अब छलक कर बाहर आ रहा मेट्रो-शैल्बी से पीड़ितों का दर्द, खबर के बाद सामने आ रहे अनेक मामले
जबलपुर, विशेष प्रतिनिधि। सरकार के निर्देश के बावजूद निजी अस्पतालों में सीजीएचएस मरीजों से पैकेज के बावजूद अतिरिक्त पैसे लेने के मामले अब पीड़ितों के हृदय से छलक कर बाहर आने लगा है। ऐसा ही एक मामला है जागृति नगर करमेता निवासी रामेश्वर प्रसाद प्यासी का जिन्हांने मेट्रो अस्पताल में इलाज कराया था। उनसे पैकेज के अतिरिक्त राशि वसूली गयी थी।
श्री प्यासी ने इसकी शिकायत 10 नवम्बर को अपर निदेशक को थी। उक्त शिकायत पर अपर निदेशक ने मेट्रो अस्पताल के प्रबंधक निदेशक को पत्र क्रमांक 5,26/16 स्था/के स्वायो/जबल/3277-3278 दिनांक 12 नवम्बर 16 को लिखकर लाभार्थी के पैसे वापस करने के निर्देश दिये थे। उक्त पत्र के बाद अस्पताल प्रबंधन ने सीजीएचएस लाभार्थी के पैसे वापस किये थे। जो इस बात का प्रमाण है कि मेट्रो अस्पताल द्वारा जब तब गंभीर पीड़ितों से पैसे वसूले जाते हैं।
ऐसा नहीं कि अस्पताल ने अपर निदेशक के पहले निर्देश पर ही पैसे वापस किए हों। इसके पहले दो बार 8 अगस्त 2016 एवं 5 अक्टूबर 2016 को पत्र लिखा जा चुका था। लेकिन जब अस्पताल प्रबंान पैसे वापस करने में आनाकानी करने लगा तो अपर महानिदेशक ने 12 नवम्बर को पुनः पत्र लिखा तब जाकर पीड़ित के पैसे वापस हुए। ऐसे एक नहीं अनेक मामले हैं जब अपर निदेशक सीजीएचएस के हस्तक्षेप के बाद ही पैसे वापस किए गए। लेकिन ऐसे अनेक पीड़ित हैं जो नियम कानून से वाकिफ नहीं हैं। वे अस्पताल की ज्याादती के शिकार होते रहते हैं।
ऐसा ही एक मामला शैल्बी अस्पताल का सामने आया है। सीओउी कर्मी राजेन्द्र नामदेव की पत्नी संध्या नामदेव को हृदय संबंधी इलाज के लिए शैल्बी अस्पताल में भर्ती किया। भर्ती कराते ही अस्पताल पबंधन ने अनेक कागजों में दस्तखत करा लिए। इसके बाद पीड़ित से बोला गया कि हृदय का ऑपरेशन करना पड़ेगा। जिसके लिए 40 हजार रुपए अलग से लगेंगे। पीड़ित ने कहा कि ठीक है आप हमें इसकी रसीद दे देना ताकि हम इसका रिएम्बर्समेंंट करा सकें। इसके बाद अस्पताल प्रबंधन ने रसीद मांगने पर मौन साध लिया परिणाम यह हुआ कि ऑपरेशन नहीं हुआ और राजेन्द्र की पत्नी 23 अप्रेल को मौत के मुंह में समा गई।
शिकायत के बाद सापस हुए पैसे
जैसा कि अस्पताल प्रबंधन दावा करता है कि सीजीएचएस लाभार्थियों से कोई अतिरिक्त पैसे नही लिये जाते वहीं एडीशनल डायरैक्टर का दिनांक 12 नवम्बर 2016 का पत्र क्रमांक 5,26/16 स्था/के स स्वा यो/जबलपुर 3277-3278 इस बात को प्रमाणित करता है कि लाभार्थी से पैसे लिये गये थे लाभार्थी ये पमाण सहित इसकी शिकायत एडीशनल डायरेक्टर से की थी। तदानुसार एडीशनल डायरेक्टर सीजीएचएस के सस्तक्षेप से ही पीड़ित के पैसे वापस हो सके थे। वह भी जब अपर निदेशक ने तीन बार पत्राचार किया था।

