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World Sparrow Day 2021: आवास, भोजन और पानी सुलभ हो तो आपके घर और आसपास फिर फुदकेगी गौरेया

World Sparrow Day 2021। सबसे प्यारी चिड़िया गौरेया अब हमारे घर-आंगन और बगीचे में कम ही दिखाई देती है। गौरया को अपने आसपास बुलाने का कर्तव्य हम सबका है, लेकिन यह काम कुछ लोग ही कर रहे हैं।

विश्व गौरैया दिवस के मौके पर ऐसे दो लोगों के प्रयास के बारे में बताया जा रहा है जिन्होंने गौरेया समेत अन्य पक्षियों को उनके अनुकूल घरौंदा देकर उन्हें बचाने की पहल की है। गौरैया व अन्य पक्षियों को बचाने के प्रति जागरूकता बढ़ाने के उद्देश्य से हर साल 20 मार्च को विश्व गौरेया दिवस मनाया जाता है।

दरअसल जलवायु परिवर्तन, मोबाइल टावर का रेडिएशन, शहरीकरण के कारण पक्के मकानों का निर्माण आदि के चलते गौरैया तेजी से विलुप्त हो रही है। यदि हम गौरैया को का आवास, भोजन और पानी की सुलभ करवादें तो यह प्यारी चिड़िया हमारे आंगन में फिर फुदक सकती है।

बॉक्स लगाओ, गौरैया बचाओ अभियान

पक्के मकानों में कोई जगह नहीं होती जहां गौरैया अपना घोंसला बना सके। नीलबड़ निवासी अर्जुन कुमार 10 साल से बॉक्स लगाओ, गौरैया बचाओ अभियान चला रहे हैं। वे जूते के बॉक्स में छोटा सा छेद करके उसको घर की बालकनी में लगा देते हैं और गौरैया उसमें अपना घर बना लेती है। अर्जुन तकरीबन पांच हजार जूते के बॉक्स, घरों सरकारी बिल्डिंगों, स्कूलों में मित्रों व अन्य सहयोगियों की मदद से लगा चुके हैं। वे पहले नई दिल्ली में रहते थे वहीं से उन्होंने इस अभियान की शुरुआत की थी। अब भोपाल में यह काम कर रहे हैं। अर्जुन ने बताया कि बॉक्स लगाने की वजह से नीलबड़ क्षेत्र में गौरैया की संख्या बढ़ी है। अपने घर पर ही उन्होंने 15 बॉक्स लगाए हैं, सभी में गौरैया ने घर बना रखा है। अर्जुन के साथ 20- 25 लोग जुड़े हैं, जो दुकानदारों के यहां से जूते के बॉक्स लाते हैं और घरों में लगाते हैं। बॉक्स, व्यापारियों से उन्हें मुफ्त में मिल जाते हैं। अर्जुन ने बताया कि 20 मार्च को हमारी संस्था ने गौरैया दिवस के उपलक्ष्य में नीलबड़ में एक कार्यक्रम रखा है, जिसमें की लोगों को मुफ्त बॉक्स का वितरण किया जाएगा।

गौरैया के संरक्षण के लिए तैयार किए बर्ड फीडर

गौरैया संरक्षण का ऐसा ही प्रभावी प्रयास किया है नीलम पाटनी ने। वैसे तो वे जयपुर की रहने वाली हैं, लेकिन इन दिनों वे हुनर हाट में बर्ड फीडर लेकर आईं हैं। उन्होंने बताया कि मैंने गौरैया समेत अन्य पक्षियों के घर का निर्माण शुरू किया है। वे नीलिमा लकड़ी के रंगीन पक्षी के घोंसले बनाती हैं। ‘फीड बर्ड्स, सेव बर्ड्स, उनका अभियान है। बर्ड फीडर खुले होते हैं, जबकि घोंसले, जिसमें पक्षी प्रजनन कर सकते हैं वे बंद हो जाते हैं। बर्ड फीडर को किसी भी खुले स्थान पोर्च, बालकनी, बगीचे, आंगन या छत में लटकाया या रखा जा सकता है। इस उत्पाद के लिए नीलमा को कई पुरस्कारों से नवाजा जा चुका है।उन्होंने बताया कि कई खरीदारों ने बर्ड फीडर खरीदा तो उसमें गौरैया आ गईं और उनका अकेलापन काफी हद तक कम हुआ।

Ashutosh shukla

30 वर्षों से निरन्तर सकारात्मक पत्रकारिता, संपादक यशभारत डॉट काम