One Nation One Election: 2029 में लागू करने की तैयारी तेज, JPC की बैठक में विपक्ष के तेवर सख्त; जानिए क्या हैं फायदे और चुनौतियां
One Nation One Election: Preparations to implement it by 2029 intensify; Opposition takes a tough stance at the JPC meeting; here’s a look at the benefits and challenges
One Nation One Election: 2029 में लागू करने की तैयारी तेज, JPC की बैठक में विपक्ष के तेवर सख्त; जानिए क्या हैं फायदे और चुनौतियां
नेशनल डेस्क (यश भारत): देश में ‘एक देश-एक चुनाव’ (One Nation-One Election) को लागू करने को लेकर प्रशासनिक और विधायी स्तर पर गतिविधियां तेज हो गई हैं। 129वें संविधान संशोधन विधेयक पर संयुक्त संसदीय समिति (JPC) की लगातार बैठकें जारी हैं। सोमवार को समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी की अध्यक्षता में आयोजित बैठक में कांग्रेस नेता पी. चिदंबरम, प्रियंका गांधी, टीएमसी सांसद सागरिका घोष और एनसीपी (शरद पवार) की सांसद सुप्रिया सुले सहित कई प्रमुख विपक्षी नेताओं ने शिरकत की।
JPC बैठक और 2029 का रोडमैप
2029 में लागू होने की संभावना: समिति के अध्यक्ष पी.पी. चौधरी के अनुसार, अधिकांश हितधारक (Stakeholders) एक साथ चुनाव कराने के पक्ष में हैं। यदि राजनीतिक इच्छाशक्ति हो तो इस व्यवस्था को 2034 की जगह 2029 के आम चुनावों से ही लागू किया जा सकता है।
ऐतिहासिक संदर्भ: भारत में 1952, 1957, 1962 और 1967 तक लोकसभा और सभी विधानसभाओं के चुनाव एक साथ ही आयोजित होते थे। 1967 के बाद विभिन्न राज्यों में समय से पहले विधानसभाएं भंग होने और राष्ट्रपति शासन लागू होने से यह क्रम टूट गया था।
राज्यों के विधानसभा कार्यकाल पर प्रभाव
यदि 2029 में ‘वन नेशन-वन इलेक्शन’ लागू किया जाता है, तो विभिन्न राज्यों के कार्यकाल को समायोजित करने के लिए कटौती करनी होगी:
2028 में चुनाव वाले राज्य (9 राज्य): मध्य प्रदेश, राजस्थान, छत्तीसगढ़, कर्नाटक, तेलंगाना आदि राज्यों की विधानसभाओं को 5 साल के बजाय केवल 1 साल बाद (2029 में) ही भंग करना होगा।
2027 में चुनाव वाले राज्य (7 राज्य): उत्तर प्रदेश, गुजरात, पंजाब, उत्तराखंड आदि के कार्यकाल में 3 साल की कटौती करनी होगी।
2026 में चुनाव वाले राज्य (5 राज्य): पश्चिम बंगाल, तमिलनाडु, असम, केरल आदि में कार्यकाल 2 साल पहले समाप्त करना होगा।
2029 में चुनाव वाले राज्य (8 राज्य): महाराष्ट्र, हरियाणा, झारखंड, ओडिशा, आंध्र प्रदेश आदि राज्यों के चुनाव चक्र पर इसका कोई विपरीत प्रभाव नहीं पड़ेगा।