स्पैम कॉल्स से मिलेगा छुटकारा: TRAI ने सख्त किए नियम, AI रखेगा नजर; बार-बार कॉल की तो 1 साल के लिए होंगे ब्लैकलिस्ट
नई दिल्ली (yashbharat.com): किसी जरूरी मीटिंग या प्रेजेंटेशन के दौरान बजने वाली अनचाही क्रेडिट कार्ड, लोन या प्रॉपर्टी कॉल्स (Spam Calls) से अगर आप भी परेशान हैं, तो आपके लिए राहत की खबर है। भारतीय दूरसंचार विनियामक प्राधिकरण (TRAI) ने अनचाही कमर्शियल कॉल्स और रोबोकॉल्स पर नकेल कसने के लिए नियमों को और सख्त कर दिया है।
अब केवल नंबर ब्लॉक करने से काम नहीं चलेगा, बल्कि फर्जी और स्पैम कॉल्स करने वालों के पूरे कॉलिंग पैटर्न पर टेलीकॉम कंपनियों और एआई (AI) के जरिए सीधी नजर रखी जाएगी।
1. सिर्फ नंबर नहीं, कॉलिंग पैटर्न पर AI रखेगा नजर
नियमों में सबसे बड़ा बदलाव यह किया गया है कि अब सिर्फ यह नहीं देखा जाएगा कि कॉल किस नंबर से आई है, बल्कि यह भी ट्रैक किया जाएगा कि कॉल करने का तरीका क्या है:
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रोबोकॉल और प्री-रिकॉर्डेड मैसेज: रोबोकॉल, ऑटो-डायल्ड कॉल और प्री-रिकॉर्डेड वॉयस मैसेज जैसी कमर्शियल कॉल्स को पूरी तरह से रेगुलेटरी दायरे में लाया गया है।
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AI-बेस्ड स्पैम डिटेक्शन: TRAI और टेलीकॉम कंपनियां (Jio, Airtel, Vi) अब आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग टूल्स का इस्तेमाल कर संदिग्ध कॉलिंग पैटर्न को रियल-टाइम में पहचानेंगी।
2. 10 दिन में 3 शिकायतें मिलीं तो तुरंत होगी जांच
पहले स्पैम कॉल करने वाले किसी नंबर या टेलीमार्केटर पर कार्रवाई के लिए दर्जनों शिकायतों की जरूरत होती थी, लेकिन अब प्रक्रिया को बेहद आसान और सख्त बना दिया गया है:
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यदि किसी नंबर के खिलाफ 10 दिनों के भीतर 3 उपभोक्ताओं (Consumers) की शिकायतें आती हैं और AI सिस्टम भी संदिग्ध गतिविधि का संकेत देता है, तो तुरंत जांच और कार्रवाई शुरू कर दी जाएगी।
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टेलीकॉम कंपनियां संदिग्ध स्पैम नंबरों का डेटा आपस में भी शेयर करेंगी।
3. बार-बार नियम तोड़ा तो 1 साल के लिए होंगे ‘ब्लैकलिस्ट’
अक्सर देखा जाता था कि स्पैम कॉल करने वाले एक नंबर ब्लॉक होने पर तुरंत नया सिम लेकर दोबारा कॉलिंग शुरू कर देते थे।
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नए नियमों के तहत लगातार नियम तोड़ने वाले टेलीमार्केटर्स और कंपनियों को 1 साल तक के लिए ब्लैकलिस्ट कर दिया जाएगा।
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ब्लैकलिस्ट होने के बाद वे किसी भी टेलीकॉम कंपनी से नया कनेक्शन या सेवा नहीं ले सकेंगे।
4. बल्क कॉलिंग पर लगेगा 5 पैसे प्रति मिनट का चार्ज
ऑटोमेटेड कमर्शियल कॉल्स को हतोत्साहित (Discourage) करने के लिए वित्तीय पेनल्टी का प्रावधान भी किया गया है:
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A2P (Application-to-Person) कॉल्स: जब कोई सिस्टम या सॉफ्टवेयर बड़ी संख्या में ऑटोमेटेड कॉल्स करता है, तो टेलीकॉम ऑपरेटरों को इस पर 5 पैसे प्रति मिनट तक का टर्मिनेशन चार्ज लगाने का अधिकार दिया गया है। इससे फर्जी कॉलिंग करने वालों पर वित्तीय बोझ बढ़ेगा।
आम उपभोक्ता के लिए क्या बदलेगा?
अब जब भी आपके पास कोई स्पैम या फर्जी कमर्शियल कॉल आए, तो उसे केवल कट या ब्लॉक न करें, बल्कि अपने फोन में दिए गए ‘Report Spam’ विकल्प का उपयोग करें या टेलीकॉम ऑपरेटर/TRAI के DND ऐप पर शिकायत दर्ज कराएं।
जितनी अधिक शिकायतें दर्ज होंगी, डेटा उतना ही मजबूत होगा और AI सिस्टम के लिए ऐसे फर्जी कॉलर्स के नेटवर्क को ब्लॉक करना उतना ही आसान हो जाएगा।
