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रेलवे कर्मचारी संगठन मान्यता चुनाव में वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ विजयी

वेस्ट सेंट्रल रेलव एम्पलाइज यूनियन का सूपड़ा साफ

कटनी। पश्चिम मध्य रेलवे(पमरे)में कर्मचारी यूनियन की मान्यता के लिए हुए चुनाव का परिणाम आ गया है। वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ(डब्ल्यूसीआरएमएस) चुनाव चिन्ह गाय(गौमाता) मान्यता पाने में कामयाब रही। रेलवे में मान्यता के लिए 11 साल बाद चुनाव कराया गया। गौरतलब है कि इसी माह की 4, 5 व 6 दिसम्बर को संपन्न हुए रेलवे कर्मचारी संगठन के मान्यता चुनाव में इस बार बड़ा उलट फेर हुआ है। इस चुनाव में जबलपुर, भोपाल एवं कोटा मंडल तथा कोटा मंडल के दोनों कारखानों के कर्मचारियों द्वारा कुल 44,946 वैध मत डाले गए थे। जिसमें वेस्ट सेंट्रल रेलवे मजदूर संघ(डब्ल्यूसीआरएमएस) चुनाव चिन्ह गाय(गौमाता) ने सर्वाधिक मत प्राप्त करते हुए न सिर्फ मान्यता को सुरक्षित रखने में कामयाब रही बल्कि इतिहास रचते हुए अस्तित्व में रहने वाली पमरे की इकलौती यूनियन बन गई है जबकि वेस्ट सेंट्रल रेलवे एम्पलाईज यूनियन(डब्ल्यूसीआरईयू) चुनाव चिन्ह लैम्प का सूपड़ा साफ हो गया है। सूत्रों की मानें तो चुनाव परिणाम की घोषण के पश्चात मजदूर संघ के पाले में रहे रेलकर्मचारी यह कहने से नहीं चूके कि गाय ने लैम्प को बुझा दिया। बहरहाल प्राप्त जानकारी के अनुसार 11 वर्ष के बाद हुए मान्यता चुनाव में इस बार मजदूर संघ ने 40.1 प्रतिशत वोट हासिल किये वहीं एम्पलाईज यूनियन को 32.77 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए। यानिकी मान्यता में बने रहने के लिए जितने वोट चाहिए थे उतने नहीं मिले। जिसके चलते एम्पलाईज यूनियन को बाहर होना पड़ा। बताया जाता है कि चुनाव में शामिल रहीं पमरे कर्मचारी परिषद को 10.30 प्रतिशत व पमरे रेल वर्कस यूनियन को 16.47 प्रतिशत वोट प्राप्त हुए।

खुशी से झूम उठे समर्थक

परिणाम आने के बाद मान्यता मिलने से उत्साहित समर्थक खुशी से झूम उठे। एक-दूसरे से गले मिलकर बधाई दी। मिठाई बांटी गई। ढोल-नगाड़े की धुन पर जमकर नाचे। हारने वाली यूनियनों के पदाधिकारी समीक्षा में जुट गए।

किसे मिलती है मान्यता

रेलवे में कर्मचारियों के हित में कई ट्रेड यूनियनें काम करती हैं। लेकिन जिस यूनियन की मान्यता होती है, वही आधिकारिक रूप से अपनी बात रख सकती है। उसी को रेलवे की ओर से बैठकों में बुलाया जाता है। कुल मतों का 35 प्रतिशत या डाले गए मतों का 30 प्रतिशत पाने वाली यूनियन ही मान्यता प्राप्त घोषित की जाती है। यदि दो यूनियनें भी इतने वोट पा सकीं तो दोनों को मान्यता दी जाती है। हालांकि इस चुनाव में कोई अन्य संगठन यह कमाल नहीं कर पाया है।

हार से होगा नुकसान

बताया जाता है कि मान्यता प्राप्त करने में विफल रही एम्पलाईज यूनियन से रेलवे द्वारा दिए गए कार्यालय की सुविधा छिन जाएगी। पदाधिकारियों को मिलने वाले विशेष पास व आकस्मिक अवकाश जैसी सुविधाएं अब नहीं मिलेंगी। मान्यता से बाहर हुई एम्पलाईज यूनियन में अब ऐसा कोई पदाधिकारी नहीं रहेगा जो कि रेल अधिकारियों के सामने कर्मचारियों की समस्याओं वाले मुद्दे रख सके।

जानिए क्या होता है फायदा

आमतौर पर कोई भी यूनियन अधिकारियों तक रेलवे कर्मचारियों की समस्याओं को पहुंचा सकती है। लेकनि जब आधिकारिक बैठकों की बात आती है तो मान्यता प्राप्त यूनियन को ही तवज्जो दी जाती है। रेलवे की ओर से संगठन को कार्यालय भी दिया जाता है। रेलवे की ओर से कर्मचारियों की समस्याओं पर चर्चा करने के लिए एक स्थायी वार्ता तंत्र (पीएनएम) की बैठक भी आयोजित की जाती है। इस बैठक में मान्यता प्राप्त यूनियन के पदाधिकारी शामिल होते हैं।

 

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