विश्वकर्मा जयंती: जानें क्यों नहीं छूने चाहिए आज के दिन औजार!
विश्वकर्मा जयंती: जानें क्यों नहीं छूने चाहिए आज के दिन औजार!

भगवान विश्वकर्मा को देश ही नही वरन दुनिया का पहला इंजीनियर माना जाता है। आज विश्वकर्मा जयंती के दिन दफ्तरों और कारखानों में भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है। देश में भगवान विश्वकर्मा के कम ही मंदिर हैं। और ये एक ऐसे देवता हैं। जिनकी पूजा घरों से ज्यादा कारखानों में की जाती है।
विश्वकर्मा जयंती: औजारों के देवता की उपासना का दिन
विश्वकर्मा जयंती हर साल भाद्रपद मास के शुक्ल पक्ष की कृतिका तिथि को मनाई जाती है, जो आमतौर पर सितंबर या अक्टूबर में पड़ती है। यह दिन भगवान विश्वकर्मा को समर्पित है, जिन्हें वास्तुकला, तकनीक और औजारों के देवता के रूप में पूजा जाता है।
मान्यताएं:
1. भगवान विश्वकर्मा को सृष्टि के निर्माता माना जाता है।
2. उनकी पूजा करने से कार्य में सफलता और समृद्धि प्राप्त होती है।
3. इस दिन औजारों को छूना अशुभ माना जाता है, क्योंकि भगवान विश्वकर्मा की पूजा की जाती है।
4. कुछ लोग इस दिन नए औजार खरीदने की परंपरा भी रखते हैं.
पूजा विधि:
1. सुबह जल्दी उठकर स्नान करें।
2. घर या कार्यस्थल पर भगवान विश्वकर्मा की तस्वीर या मूर्ति स्थापित करें।
3. उनकी पूजा करने के लिए फल, फूल, और मिठाइयां चढ़ाएं।
4. विशेष पूजा आरती और मंत्रों का जाप करें।
5. अपने औजारों को साफ करें और उन्हें भगवान विश्वकर्मा के सामने रखें।
इस दिन भगवान विश्वकर्मा की पूजा करने से आपको अपने कार्य में सफलता और समृद्धि प्राप्त होने की मंगलकामना हो!
भगवान विश्वकर्मा को वास्तुकला और शिल्पकला का देवता माना जाता है. लोग घरों में कम दफ्तरों में उनकी पूजा ज्यादा करते हैं. उन्हें दुनिया का पहला इंजीनियर भी माना जाता है. विश्वकर्मा जयंती 17 सितंबर 2024 को मनाई जा रही है. इस दिन को भगवान विश्वकर्मा के जन्म के रूप में मनाया जाता है. इस दिन उपकरणों, मशीनों और वाहन की भी पूजा की जाती है. लोग अपने व्यवसाय और नौकरी में तरक्की के लिए भगवान विश्वकर्मा की पूजा करते हैं. लेकिन आज के दिन काम के सिलसिले में भूलकर भी किसी भी तरह की मशीन का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. ऐसा करना शुभ नहीं माना जाता है. बता रहे हैं कि इसके पीछे की मान्यता क्या है.
नहीं करें औजार का इस्तेमाल
इस दिन भूलकर भी काम के लिए औजारों का इस्तेमाल नहीं करना चाहिए. मशीनों को एक दिन के लिए आराम देना चाहिए और उनका आदर करना चाहिए. क्योंकि ये मशीनें ही रोजी-रोटी का साधन हैं. किसी भी औजार का आज के दिन दुरुपयोग नहीं करना चाहिए और उसे इधर-उधर नहीं फेंकना चाहिए. ऐसा करने से विश्वकर्मा भगवान खफा होते हैं. आज के दिन किसी के साथ भी विवाद नहीं करना चाहिए. किसी तरह के नशे का या मास-मच्छी का सेवन नहीं करना चाहिए. इस दिन आपको सच्चे मन से विश्वकर्मा देव की पूजा करनी चाहिए.
कैसे करें पूजा?
भगवान विश्वकर्मा की पूजा निर्धारित शुभ मुहूर्त पर करें. नहा-धोकर अच्छे मन से भगवान की मूर्ति या फोटो की पूजा करें. भगवान पर फूल-फल चढ़ाएं. इस दिन दान करना भी काफी शुभ माना गया है. इसके अलावा दफ्तरों में पूरा स्टाफ इस मौके पर शामिल हो और भगवान विश्वकर्मा के साथ ही मशीन और वाहनों की भी पूजा करे.
कौन थे भगवान विश्वकर्मा?
भगवान विश्वकर्मा को दुनिया का पहला इंजीनियर माना जाता है. इसके अलावा एक मान्यता तो ये भी है कि विश्वकर्मा जी, भगवान ब्रह्मा के सातवें पुत्र थे. उन्हें दुनिया का सबसे बड़ा शिल्पकार और वास्तुकार माना जाता है. कहीं-कहीं तो उन्हें भगवान विष्णु का भी अवतार माना जाता है. ऐसा माना जाता है कि उन्होंने ही रावण की लंका बनाई थी. इसके अलावा उन्होंने हस्तिनापुर, द्वारका और इंद्रप्रस्थ का भी निर्माण किया था. विश्वकर्मा को ही भगवान विष्णु के सुदर्शन चक्र, शिव शंकर के त्रिशूल, ब्रह्मा के वज्र और पुष्पक विमान का निर्माता माना जाता है.








