथ एक भी वारदातों की कड़ी नहीं जुड़ सकी तो उसे आरोपियों के करीब तक ले जा सके। शहर में हुई डकैती की वारदातों में होटल व्यवसायी व शराब कारोबारी राम अवतार गुप्ता के पड़ी डकैती के आरोपियों का पुलिस आज तक पता नहीं लगा पाई है। वही नगर के प्रतिष्ठित फोटो व्यवसायी केके अग्रवाल के यहां हुई डकैती का भी खुलासा नहीं हो पाया है। महिला उद्यमी पुष्पा बैरी के यहां भी ऐसी ही वारदात को अंजाम दियर गया था लेकिन उन्होंने पुलिस में इसकी रिपोर्ट दर्ज नहीं कराई। कछपुरा के पास एक अधिवक्ता के यहां हुई डकैती की घटना भी बहस बनी है। डकैत पुलिस को चुनौती देते हुए वारदातों को अंजाम दे रहे है। हालांकि वारदातों के बाद आला अधिकारी दावा करते रहे कि जल्द ही डकैत उनकी गिरफ्त में होंगे लेकिन पुलिस की टीमों और क्राइम ब्रांच के प्रयासों के बाद भी यह वारदातें आज भी अनसुलझी हैं।और अब हाल ही में रविवार की रात को गोसलपुर में हुई एएसआई के घर में डकैती वारदात के बाद आसपास के ग्रामीण इलाकों में दहशत है। इस संबंध में जब आज एसडीओपी भावना तिवारी से संपर्क किया गया तो उनका कहना था कि पुलिस और क्राइम ब्रांच की टीमें गंभीरता के साथ आरोपियों का सुराग लगाने में जुटी हैं। उनका कहना है कि पूर्व में इस तरह की वारदात में शामिल रहे आरोपियों के अलावा गोसलपुर और सिहोरा के आसपास के गांव में डेरा डालन वालों पर भी शिकंजा कस कर पतासाजी की जा रही है। एसडीओपी के मुताबिक आरोपियों को शीघ्र ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा। हालांकि पुलिस सूत्रों के मुताबिक एकटीम होशंगाबाद रवाना की गई है। जबकि बाकी टीमें स्थानीय स्तर पर पतासाजी में लगी हैं।

योजना बनाते तो मिल जाते हैं पर ..
जब तक पुलिस के हत्थे डकैती की योजना बनाते हुए बदमाशों की गिरफतारी की तो खबरें प्रकाश में आती रहती हैं लेकिन डकैती की वारदातों के बाद आरोपियों का पकड़ ना जाना पुलिस की कार्यप्रणाली पर सवालिया निशान लगाते हैं।

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