World Gauraiya Day : सुनाई देने लगी गौरैया की चहचहाट

सीहोर। आज विश्व गौरैया दिवस है। दुनिया भर में 20 मार्च गैरैया संरक्षण दिवस के रुप में मनाया जाता है। 2010 में पहली बार यह दुनिया में गौरैया दिवस मनाया गया। बहुत कम लोगों को मालूम होगा कि इसकी शुरुआत सबसे पहले भारत के महाराष्ट्र से हुई। गौरैया गिद्ध के बाद सबसे संकट ग्रस्त पक्षी है। दुनिया भर में प्रसिद्ध पर्यावरणविद मोहम्मद ई दिलावर नासिक से हैं। वह बाम्बे नेचुरल हिस्ट्री सोसाइटी से जुड़े हैं।

उन्होंने 2008 से गौरैया को बचाने की मुहिम शुरु की। आज यह दुनिया के 50 से अधिक मुल्कों तक पहुंच गई है। गौरैया के संरक्षण के लिए सरकारों की तरफ से कोई खास दिलचस्पी नहीं दिखती है। ऐसे में शरह के पीहू-पीहू हब पर गौरैया का झुंड दिखाई देना एक सुखद खबर है। पीहू-पीहू हब पक्षियों को प्राकृतिक आवास देने का प्रयास था, लेकि न इससे जो परिणाम आए चौकाने वाले हैं। यहां विलुप्त हो रही गौरैया का 100 पक्षियों का झुंड है।

पीहू-पीहू को विकसित करने वाले शिक्षकों में से ही संजय सक्सेना और सतीश त्यागी ने बताया कि हमारे बचपन में घरों की घत और आंगन में चहचहाने वाली गौरैया अब हमारे घर नहीं आती। गौरैया हमसे लगातार दूर होती जा रही है और कई क्षेत्रों में तो अब ये देखने को भी नहीं मिलती।

लेकिन थोड़े से प्रयास ही गौरैया को वापस घरों तक ला सकते हैं। पहले पक्षियों के लिए कृत्रिम आवास बनाने होंगे। फिर वो खुद जगह बना लेती है। घरों में गौरैया के रहने के लायक जगह ही नहीं रही। पीहू-पीहू हब पर भी पहले यही कि या गया। कुछ घोंसले बांस और लकड़ी के बनाए थे। जो अब वहां नहीं हैं।

इसके साथ ही पौधे भी लगाए थे। जो पेड़ बन चुके हैं। यहां लोग अनाज डालते हैं। पानी के लिए सकोरे और बर्तन रखे हैं। यहां गौरैया के साथ ही अन्य पक्षी भी बड़ी संख्या में दिखाई देने लगे हैं। इससे पहले गौरैया का झुंड सिर्फ गणेश मंदिर पर ही दिखाई देता था। साथ ही इक्का-दुक्का सड़क कि नारे झाडिय़ों में देखी जाती है।

गौरैया के बारे में कु छ रोचक

गौरैया दिवस 20 मार्च 2010 को नेचर फाइबर सोसायटी ने मनाया।

गौरैया का जीवन काल 11 से 13 वर्ष होता है।

यह समुद्र तल से 1500 फीट ऊपर तक पाई जाती है।

गौरैया पर्यावरण में कीड़ों की संख्या को कम करने में मदद करती है।

ऐसे बुलाएं गौरैया को

अपने घर की छत पर गत्ते के डिब्बे, मटके , लकड़ी या प्लास्टिक के घर बनाएं। इन्हें बिल्ली, कुत्तों से दूर रखे। धीरे-धीरे यह खुद जगह बना लेंगे। गौरैया के लिए बारिक दाना और पानी की व्यवस्था करें।

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